4 घंटे पहले
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आज (2 अगस्त) सावन महीने की पहली चतुर्थी है। अभी सावन कृष्ण पक्ष चल रहा है और इस पक्ष की चौथी तिथि पर संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। सावन, रविवार और चतुर्थी का संयोग होने से भगवान शिव और गणपति के साथ ही सूर्यदेव की पूजा भी करनी चाहिए। मान्यता है कि इस तिथि पर भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख-शांति और सफलता मिलती है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, सावन महीने की चतुर्थी पर गणेश पूजा और व्रत करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और परेशानियों से मुक्ति मिलती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए इनकी भक्ति करने से भक्त के सभी विघ्न यानी समस्याएं दूर हो जाती हैं। पूजा में भगवान शिव और गणपति जी का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। दिन की शुरुआत भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर करेंगे, तो बहुत शुभ रहेगा।
पंचदेवों की पूजा के साथ शुरू होते हैं शुभ काम
शास्त्रों में पंचदेव बताए गए हैं- इनमें भगवान गणेश, शिव, विष्णु, सूर्यदेव और मां दुर्गा शामिल हैं। इनकी पूजा के साथ ही शुभ कामों की शुरुआत करने की परंपरा है। माना जाता है कि इन पांचों की पूजा करने से हमारी बाधाएं दूर होती हैं और काम जल्दी सफल होते हैं। सूर्यदेव एकमात्र प्रत्यक्ष दिखाई देने वाले देवता माने गए हैं। आज सावन, चतुर्थी और रविवार के योग में सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य चढ़ाएं। लोटे में पानी भरें और पानी में कुमकुम या चंदन, चावल और फूल भी डाल लेंगे, तो बहुत शुभ रहेगा। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते हुए अर्घ्य अर्पित करें।
नौ ग्रहों के राजा हैं सूर्य देव
ज्योतिष में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु बताए हैं। इन नौ ग्रहों में सूर्य को राजा माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य की स्थिति ठीक नहीं है, उन्हें किसी भी काम में आसानी से सफलता नहीं मिल पाती है और कड़ी मेहनत करने के बाद भी उचित मान-सम्मान नहीं मिलता है। सूर्य के दोष दूर करने के लिए रोज सुबह सूर्य को अर्घ्य चढ़ाने की मान्यता है। सूर्य के निमित्त गुड़ का दान भी करना चाहिए।
संकटों से मुक्ति दिलाता है चतुर्थी व्रत
सावन की इस चतुर्थी को गजानन संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं। इस दिन भगवान गणेश के गजानन स्वरूप की पूजा करनी चाहिए। संकष्टी शब्द संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है संकटों से मुक्ति पाना। यही कारण है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करके भक्त दुखों और परेशानियों से छुटकारा पाने की प्रार्थना करते हैं। गणेश पुराण में भी चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश की पूजा को शुभ बताया गया है।
गणेश जी के साथ करें शिव-पार्वती की पूजा
सावन महीने की संकष्टी चतुर्थी का संबंध भगवान शिव से भी माना जाता है। भगवान गणेश को भगवान शिव और माता पार्वती का पुत्र माना जाता है, इसलिए इस दिन गणेश पूजा साथ शिव-पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा में सुगंधित फूल, बेलपत्र खासतौर पर चढ़ाते हैं, देवी पार्वती को सुहाग की सामग्री जैसे लाल चुनरी, लाल चूड़ियां, बिन्दी, कुमकुम अर्पित करना चाहिए। भगवान गणेश को पंचामृत से स्नान कराएं, इसके बाद जल से स्नान कराएं। वस्त्र और हार-फूल से श्रृंगार करें। धूप-दीप जलाएं। दूर्वा और लड्डू चढ़ाएं। ऊँ गं गणपतयै नम: मंत्र का जप करें।
इस व्रत में भक्त पूरे दिन निराहार रहते हैं यानी अन्न का त्याग करते हैं। जो भक्त पूरे दिन भूखे नहीं रह पाते हैं, वे एक समय फलाहार कर सकते हैं, दूध और फलों का रस पी सकते हैं। शाम को भी भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा की जाती है। पूजा करने के बाद भोजन ग्रहण किया जाता है। भगवान गणेश को लड्डुओं का भोग खासतौर पर लगाया जाता है। इस दिन जरूरतमंदों को लड्डू, कपड़े, खाना, जूते-चप्पल, धन का दान करने की परंपरा भी है। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा, व्रत और दान करने से जीवन में सुख-शांति आती है और परेशानियों से राहत मिलती है।
ऐसे कर सकते हैं संकष्टी चतुर्थी व्रत
व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। कई लोग इस दिन काले तिल से स्नान करने की परंपरा का पालन करते हैं। इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए।
घर में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा करें। मूर्ति सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी की हो सकती है।
भगवान गणेश का शुद्ध जल और पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र अर्पित कर श्रृंगार करें। पूजा में चंदन, चावल, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। भगवान गणेश को लड्डुओं का भोग लगाएं और नारियल चढ़ाएं।
संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ें या सुनें और अंत में गणेश जी की आरती करें। शाम को फिर से पूजा करें और चंद्रमा के दर्शन के बाद उन्हें अर्घ्य देकर व्रत पूरा करें।

