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लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) की तीन वर्षीय अनाथ हथिनी ‘भवानी’ को गोरखपुर चिड़ियाघर भेजने के प्रस्ताव ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। वन्यजीव प्रेमियों, वन कर्मियों और महावतों ने इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि भवानी को उसके सरोगेट परिवार और वर्षों से परिचित माहौल से अलग करना उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। खास बात यह है कि इसी हथिनी का नाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुधवा दौरे के दौरान ‘भवानी’ रखा था। करीब तीन वर्ष पहले नजीबाबाद वन प्रभाग (बिजनौर) से भवानी को रेस्क्यू कर दुधवा लाया गया था। उस समय उसकी उम्र महज 20 दिन थी। मां से बिछड़ने के बाद वह बेहद कमजोर और असहाय थी। उसकी देखभाल की जिम्मेदारी महावत इरशाद अली को सौंपी गई। इरशाद ने दिन-रात उसकी सेवा की। वह अक्सर भवानी के पास ही सोते थे ताकि उसे सुरक्षा का एहसास हो। भवानी भी सोते समय अपनी छोटी सूंड उनके ऊपर रखकर स्नेह जताती थी। समय के साथ दोनों के बीच गहरा भावनात्मक रिश्ता बन गया। दुधवा के हाथियों ने बनाया अपना परिवार भवानी को केवल इंसानों का ही नहीं, दुधवा के हाथियों का भी साथ मिला। छह वर्षीय अनाथ हथिनी दुर्गा उसकी सबसे करीबी साथी बन गई, जबकि अन्य वयस्क हथिनियों ने उसकी परवरिश में मां जैसी भूमिका निभाई। वन अधिकारियों के अनुसार, धीरे-धीरे भवानी इस सरोगेट झुंड का अभिन्न हिस्सा बन गई और अब उसका पूरा जीवन इसी परिवार के साथ जुड़ा हुआ है। ‘मेरी बेटी को मुझसे छीना जा रहा है’ महावत इरशाद अली, जिन्हें केंद्र सरकार ‘गज गौरव पुरस्कार’ से सम्मानित कर चुकी है, भवानी के स्थानांतरण से बेहद भावुक हैं। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है जैसे मेरी अपनी बेटी को मुझसे छीन लिया जा रहा हो।” वन कर्मियों का कहना है कि भवानी और उसके देखभाल करने वालों के बीच वर्षों में बना रिश्ता अब टूटने की कगार पर है। वन विभाग ने महावतों की कमी बताई वजह दुधवा के फील्ड डायरेक्टर एच. राजामोहन ने बताया कि रिजर्व में प्रशिक्षित महावतों की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि दुधवा में 25 कैंप हाथी हैं, लेकिन केवल 10 महावत उपलब्ध हैं, जबकि प्रत्येक हाथी के लिए एक महावत और एक चारा काटने वाले कर्मचारी की जरूरत होती है। इसी वजह से भवानी को गोरखपुर चिड़ियाघर भेजने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। ‘बाघ और नर हाथियों से खतरे’ का भी तर्क दुधवा के उप निदेशक जगदीश आर. का कहना है कि भवानी को जंगल में बाघों और वयस्क नर हाथियों से संभावित खतरे को देखते हुए स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, विरोध करने वालों का कहना है कि अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया जिसमें भवानी पर हमला हुआ हो। उनका सवाल है कि यदि यही तर्क है तो अन्य हाथी शावकों को चिड़ियाघर क्यों नहीं भेजा जाता। वन्यजीव प्रेमियों ने उठाए फैसले पर सवाल वन्यजीव प्रेमियों ने उत्तर प्रदेश की प्रधान मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अनुराधा वेमुरी सहित वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर स्थानांतरण का फैसला रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि भवानी वर्षों से दुधवा के सरोगेट परिवार का हिस्सा है। उसे इस माहौल से अलग करना उसके हित में नहीं होगा। विरोध करने वालों ने यह भी सवाल उठाया कि जब दुधवा ने हाल ही में कर्नाटक से सात नए कैंप हाथियों की मांग की है, तब महावतों की कमी का तर्क पूरी तरह उचित नहीं लगता। पहले ही झुंड से अलग कर दी गई भवानी स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही भवानी को उसके हाथियों के परिवार से अलग कर एक अलग बाड़े में रखा गया है। इससे वन कर्मियों और महावतों की चिंता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि एक बार मां से बिछड़ चुकी भवानी को दूसरी बार भी अपने परिवार से अलग करना उसके व्यवहार और मानसिक स्थिति पर नकारात्मक असर डाल सकता है। हाईकोर्ट में PIL की तैयारी इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के अधिवक्ता सैयद मोहम्मद हैदर रिजवी ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, सेंट्रल जू अथॉरिटी, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड और उत्तर प्रदेश वन विभाग को पत्र भेजकर स्थानांतरण रोकने की मांग की है। उनका तर्क है कि कैप्टिव एलीफेंट (ट्रांसफर या ट्रांसपोर्ट) नियम, 2024 भवानी पर लागू नहीं होते, क्योंकि वह जंगली परिवेश में जन्मी अनाथ हथिनी है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 39 के तहत सरकारी संपत्ति मानी जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूची-1 के वन्यजीव को चिड़ियाघर भेजने के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी की अनुमति आवश्यक है। रिजवी ने सुझाव दिया है कि भवानी को दुधवा में ही सुरक्षित बाड़े में रखा जाए। यदि स्थानांतरण का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो वह इस मामले में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे। सवाल सिर्फ नियमों का नहीं, रिश्तों का भी भवानी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल प्रशासनिक फैसले या कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है। एक ओर वन विभाग इसे संसाधनों और सुरक्षा से जुड़ा निर्णय बता रहा है, वहीं दूसरी ओर महावत, वन कर्मी और वन्यजीव प्रेमी इसे एक ऐसी अनाथ हथिनी से उसके दूसरे परिवार को छीनने जैसा मान रहे हैं, जिसने बड़ी मुश्किल से अपने जीवन में अपनापन पाया है। अब सभी की नजर इस पर है कि शासन इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला क्या लेता है।
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दुधवा की 'भवानी' को चिड़ियाघर भेजने पर बवाल:20 दिन की उम्र में मिला था नया परिवार, अब फिर बिछड़ने का डर; हाईकोर्ट में PIL की तैयारी
