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Bhupesh Baghel Punjab Visit | Congress Gutbaji Report & Internal Conflict


पंजाब में करीब 7 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में गुटबाजी थम नहीं रही है। फिरोजपुर से सांसद शेर सिंह घुबाया ने कहा कि राजा वड़िंग सही काम नहीं कर रहे हैं। उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। पंजाब के लोग वड़िंग से नाराज हैं।

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उनका कहना है कि राजा वड़िंग ने कहा कि नए लोगों को टिकट देना है। जिसकी वजह से लोगों में नाराजगी है। उन्होंने कहा कि पार्टी से ऊपर कोई नहीं है। वड़िंग ने आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ नहीं कहा। वहीं कांग्रेस नेता कुलदीप सिंह वैद का कहना है कि घुबाया अपने पद से इस्तीफा दे दें। प्रधान का इस्तीफा मांगना अनुशासनहीनता है।

वहीं, कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इसको लेकर कल दिल्ली में एक सीक्रेट मीटिंग हुई। जिसमें प्रधान राजा वड़िंग, पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी और सांसद सुखजिंदर रंधावा मौजूद थे। यह मीटिंग कांग्रेस हाईकमान के कलह खत्म करने के लिए नियुक्त किए डिजाइनबॉक्स्ड कंपनी के नरेश अरोड़ा ने कराई थी।

सूत्रों के मुताबिक मीटिंग में राजा वड़िंग ने दोटूक कह दिया कि मैं इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं लेकिन सब मेरे साथ हाईकमान के पास चलो। इस पर चन्नी ने कहा कि उन्हें किसी व्यक्ति विशेष से कोई एतराज नहीं है। यह मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पंजाब में लोगों की राय और पार्टी के फ्यूचर का है।

हालांकि सांसद सुखजिंदर रंधावा ने किसी तरह के पद को लेकर साफ किया कि उन्हें कोई पद नहीं चाहिए। हमारी एक ही प्रायोरिटी है कि 2027 में पंजाब में कांग्रेस की सरकार बने।

उधर, भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्‌टू ने कांग्रेसियों को भाजपा में आने का ऑफर दिया है। उन्होंने कहा कि एक जिला प्रधान कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य व पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की शिकायत कर रहा है। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है। कांग्रेस वाले भाजपा में आ जाओ, यहां मान सम्मान सब मिलेगा।

डिजाइनबॉक्स्ड कंपनी के नरेश अरोड़ा, पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी और पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग।

डिजाइनबॉक्स्ड कंपनी के नरेश अरोड़ा, पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी और पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग।

पार्टी प्रभारी भूपेश बघेल चंडीगढ़ पहुंचे भूपेश बघेल 10 दिन के दौरे पर चंडीगढ़ पहुंच गए हैं। वह पंजाब के विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे। वह रोजाना दो-दो जिलों में ब्लॉक प्रधान, ब्लॉक पदाधिकारियों, जिला पदाधिकारियों, 2022 में चुनाव लड़ चुके उम्मीदवारों, विधायकों व सांसदों के साथ बैठक करेंगे।

इन बैठकों में वह चन्नी और वड़िंग गुटों की वास्तविक ताकत और इस गुटबाजी से पार्टी को होने वाले नुकसान का सटीक आंकलन करेंगे। बघेल 10 दिन के दौरे की रिपोर्ट तैयार कर हाईकमान को देंगे और उनकी यह फाइनल रिपोर्ट तय करेगी कि पार्टी हाईकमान चुनाव से पहले क्या फैसला करता है।

राजा वड़िंग ने इस्तीफे की बात नकारी वहीं राजा वड़िंग ने इस्तीफे की खबरों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि कहा- “हर बूथ कांग्रेस मजबूत” अभियान के तहत पहले से जिला-वार दौरे तय हैं। 9 दिनों में 18 जिलों का दौरा, कार्यकर्ताओं व जिला कांग्रेस कमेटियों के साथ बैठकें होंगी। उन्होंने कहा कि AAP की आईटी सेल झूठी सुर्खियां फैलाकर भ्रम पैदा कर रही है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि “सूत्रों” के बजाय आधिकारिक कार्यक्रम और तथ्यों के आधार पर खबरें प्रकाशित करें।

