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दुनिया के दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे ने अपनी सफलता का बड़ा श्रेय किस्मत को दिया है। करीब 147 अरब डॉलर (14.15 लाख करोड़ रुपए) नेटवर्थ वाले बफेट ने एक इंटरव्यू में कहा कि उनकी कामयाबी में टैलेंट या मेहनत जितना ही रोल ‘लक’ का रहा। अगले महीने 96 साल के होने वाले वॉरेन बफेट ने कहा कि लंबी उम्र ने उन्हें दशकों तक संपत्ति बनाने का मौका दिया। यह भी किस्मत का ही खेल है। बफेट ने अपने शुरुआती जीवन, अवसरों, जन्म की परिस्थितियों व परोपकार पर चर्चा की। पढ़िए इस इंटरव्यू के खास अंश… ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक बफे दुनिया के 10वें सबसे अमीर हैं, 80% वक्त किताबें- रिपोर्ट्स पढ़ने में बिताते हैं। मैं अक्सर कहता हूं कि इस धरती पर मौजूद 8 अरब लोगों में मैं सबसे खुशनसीब 10 लोगों में शामिल हूं। लोग मेरी सफलता को मेहनत व काबिलियत से जोड़ते हैं, लेकिन मैं इसे जन्मजात मौका मानता हूं। अगर मेरे पिता प्लम्बर होते, तो शायद मैं यहां नहीं होता। मेरे पिता हॉवर्ड बफेट स्टॉकब्रोकर थे और उन्हीं की वजह से मुझे कम उम्र में निवेश से लगाव हो गया। 11 साल की उम्र में मैंने ‘सिटीज सर्विस’ के तीन शेयर खरीदे थे। यह असाधारण बुद्धिमत्ता नहीं थी, बल्कि सही माहौल और अवसर मिलने का सुखद संयोग था। अमेरिका में जन्म, श्वेत पुरुष होना और वित्तीय समझ वाले परिवार से होना विशेषाधिकार था। साथ ही इस ‘जन्मजात मौके’ ने मुझे वह आत्मविश्वास दिया जिससे मैं 32 साल की उम्र में पहला मिलियन डॉलर यानी 10 लाख डॉलर कमा सका और आगे चलकर बर्कशायर हैथवे को शीर्ष तक पहुंचा पाया। मैं मानता हूं कि कोई कहां पैदा हुआ, परिवार का बैकग्राउंड क्या है, मौके कितने मिले- ये बातें कई बार टैलेंट से ज्यादा असर डालती हैं। मैंने जितनी दौलत कमाई, उससे भी ज्यादा समय तक उसे बढ़ाने का मौका पाया। अब उम्र के असर से याददाश्त कमजोर पड़ रही है, लेकिन निवेश का आनंद आज भी बरकरार है। पिछले साल बर्कशायर के सीईओ का पद ग्रेग एबेल को सौंपने के बावजूद दिल आज भी काम में ही धड़कता है ।पर असली मजा सिर्फ दौलत कमाने में नहीं, उसे बांटने में है। ‘द गिविंग प्लेज’ के तहत 99% संपत्ति दान करने के वादे के साथ मैंने गेट्स फाउंडेशन को 4.52 करोड़ रुपए दिए। पर अब मेरी राहें अलग हैं, क्योंकि इंसानों की पहचान में कोई 100% सही नहीं होता… गलतियां सभी से होती हैं। मुझसे भी हुईं। अब मेरी सोच स्पष्ट है। संपत्ति का बड़ा हिस्सा दिवंगत पत्नी के नाम पर बने सुसान थॉम्पसन बफेट फाउंडेशन और अपने बच्चों द्वारा संचालित फाउंडेशन्स को दे रहा हूं। उम्र लगातार बढ़ रही है और बच्चे भी उम्र के उस पड़ाव पर हैं, जहां फैसले टालना ठीक नहीं। इसलिए मैंने परोपकारी योजना की रफ्तार बढ़ा दी है। मेरी इच्छा है कि 31 दिसंबर 2034 तक मेरी पूरी संपत्ति समाज हित में सही संस्थाओं तक पहुंच जाए। पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है कि मेरी सफलता में सही समय, सही मौके और किस्मत का बड़ा योगदान रहा है।- वॉरेन
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96 साल के बफे बोले-कमाने से ज्यादा मजा बांटने में:पिता प्लंबर होते तो निवेशक न बनता; मेरी सफलता में टैलेंट से ज्यादा किस्मत
