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भाद्रपद पूर्णिमा पर बेतवा के बड़वाले घाट पहुंचे श्रद्धालु:तर्पण के साथ शुरू हुआ पितृपक्ष, प्रशासन ने घाटों पर बढ़ाई सुरक्षा




भाद्रपद पूर्णिमा से पितृपक्ष शुरू होते ही बेतवा नदी के बड़वाले घाट पर श्रद्धालु पहुंचने लगे। लोगों ने जल, कुशा, काले तिल और दूध से पितरों का तर्पण किया। घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने पूर्वजों को याद कर श्राद्ध कर्म किए। पितृपक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेगा। इन 16 दिनों में तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाएंगे। तर्पण के बाद पितरों को लगाया भोग पितृपक्ष में तर्पण के बाद पितरों की पसंदीदा चीजों का भोग लगाया गया। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराया गया। श्रद्धालुओं ने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद की कामना की। बेतवा तट की पुरानी धार्मिक मान्यता पंडित राजेंद्र दुबे ने बताया कि बेतवा तट की धार्मिक मान्यता पुरानी है। मान्यता है कि यहां श्रीराम के चरण पड़े थे। कालिदास ने भी बेतवा की पवित्रता का उल्लेख किया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में तर्पण करने से पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। दीपक सक्सेना ने बताया कि तर्पण के लिए परिवार के बड़े सदस्य की बाध्यता नहीं है। परिवार का कोई भी सदस्य तर्पण कर सकता है। उन्होंने बताया कि गया जी में पिंडदान करने के बाद भी पितृपक्ष में तर्पण करना जरूरी माना जाता है। प्रमुख घाटों पर बढ़ाई सुरक्षा पितृपक्ष में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने को देखते हुए पुलिस ने बड़वाले घाट, रामघाट और महल घाट सहित प्रमुख घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है। होमगार्ड, एसडीआरएफ और आपदा मित्रों की टीम पितृपक्ष के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभालेगी।



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