वहीं फरीदकोट में पार्टीलाइन से हटकर धरना देने और जिला प्रधान को न बुलाने के विरोध में चन्नी के खिलाफ हाईकमान को शिकायत की गई है। फरीदकोट कांग्रेस के जिला प्रधान बब्बू बराड़ ने का कहना है कि उन्हें इस बारे में बताया ही नहीं गया। उनका कार्यक्रम 31 जुलाई को होना था। उन्होंने बताया कि इस संबंध में राजा वडिंग को भी बताया। उन्होंने कहा कि इस बारे में बाहर बात न करें। पार्टी की बदनामी होगी। बब्बू बराड़ ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में भूपेश बघेल को भी शिकायत दी है।

कौन हैं नरेश अरोड़ा, जिन्हें कलह सुलझाने का जिम्मा नरेश अरोड़ा वह नीतिकार हैं, जिन्होंने कर्नाटक में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच चुनाव से पहले समझौता करवाया और कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनाई। हाईकमान ने पंजाब में दोनों गुटों का समझौता करवाने के लिए नरेश अरोड़ा को उतार दिया है। नरेश अरोड़ा पंजाब के नेताओं से जल्द ही बैठक कर उन्हें कर्नाटक फार्मूला समझाएंगे।

वहीं, पार्टी हाईकमान के निर्देश पर पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल आज (30 जुलाई) चंडीगढ़ पहुंचेंगे और कल से 9 दिन तक वह पंजाब के अलग-अलग जिलों में गुटबाजी की ग्राउंड रिएलिटी व इंपैक्ट का जायजा लेकर फाइनल रिपोर्ट हाईकमान को देंगे। बघेल के दौरे के बाद पार्टी हाईकमान गुटबाजी पर बड़ा फैसला लेगी।

गुटबाजी खत्म करने के लिए नरेश अरोड़ा का ‘3-स्टेप फॉर्मूला’…

1. व्यक्तिगत चेहरे की जगह पार्टी ब्रांड

कर्नाटक में नरेश अरोड़ा ने दोनों गुटों को समझाया कि आपसी लड़ाई से दोनों का नुकसान होगा। उन्होंने चुनाव अभियान को व्यक्तिगत चेहरों के बजाय 5 गारंटी योजनाओं और भाजपा के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुद्दे पर केंद्रित कर दिया। पोस्टर-बैनरों में सिद्धरमैया और डी.के. शिवकुमार दोनों को समान कद और जगह दी गई।

पंजाब में भी अरोड़ा राजा वड़िंग या चन्नी में से किसी एक को बड़ा दिखाने के बजाय आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की विफलताओं जैसे पेपर लीक, कानून-व्यवस्था को मुख्य मुद्दा बनाने का प्रस्ताव देंगे। चुनाव प्रचार अभियान ऐसा तैयार किया जाएगा कि दोनों गुटों के नेताओं का कद और उपस्थिति एक समान दिखे।

2. नेताओं के बीच रोल और जिम्मेदारी का बंटवारा

कर्नाटक में सिद्धारमैया को मास अपील वाला नेता मानते हुए पूरे राज्य में रैलियां करने, ओबीसी, दलित को साधने की जिम्मेदारी दी गई। वहीं, डी.के. शिवकुमार को संगठन को मजबूत करने, बूथ मैनेजमेंट और पार्टी संसाधनों का जिम्मा सौंपा गया। दोनों के अधिकार क्षेत्र अलग तय किए गए, ताकि सीधा टकराव न हो।

पंजाब में भी नरेश अरोड़ा इसी फॉर्मूले पर काम करने का प्रस्ताव दे सकते हैं। चन्नी को कैम्पेन और पब्लिक कनेक्ट का मुख्य चेहरा बनाने का ऑफर दिया जा सकता है। वहीं, राजा वड़िंग को बतौर प्रदेश अध्यक्ष संगठन को संभालने, जिला स्तर पर तालमेल और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का जिम्मा दिया जा सकता है।

3. एकजुटता का पब्लिक मैसेज

नरेश अरोड़ा ने दोनों नेताओं के बीच एक अनऑफिशियल वीडियो/तस्वीरें शूट करवाई थीं, जहां सिद्धारमैया और शिवकुमार साथ बैठकर चाय पीते और खुशमिजाज माहौल में कर्नाटक की योजनाओं पर चर्चा करते दिखे। साथ ही, दोनों को इस बात पर सहमत कराया गया कि पहले सरकार बनाई जाएगी, मुख्यमंत्री का फैसला चुनाव के बाद हाईकमान करेगा।

