भास्कर संवाददाता| सीहोर बिना वैध वीजा और पासपोर्ट के वर्षों से भारत में रह रहे एक बांग्लादेशी नागरिक को सीहोर की अदालत ने सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी पर 10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों को पर्याप्त मानते हुए आरोपी को विदेशी अधिनियम की धारा के तहत दोषी करार दिया है। मामले में शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक रेखा चौरसिया ने की। न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजी एवं मौखिक साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी को दोषी ठहराया। अभियोजन के अनुसार आरोपी मोहम्मद इरशाद पिता मोहम्मद सिराज 44 वर्ष इंदिरा नगर के टप्पर में रह रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि वह मूल रूप से बांग्लादेश का नागरिक है और उसके पास भारत में प्रवेश या निवास का कोई वैध वीजा अथवा पासपोर्ट नहीं था। वह पिछले 26 साल से भारत में रह रहा है। बांग्लादेशी दस्तावेजों से खुला था राज : पुलिस जांच के दौरान आरोपी ने जन्म प्रमाण-पत्र और माता-पिता के पहचान संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए जो बांग्ला भाषा में थे। पुलिस ने भाषा विशेषज्ञ से उनका अनुवाद कराया, मुखबिर ने दी थी सूचना कोतवाली थाना पुलिस को 27 अप्रैल 2025 को सूचना मिली थी कि इंदिरा नगर टप्पर में एक बांग्लादेशी नागरिक रह रहा है। उप निरीक्षक विक्रम आदर्श पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और पूछताछ की। पूछताछ में इरशाद ने बताया कि वह करीब 15 वर्ष की उम्र में बांग्लादेश से राजस्थान के अजमेर आया था। वहां लगभग 15 साल काम करने के बाद सीहोर आ गया। उसने पहले करीब पांच साल लुनिया मोहल्ला और पिछले छह वर्षों से इंदिरा नगर टप्पर में रहना स्वीकार किया।
Source link
26 साल से भारत में रह रहे बांग्लादेशी को 7 साल की जेल
