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किसान आंदोलन के तीसरे दिन बुधवार को मध्य प्रदेश सरकार ने मूंग की खरीदी 60% तक बढ़ाने का ऐलान कर दिया। खाद वितरण वाली ई-टोकन व्यवस्था भी फिलहाल स्थगित कर दी गई है। लेकिन किसान इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। 7 दिन का राशन, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का काफिला और बैरिकेड्स हटाकर राजधानी में एंट्री…ये तस्वीरें दिल्ली में हुए 2020 के किसान आंदोलन की याद दिला गईं। सरकार के 60% वाले ऐलान के बावजूद किसान क्यों नहीं मान रहे, 4 लेयर बैरिकेडिंग तोड़ने के बावजूद पुलिस ने बल प्रयोग क्यों नहीं किया; समझते हैं आज के एमपी एक्सप्लेनर में। सवाल 1: क्या आंदोलन सिंघु बॉर्डर जैसा है? बैरिकेडिंग टूटने पर पुलिस ने बल प्रयोग क्यों नहीं किया? जवाब- तरीके देखें तो हां। राशन साथ लाना, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का काफिला, बैरिकेडिंग तोड़ना और सड़क पर डेरा डालना- ये वही रणनीतियां हैं, जो 2020-21 के सिंघु बॉर्डर आंदोलन में दिखी थीं। लेकिन मांग और पैमाने के लिहाज से दोनों आंदोलनों में बड़ा फर्क है। पहले समझते हैं सिंघु बॉर्डर का सिनैरियो अब समझिए पुलिस ने बल प्रयोग क्यों नहीं किया सवाल 2: सरकार ने 60% खरीदी मान ली, फिर भी संतुष्टि क्यों नहीं? अब आगे क्या होगा? सवाल 3: Gen-Z बुजुर्ग किसानों की ताकत कैसे बने? जवाब- नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर बुजुर्ग और परंपरागत किसान नेताओं ने सरकार की सद्बुद्धि के लिए सत्यनारायण कथा और हवन किया, हनुमान चालीसा पढ़ी। वहीं, Gen-Z किसान इसी आंदोलन को सिस्टम और एल्गोरिदम की खामी की भाषा में बताया। मतलब एक ही आंदोलन में विरोध जताने के दो बिल्कुल अलग तरीके साथ-साथ चले। सवाल 4: सरकार सीधे किसान के खाते में खाद का पैसा क्यों नहीं डाल देती? जवाब- सुनने में यह सबसे आसान समाधान लगता है, पर मौजूदा सिस्टम की बनावट ही अलग है। सवाल 5: क्या यह आंदोलन पूरे मध्य प्रदेश में फैल सकता था? जवाब- फिलहाल इसकी संभावना सीमित दिखती है क्योंकि आंदोलन की सबसे बड़ी मांग 100% मूंग खरीदी है और मूंग की खेती पूरे प्रदेश में बराबर नहीं होती। एमपी एक्सप्लेनर की ये कड़ी भी पढ़ें… सीएम से क्यों नहीं हो पा रही किसानों की मुलाकात, 5 सवाल-जवाब में समझिए आंदोलन क्यों भड़का? नर्मदापुरम में किसानों का आंदोलन सोमवार को सड़क पर उतर आया। आरोप है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलने का वक्त तीन बार तय हुआ, तीनों बार टल गया। संयुक्त किसान मोर्चा के हजारों किसान भोपाल कूचकर मुख्यमंत्री आवास घेरने वाले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पढ़ें पूरी खबर…
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60% मूंग खरीदी का ऐलान, अब भी क्यों नाराजगी:फोर-लेयर बैरिकेडिंग के बावजूद भोपाल में कैसे दाखिल हुए किसान; अब आगे क्या करेंगे?
