पीलीभीत5 मिनट पहले
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पीलीभीत स्थित जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में हुए 50 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय घोटाले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने जांच की धीमी गति पर नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने कहा कि मामले की जांच के लिए गठित समिति की कार्रवाई ‘घोंघे की चाल’ से चल रही है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, शासन के निर्देश पर 12 मार्च 2026 को तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया था। समिति को डीआईओएस कार्यालय में हुई वित्तीय अनियमितताओं की गहन जांच कर 10 कार्य दिवसों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, चार महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है, जिसे हाईकोर्ट ने अत्यंत गंभीर माना है।
अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि तत्कालीन जिलाधिकारी ने 17 फरवरी 2026 को शासन को भेजी अपनी रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि यह घोटाला केवल एक निचले स्तर के कर्मचारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें डीआईओएस सहित कई उच्च अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। इसके बावजूद, कार्रवाई के तौर पर केवल एक कनिष्ठ कर्मचारी को निलंबित किया गया था, जिस पर हाईकोर्ट ने बाद में रोक लगा दी।
मामले में वास्तविक प्रगति न होने पर, खंडपीठ ने अब पीलीभीत के जिलाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से इस पूरी जांच की निगरानी करने का जिम्मा सौंपा है। अदालत ने राज्य के स्थायी अधिवक्ता को निर्देश दिया है कि 1 सितंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में जिलाधिकारी के हस्ताक्षरों से जांच की अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। यह याचिका पीलीभीत निवासी फूलचंद द्वारा दायर की गई है।

