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चंडीगढ़ में हत्या प्रयास के 3 आरोपी बरी:गवाहों के बयान बदलने का मिला लाभ; आरोप साबित नहीं कर सके सरकारी वकील




चंडीगढ़ की जिला अदालत ने वर्ष 2018 में सेक्टर-31 थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के प्रयास, घर में घुसकर हमला, तोड़फोड़ और जान से मारने की धमकी के मामले में 3 आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि सरकारी वकील आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। मामले के प्रमुख गवाहों ने अलग-अलग समय पर अलग-अलग बयान दिए, जिससे सरकारी वकील का पूरा मामला कमजोर पड़ गया। इसी आधार पर अदालत ने दीपक उर्फ दीपा, गौरव और दलीप को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। मां से छेड़छाड़ के बाद विवाद शुरू अदालती रिकॉर्ड के अनुसार शिकायतकर्ता राज कुमार ने पुलिस को बताया था कि 7 मार्च, 2018 को उसकी मां आशा देवी बच्चों की स्कूल फीस जमा कर घर लौट रही थीं। रास्ते में आरोपी दीपक के भतीजे अमन ने उनके साथ कथित तौर पर फब्तियां कसीं। आशा देवी ने इसका विरोध किया तो दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। शिकायत के अनुसार, आशा देवी बाद में आरोपी पक्ष के घर शिकायत करने पहुंचीं। वहां भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ और आरोप है कि उस समय उन्हें अंजाम भुगतने और सबक सिखाने की धमकी दी गई। एक सप्ताह बाद घर में घुसकर हमला राज कुमार ने अपनी शिकायत में बताया कि 14 मार्च 2018 की शाम करीब सात बजे दीपक उर्फ दीपा, गौरव, दलीप और अन्य लोग तलवार, चॉपर तथा डंडों से लैस होकर उनके घर में घुस आए। आरोप है कि घर में घुसते ही आरोपियों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी और परिवार के सदस्यों पर हमला कर दिया। शिकायत में बताया गया दीपक ने आशा देवी के सिर पर धारदार हथियार से वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। वहीं अन्य आरोपियों ने भी उनके साथ मारपीट की। बचाने आए भाई पर हमला किया शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि जब उसका छोटा भाई पूरन अपनी मां को बचाने के लिए आगे आया तो आरोपियों ने उस पर भी हमला कर दिया। आरोप है कि दीपक ने चॉपर से पूरन की आंख पर वार किया, जबकि अन्य लोगों ने भी उसके साथ मारपीट की। शोर-शराबा होने पर आरोपी परिवार को जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर हत्या के प्रयास समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित करने का प्रयास किया। लेकिन अदालत में सुनवाई के दौरान मामले के सबसे महत्वपूर्ण गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए। बाद में दोबारा गवाही के दौरान उन्होंने पहले से अलग बयान दिए। अदालत ने पाया कि एक ही गवाह के अलग-अलग समय पर दिए गए बयानों में गंभीर विरोधाभास है। ऐसे में उनकी गवाही पूरी तरह भरोसेमंद नहीं मानी जा सकती। बचाव पक्ष ने उठाए गवाही पर सवाल बचाव पक्ष के वकील विजय कुमार ने अदालत में दलील दी कि जिन गवाहों ने बार-बार अपने बयान बदले हैं, उनकी गवाही पर विश्वास नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकारी आरोप साबित करने के लिए कोई स्वतंत्र और ठोस साक्ष्य भी पेश नहीं कर सका। दोनों पक्षों की बात सुनने और मामले में पेश किए गए सबूतों को देखने के बाद अदालत ने कहा कि सरकारी वकील आरोप साबित नहीं कर सका। अदालत ने माना कि गवाहों के बार-बार बयान बदलने और पक्के सबूत नहीं होने के कारण आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।



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