पंजाब में भी नरेश अरोड़ा अगर दोनों गुटों में समझौता करवाने में सफल हुए तो यहां भी ऐसा ही कुछ किया जाएगा, ताकि कार्यकर्ताओं के बीच एक संदेश जाए कि अब पार्टी नेता एकजुट हैं। हालांकि, यह सब तभी संभव है जब चन्नी गुट राजा वड़िंग के साथ काम करने को तैयार हो।

चन्नी गुट ने ऐसे बनाई वडिंग गुट से दूरी…

  • समानांतर बैठकें और शक्ति प्रदर्शन: पंजाब कांग्रेस में नई नियुक्तियों और पदों के आवंटन के बाद, चन्नी गुट ने पार्टी के आधिकारिक मंच से अलग हटकर चरणजीत सिंह चन्नी के मोरिंडा स्थित निवास पर विशेष बैठक की। इसमें पूर्व मंत्रियों, विधायकों और समर्थकों का जमावड़ा लगाकर शक्ति प्रदर्शन किया गया और खुले तौर पर प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को हटाने की मांग उठाई गई। पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की बैठकों में शामिल नहीं हुए और दौरे के आखिरी दिन बघेल के साथ राणा गुरजीत के घर बैठक की, लेकिन शर्त रखी कि राजा वडिंग इसमें नहीं आएंगे।
  • आधिकारिक दौरों से दूरी: जब बरनाला में प्रदर्शनकारी सफाई कर्मचारियों पर लाठीचार्ज हुआ, तो चन्नी गुट ने प्रदेश अध्यक्ष से अलग होकर सुबह ही दौरा किया और प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान चन्नी ने अपने भाषण में खुद को मुख्यमंत्री के चेहरे की तरह पेश किया। उसी कार्यक्रम में राजा वड़िंग तब पहुंचे जब चन्नी गुट वहां से निकल गया। दोनों गुटों का अलग-अलग जाना यह दर्शाने के लिए काफी था कि चन्नी गुट आधिकारिक सांगठनिक कार्यक्रमों के साथ चलने को तैयार नहीं है।
  • हाईकमान की बैठकों में सख्त तेवर: दिल्ली में AICC के वरिष्ठ नेताओं और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की मौजूदगी में हुई बैठकों में चन्नी गुट का आक्रामक रुख देखने मिला। सूत्रों के अनुसार, चन्नी ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि प्रदेश नेतृत्व में बदलाव नहीं हुआ, तो वह चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देंगे। सहमति न बनने पर वह बैठक बीच में छोड़कर निकल गए थे।
  • संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन से दूरी: जब पंजाब कांग्रेस के सांसदों ने राजा वड़िंग के नेतृत्व में संसद परिसर में पंजाब के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया, तो चन्नी और सुखजिंदर रंधावा इसमें शामिल नहीं हुए। इससे यह साफ संदेश गया कि हाईकमान की ओर से दिल्ली में सुलह कराने के दावों के बावजूद दोनों गुटों के बीच जमीनी दूरियां खत्म नहीं हुई थीं।
  • अलग राजनीतिक जमीन: फरीदकोट में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने गुट के कुछ नेताओं के साथ धरना दिया। चन्नी ने धरने के लिए जो पास्टर जारी किया उस पर कांग्रेस का कोई निशान तक नहीं था। पार्टी का आधिकारिक धरना 30 जुलाई को होना था। चन्नी के धरने के बाद कांग्रेस ने 30 जुलाई का धरना स्थगित कर दिया।
चन्नी ने यह पोस्टर जारी किया था, जिसमें कांग्रेस पार्टी का निशान भी नहीं था।

चन्नी ने यह पोस्टर जारी किया था, जिसमें कांग्रेस पार्टी का निशान भी नहीं था।

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पंजाब कांग्रेस में चन्नी का वड़िंग गुट को झटका:फरीदकोट का प्रदर्शन कैंसिल कराया; हाईकमान ने ताकत देखने बघेल को भेजा

पंजाब कांग्रेस के चन्नी गुट ने वड़िंग गुट को झटका दिया है। फरीदकोट में बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी के बाहर फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर 31 जुलाई को प्रस्तावित धरने से पहले ही बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने अलग प्रदर्शन कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…



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