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550 करोड़ रुपए से अधिक के कथित सरकारी फंड घोटाले की जांच में गिरफ्तार वरिष्ठ IAS अधिकारी पंकज अग्रवाल ने पंचकूला की स्पेशल CBI कोर्ट में नियमित जमानत याचिका दाखिल की। जिसे
कोर्ट ने वीरवार को फैसला सुनाते हुए खारिज कर दिया। बचाव पक्ष ने दावा किया है कि पंकज अग्रवाल को मामले में बाद में जांच के दौरान जोड़ा गया, जबकि मूल FIR में उनका नाम नहीं था। उन्होंने न तो कोई रिश्वत मांगी या स्वीकार की और न ही जांच में उनके खिलाफ किसी तरह की मनी ट्रेल या अवैध संपत्ति की बरामदगी हुई है। लेकिन कोर्ट ने सीबीआई की दलीलों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया और पंकज अग्रवाल की जमान याचिक नामंजूर कर दी।
100 करोड़ ट्रांसफर पर दावा, बदल गया था नियम पंकज अग्रवाल 22 जून 2026 से हिरासत में हैं। जमानत अर्जी में बचाव पक्ष ने कहा है कि जांच एजेंसी के पास इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्य पहले से हैं, इसलिए अब उन्हें जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। बचाव पक्ष का मुख्य तर्क था कि हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) के खाते से 100 करोड़ रुपए IDFC फर्स्ट बैंक में ट्रांसफर करना किसी नए या प्रतिबंधित बैंक में सरकारी पैसा जमा करना नहीं था। यह राशि पहले से ही सरकारी स्तर पर सूचीबद्ध बैंक कोटक महिंद्रा बैंक में जमा थी और उसे दूसरे सूचीबद्ध बैंक IDFC फर्स्ट बैंक में ट्रांसफर किया गया था। जमानत अर्जी में कहा गया है कि IDFC फर्स्ट बैंक ने अधिक ब्याज की पेशकश की थी और सरकार की नीति में अधिक ब्याज देने वाले बैंक के चयन का प्रावधान था। इसलिए पंकज अग्रवाल ने अधीनस्थ अधिकारियों से प्राप्त प्रस्ताव पर प्रशासनिक मंजूरी दी थी। पंकज अग्रवाल की हरियाणा, पंजाब व झारखंड में प्रॉपर्टी सरकार को दाखिल इमूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न (IPR) में पंकज अग्रवाल ने अपनी कुल 3 प्रॉपर्टी दिखाई हैं। ये प्रॉपर्टी पंचकूला, मोहाली (पंजाब) और धनबाद (झारखंड) में हैं। इनमें से सिर्फ एक का मार्केट वैल्यू शो की है। उनकी बेसिक सैलरी 2026 में 2.11 लाख रुपए रुपए है। पंचकूला के एमडीसी सेक्टर-2 स्थित द हाइलैंड्स सोसाइटी के अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ 59 लाख 72 हजार दिखाई। पंजाब के मोहाली में IAS-PCS को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में प्लॉट नंबर-403 इनके नाम है। हालांकि इसकी मार्केट वैल्यू नहीं दर्शाई है। तीसरी प्रॉपर्टी झारखंड के धनबाद में पैतृक मकान में आधी हिस्सेदारी दिखाई है। मकान के साइज व वैल्यू का ब्योरा नहीं दिया। फरवरी 2026 में सामने आया था घोटाला बैंक घोटाले का मामला फरवरी 2026 में सामने आया था। IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के 8 विभागों के पैसे को फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और डेबिट नोट्स के जरिए निकालकर शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया। हरियाणा सरकार के अनुरोध पर CBI ने यह जांच राज्य विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो से अपने हाथ में ली थी। अब तक एजेंसी इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के 6 अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 कर्मचारी, 2 कंपनियां और 6 निजी व्यक्ति शामिल बताए गए हैं। इस घोटाले का मास्टरमाइंड IDFC फर्स्ट बैंक का तत्कालीन मैनेजर रिभव ऋषि है। वह पहले ही गिरफ्तार हो चुका है।
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550 करोड़ के केस में IAS पंकज की बेल नामंजूर:बोले- सिर्फ बैंक बदलने की मंजूरी दी, CBI का दावा-सरकारी फंड डायवर्जन में सक्रिय भूमिका
