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चंडीगढ़ और हरियाणा और चंडीगढ़ में चर्चित 661 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोपी विक्रम सिंह वधवा मंगलवार दोपहर को चंडीगढ़ के एक होटल में ऐश करता मिला। उसे पुलिस की टीम जेल से अस्पताल ले जाने के लिए लाई थी, लेकिन उनकी गाड़ी अस्पताल के बजाय लग्जरी होटल की ओर मुड़ गई। होटल में घंटों बिताने के बाद चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने छापा मारा और होटल से SI व ASI के साथ कुल 5 लोगों को गिरफ्तार किया। घटना के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब कर ली है। साथ ही यह भी जांच शुरू कर दी गई है कि आरोपी को अस्पताल की बजाय होटल ले जाने की योजना किसने बनाई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही? पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिना मिलीभगत के इस तरह की घटना संभव नहीं। इलाज के नाम पर जेल से निकाला जानकारी के अनुसार, विक्रम वधवा जेल में बंद है। जेल में उसने पेट में इन्फेक्शन की बात कही थी, जिसके बाद इलाज के लिए उसे अस्पताल ले जाने की अनुमति दी गई। निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुलिस सुरक्षा में उसे बुड़ैल जेल से बाहर निकाला गया, लेकिन सेक्टर-16 के अस्पताल पहुंचने के बजाय पुलिस टीम उसे सीधे उसके रिश्तेदार के होटल चंडीगढ़ सेक्टर-22 स्थित होटल सिटी हार्ट लेकर पहुंच गई। आरोप है कि वहां वह काफी देर तक रुका, अपनी पत्नी और बेटों करण व कुनाल से मिला, बढ़िया खाना खाया और आराम करता रहा। इसी दौरान किसी माध्यम से इसकी जानकारी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गई। सूचना मिलते ही उच्च अधिकारियों ने तत्काल होटल में छापा मारा। वहां विक्रम वधवा, उसके साथ आए पुलिसकर्मी और अन्य लोग मौजूद मिले। इसके बाद सभी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई। SI, ASI समेत 5 गिरफ्तार प्राथमिक जांच के बाद पुलिस ने SI जगमेर सिंह, ASI सुरेश कुमार, विक्रम वधवा के बेटे करण व कुनाल और विक्रम को गिरफ्तार कर लिया। इन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 199, 261, 262, 62 और 61(2) के तहत चंडीगढ़ के सेक्टर-17 थाने में मामला दर्ज हुआ है। अब सभी से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी को होटल ले जाने की योजना पहले से बनाई गई थी या यह अचानक लिया गया फैसला था। पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आरोपी को अस्पताल में इलाज के लिए ले जाने की अनुमति मिली थी, तो उसे होटल किसके आदेश पर क्यों ले जाया गया और क्यों ले जाया गया। पुलिस होटल के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, एंट्री रजिस्टर, मोबाइल फोन की लोकेशन और सभी के कॉल डिटेल भी खंगाल रही है। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि होटल में आरोपी किन-किन लोगों से मिला और वहां कितनी देर तक रुका। पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में DSP एसपीएस सोंधी ने बताया कि मामले में गिरफ्तार पुलिसकर्मियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। उनके ड्यूटी रिकॉर्ड, मूवमेंट और अधिकारियों से हुई बातचीत की भी जांच हो रही है। यदि जांच में यह सामने आता है कि उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया या जानबूझकर आरोपी को होटल पहुंचाया, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। विक्रम वधवा पर घोटाले के ये 3 आरोप मामला खुलने के बाद मोहाली से गिरफ्तार हुआ फरवरी 2026 में घोटाला सामने आने के बाद वाधवा फरार हो गया था और उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया था। आखिरकार मार्च 2026 में चंडीगढ़ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसे मोहाली (खरड़) के एक ठिकाने से गिरफ्तार किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए ED ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जांच शुरू की और 29 मई 2026 को विक्रम वाधवा को अपनी कस्टडी में ले लिया। चंडीगढ़ की एक अदालत ने एक मामले में समय पर चार्जशीट न दाखिल होने के आधार पर उसे तकनीकी जमानत दे दी थी, लेकिन वह रिहा नहीं हो सका क्योंकि वह अन्य संबंधित मामलों में अब भी न्यायिक हिरासत में है। ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… हरियाणा बैंकिंग फ्रॉड : गिफ्ट में कैश-गोल्ड और लग्जरी गाड़ियां:दोनों सुपरिडेंट से पूछताछ में खुलासा, बिजनेसमैन के देश छोड़ने की आशंका हरियाणा बैंकिंग फ्रॉड में पंचायत विभाग के सुपरिंटेंडेंट नरेश कुमार के बाद मनीष जिदंल की गिरफ्तारी हुई है। मनीष जिंदल मोहाली के सेक्टर-117 का रहने वाला है। जिसे कोर्ट में पेश कर पुलिस ने 10 दिन का रिमांड मांगा था, लेकिन पुलिस 5 दिन का रिमांड ही मंजूर करवा पाई। पढ़ें पूरी खबर…
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₹661 करोड़ के घोटाले के आरोपी की होटल में मौज:इलाज के बहाने लाए चंडीगढ़ पुलिस के SI-ASI, खाना खिलाया, रिश्तेदारों से मिलाया; 5 अरेस्ट
