गुरुग्राम24 मिनट पहले
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गुरुग्राम में स्थित सीजीएसटी की बिल्डिंग।
गुरुग्राम में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) की एंटी-इवेजन विंग ने एक बड़े कॉर्पोरेट फ्रॉड का भंडाफोड़ किया है। विभाग ने बेहद शातिर तरीके से अंजाम दिए जा रहे ₹200 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले को उजागर किया है। इस सुनियोजित वित्तीय फर्जीवाड़े के आरोप में विभाग की टीम ने ऑटो सर्विस क्षेत्र की एक नामी कंपनी के दो पूर्व को-फाउंडर्स और दो चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने पुख्ता सबूतों के आधार पर चारों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। सीजीएसटी अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी उच्च शिक्षित हैं और उनकी उम्र 30 से 35 वर्ष के बीच है।
इन लोगों ने करीब चार साल पहले ऑटो सर्विस सेक्टर में एक स्टार्टअप की शुरुआत की थी, जो घर पर गाड़ियों की सर्विसिंग उपलब्ध कराता था। शुरुआती घाटे के बाद, कंपनी के नुकसान की भरपाई करने और भारी निवेश जुटाने के लिए आरोपियों ने शेल कंपनियों का एक नेटवर्क तैयार किया।

गुरुग्राम में स्थित सीजीएसटी की बिल्डिंग।-फाइल फोटो
शेल कंपनियों से बुना फर्जी बिलिंग का जाल
इस सिंडिकेट ने बिना किसी माल या वास्तविक सर्विस की डिलीवरी के, केवल कागजों पर करोड़ों रुपये के फर्जी टैक्स इनवॉइस (बिल) जारी किए। इसके बाद ‘सर्कुलर ट्रेडिंग’ तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पैसों और बिलों को आपस में गोल-गोल घुमाया गया।
इस कागजी टर्नओवर के दम पर आरोपियों ने सरकार से ₹200 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा ठोक दिया। इस पूरी साजिश में दोनों चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने अपनी वित्तीय विशेषज्ञता का दुरुपयोग करते हुए फर्जी खातों को वैध रूप देने का काम किया।
कड़े जीएसटी कानून के तहत हुई कार्रवाई
अधिकारियों का कहना है कि विभाग ने इस मामले में केंद्रीय माल एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई की है। चूंकि धोखाधड़ी की रकम ₹5 करोड़ से अधिक है, इसलिए यह कानूनन एक गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
छापेमारी के दौरान विंग ने आरोपियों के पास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, लैपटॉप, फोन और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। आरोपियों पर टैक्स चोरी की गई राशि का 100% जुर्माना लगाया जाएगा और दोष सिद्ध होने पर इन्हें 5 वर्ष तक की सश्रम जेल हो सकती है।
एआई और डेटा एनालिटिक्स से पकड़ा गया फ्रॉड
यह पूरा घोटाला जीएसटी विभाग के आधुनिक एआई-आधारित ‘बिजनेस इंटेलिजेंस एंड फ्रॉड एनालिटिक्स’ सिस्टम की वजह से रडार पर आया। सिस्टम ने पकड़ा कि जिन कंपनियों के बीच करोड़ों का व्यापार दिखाया जा रहा है, जमीन पर उनके बीच माल की कोई वास्तविक आवाजाही नहीं हो रही है।
ई-वे बिल और टोल डेटा के मिलान में गड़बड़ी मिली
ई-वे बिल और टोल डेटा का मिलान करने पर जब गड़बड़ी की पुष्टि हुई, तब एंटी-इवेजन विंग ने छापेमारी कर इस सिंडिकेट को पकड़ लिया। अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़ी कुछ अन्य फर्जी कंपनियों और बड़े नामों का भी खुलासा हो सकता है ।

