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42 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद वहां मौजूद लोगों में आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं देखने को मिलीं।
विरोध-प्रदर्शनों के दौरान अक्सर भीड़ को कंट्रोल करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी है कि यह हमारी शरीर पर किस तरह असर करती है।
आंसू गैस कोई साधारण धुआं या गैस नहीं, बल्कि रासायनिक कणों का मिश्रण है, जो आंख, स्किन और रेस्पिरेटरी सिस्टम को तेजी से प्रभावित करता है।
इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज आंसू गैस के हेल्थ रिस्क पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- आंसू गैस के एक्सपोजर से शरीर पर क्या असर होता है?
- इससे बचाव के लिए तुरंत क्या करना चाहिए?
- किन स्थितियों में डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
एक्सपर्ट-
डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली
डॉ. पद्मा सिंह, रिटायर्ड लेक्चरर, केमिस्ट्री, प्रयागराज
सवाल- आंसू गैस क्या होती है?
जवाब- आंसू गैस बेहद महीन रासायनिक कणों का मिश्रण है। इसे गोले, ग्रेनेड या स्प्रे के जरिए हवा में छोड़ा जाता है। इसके संपर्क में आते ही आंखों में तेज जलन, आंसू, खांसी, सांस लेने में तकलीफ और स्किन इरिटेशन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसका इस्तेमाल भीड़ को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है।
सवाल- आंसू गैस में कौन-से केमिकल्स होते हैं?
जवाब- आंसू गैस में अलग-अलग तरह के केमिकल एजेंट इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें सबसे कॉमन CS गैस है। सभी प्रमुख एजेंट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- आंसू गैस शरीर में कैसे प्रवेश करती है?
जवाब- इसके बेहद महीन रासायनिक कण सांस के साथ नाक और फेफड़ों में पहुंचते हैं। ये कण आंखों और स्किन के सीधे संपर्क में भी आते हैं। इससे कुछ ही सेकेंड में जलन, आंसू, खांसी और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है।
सवाल- इसका असर कितनी देर में शुरू होता है और कितनी देर तक रहता है?
जवाब- आमतौर पर 20-30 सेकेंड के भीतर इसका असर शुरू हो जाता है। ज्यादातर मामलों में ताजी हवा मिलने पर 15-30 मिनट में असर कम होने लगता है। कुछ मामलों में ज्यादा एक्सपोजर से परेशानी कई घंटे या कुछ दिनों तक बनी रह सकती है।
सवाल- आंसू गैस के एक्सपोजर से शरीर पर क्या असर होता है?
जवाब- आंसू गैस सबसे ज्यादा आंखों, रेस्पिरेटरी सिस्टम और स्किन को प्रभावित करती है। गैस के संपर्क में ज्यादा देर रहने या पहले से कोई हेल्थ कंडीशन होने पर इसका असर गंभीर हो सकता है। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- आंसू गैस आंख, नाक और फेफड़ों को कैसे प्रभावित करती है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- आंसू गैस के रासायनिक कण आंख, नाक और रेस्पिरेटरी सिस्टम में मौजूद दर्द और जलन महसूस करने वाले रिसेप्टर्स को एक्टिव कर देते हैं।
- इससे कुछ ही सेकेंड में आंख, नाक और गले में तेज जलन होने लगती है।
- जब ये कण फेफड़ों तक पहुंचते हैं तो खांसी, घुटन और सांस लेने में परेशानी होती है।
सवाल- क्या ज्यादा एक्सपोजर से मौत भी हो सकती है?
जवाब- यह बहुत ही रेयर है। हालांकि लंबे समय तक आंसू गैस के संपर्क में रहने से रेस्पिरेटरी फेल्योर हो सकता है। इससे मौत का रिस्क बढ़ जाता है। यह जोखिम अस्थमा, फेफड़ों या हार्ट डिजीज से पीड़ित लोगों में ज्यादा होता है।
सवाल- किन लोगों को सबसे ज्यादा रिस्क है?
जवाब- आंसू गैस का असर हर किसी पर होता है, लेकिन कुछ लोगों को रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर आंसू गैस के आसपास हों तो बचाव के लिए क्या करें?
जवाब- ऐसी स्थिति में सबसे पहले तुरंत वहां से हटकर खुली और ताजी हवा वाली जगह पर जाएं। ग्राफिक में सभी सेफ्टी टिप्स देखिए-

सवाल- आंसू गैस के एक्सपोजर में हों तो क्या गलतियां बिल्कुल न करें?
जवाब- आंसू गैस के एक्सपोजर में आने पर कुछ गलतियां हेल्थ रिस्क बढ़ा सकती हैं। इन्हें ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर कॉन्टैक्ट लेंस लगाते हैं तो क्या सावधानियां बरतें?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- आंसू गैस के संपर्क में आने पर कॉन्टैक्ट लेंस तुरंत निकाल दें।
- इन्हें दोबारा इस्तेमाल न करें, क्योंकि इनमें रासायनिक कण चिपके रह सकते हैं।
- आंखों को साफ पानी से अच्छी तरह धोएं।
- जरूरत पड़ने पर ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
जवाब- इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें-
- सांस लेने में ज्यादा परेशानी हो।
- आंखों की जलन या धुंधलापन ठीक न हो।
- सीने में दर्द या घुटन महसूस हो।
- बेहोशी या चक्कर आए।
- बार-बार उल्टी या तेज एलर्जी हो।
ध्यान रखें, अस्थमा, फेफड़ों या हार्ट डिजीज से पीड़ित लोगों को हल्के लक्षण होने पर भी डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

सवाल- अगर आंसू गैस एक्सपायर्ड हो तो उसका क्या असर होता है?
जवाब- एक्सपायर्ड आंसू गैस का असर तय नहीं है। आमतौर पर समय के साथ इसकी प्रभावशीलता कम हो सकती है। लेकिन इसके यूज से आंखों, स्किन और रेस्पिरेटरी सिस्टम में जलन हो सकती है।
अगर कैनिस्टर खराब हो चुका हो या उसमें मौजूद केमिकल टूटने लगे हों, तो जोखिम बढ़ भी सकता है। इसलिए एक्सपायर्ड आंसू गैस का इस्तेमाल सुरक्षित नहीं माना जाता है।
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