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प्लॉट घोटाला मामले में पति-प​त्नी 5 दिन रिमांड पर:बेनामी सम्पत्ति की जांच में जुटी SOG, आरोपी पत्नी है पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी




उदयपुर नगर निगम के 272 प्लॉट के बहुचर्चित घोटाले मामले में गिरफ्तार हुए एक महिला और उसके पति को बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें 5 दिन की रिमांड पर भेजा है। रिमांड के दौरान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) टीम प्लॉट प्रकरण में आरोपियों की भूमिका को लेकर पूछताछ करेगी। साथ ही बेनामी सम्पत्ति को लेकर जांच की जाएगी।
बता दें SOG ने एक दिन पहले पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया और उसके पति निरंजन मोगरा को जोधपुर स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के दौरान इनके आवास से करीब 2 किलो सोने के जेवर और 11 लाख रुपए नकद बरामद किए थे। जिसकी जांच की जा रही है। बता दें, एसओजी इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। ये है पूरा मामला जानकारी के अनुसार- 272 प्लॉटों के घोटाले में साल 2022 में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसमें बताया गया था कि आरोपियों ने नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से हिरण मगरी सेक्टर-11 में निगम के 546 नंबर प्लॉट के फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। फर्जी व्यक्ति किशन पटेल के नाम से निगम में लीजडीड और नामांतरण पत्र जारी करवा लिए। फिर सलूंबर निवासी ​अनिल कचौरिया को 50.01 लाख में बेच दिया। मामले में एसओजी ने जांच करते हुए आरोपी राजेंद्र धाकड़ को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में सामने आया कि इसने एकलव्य बस्ती मल्लातलाई निवासी किशनलाल गमेती के बैंक खाते में 7 लाख रुपए जमा कराए थे। किशन ने यह रुपए निकालकर किशन मारवाड़ी और राकेश सोलंकी को दिए। दोनों ने पैसे विक्रम ताकड़िया तक पहुंचाए थे। बता दें कि यूडीए ने साल 2012 में नगर निगम को कुछ कॉलोनियां ट्रांसफर की थी। इनमें कई भूखंड खाली और अधिकांश कॉर्नर के थे। सार-संभाल नहीं करने से लोगों ने इन पर कब्जा कर लिया। कई भूखंडों के फर्जी दस्तावेज बनवाकर नामांतरण खुलवा लिए गए और कुछ दलालों को बेच दिए। राज्यपाल कटारिया और वर्तमान विधायक उठा चुके मुद्दा इस मुद्दे को सबसे पहले साल 2022 में कांग्रेस पार्षद अजय पोरवाल ने उठाया था। जांच के बाद 48 पट्टों को निगम ने निरस्त कर दिया। इस बीच पंजाब राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया और वर्तमान उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन ने भी इस मुद्दे को कई बार उठाया था। इसे 500 करोड़ को घोटाया बताया था। अप्रैल 2022 से एसओजी मामले की जांच कर रही है। सबसे पहले एसओजी ने गुजरात के पंचमहल के पूर्व वार्ड पंच राकेश सोलंकी, उदयपुर निवासी दीपक सिंह और किशनलाल को गिरफ्तार किया था।



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