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चंडीगढ़ एडवोकेट ने उठाया श्रद्धालुओं की सुरक्षा का मुद्दा:उत्तराखंड HC में पिटीशन भेजी, कहा- हेमकुंड साहिब यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो




पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हरमनजोत सिंह गिल ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक प्रतिनिधित्व सह याचिका (रिप्रेजेंटेशन कम लेटर पिटीशन) भेजी है। इसमें कांवड़ यात्रा के दौरान हरियाणा से उत्तराखंड जाने वाले श्रद्धालुओं पर हमले, सार्वजनिक अपमान और वाहनों में तोड़फोड़ की घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लेने की मांग की है। गिल ने यह प्रतिनिधित्व उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से भेजा है। अदालत से अनुरोध किया गया है कि हालिया घटनाक्रम को देखते हुए राज्य सरकार, पुलिस और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। एक अगस्त की घटना का भी जिक्र याचिका में विशेष रूप से 1 अगस्त 2026 को कांवड़ यात्रा के दौरान सामने आई घटना का उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि हरियाणा से उत्तराखंड जा रहे श्रद्धालुओं के साथ मारपीट, सार्वजनिक अपमान और वाहनों में तोड़फोड़ जैसी घटनाएं हुईं। अधिवक्ता का कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा नहीं हैं, बल्कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और सुरक्षित यात्रा के अधिकार से भी संबंधित हैं। सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी प्रतिनिधित्व में मामला केवल कांवड़ यात्रा तक सीमित नहीं रखा गया है। अदालत से अनुरोध किया गया है कि चारधाम यात्रा, श्री हेमकुंड साहिब यात्रा और उत्तराखंड आने वाले अन्य धार्मिक यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। याचिका में कहा गया है कि हर साल लाखों श्रद्धालु देश के विभिन्न राज्यों से उत्तराखंड पहुंचते हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। संवेदनशील मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा एडवोकेट गिल ने अदालत से मांग की है कि यात्रा मार्गों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए, संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाए और हिंसा या तोड़फोड़ की किसी भी घटना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सीसीटीवी निगरानी, नियमित गश्त और शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था लागू करने का भी अनुरोध किया गया है। सुओ मोटू कार्रवाई का अनुरोध याचिका में कहा गया है कि यदि अदालत इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई करती है तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिल सकती है। इससे राज्य प्रशासन को स्पष्ट दिशा-निर्देश भी मिलेंगे कि धार्मिक यात्राओं के दौरान किसी भी श्रद्धालु के साथ हिंसा, अभद्रता या भेदभाव की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गिल ने अदालत से मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र सुनवाई करने और श्रद्धालुओं के जीवन, स्वतंत्रता तथा सुरक्षित यात्रा के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक आदेश जारी करने की अपील की है।



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