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ताऊ के अंतिम संस्कार में आया युवक गंगा में डूबा:कानपुर के भैरव घाट पर हुआ दर्दनाक हादसा, परिजन रो-रो कर बेहाल; 2 स्टीमर-6 गोताखोर तलाश में जुटे




कानपुर के भैरव घाट में अपने ताऊ के अंतिम संस्कार में शामिल होने आए बजरिया थाना क्षेत्र के प्रेम नगर निवासी 22 साल के मयंक चौरसिया डूब गए। अंतिम संस्कार के बाद परिवार के लोग गंगा में हाथ-पैर धो रहे थे, इस दौरान मयंक गंगा में नहाने के लिए उतरा और तेज बहाव की चपेट में आने से बह गया और देखते ही देखते गंगा में समा गया। परिजनों की सूचना पर कोहना थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद पुलिस ने जल पुलिस के 2 स्टीमर और 6 गोताखोरों की टीम को मयंक की तलाश में लगाया है। गंगा में पानी चेतावनी बिंदू के करीब और तेज बहाव के चलते कॉम्बिंग करने में टीम को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मयंक के डूबने की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। माता-पिता पिता घाट पर रोते-रोते बदहवास हो गए। हाथ-पैर धोने गए थे, जिद करके पानी में उतरा था मयंक प्रेम नगर प्रशांत नर्सिंग होम के पास रहने वाले संजू कुमार चौरसिया की पान की दुकान है। घर में पत्नी सविता चौरसिया, बेटी रिमझिम चौरसिया और बेटा मयंक है। संजू ने बताया कि उनके साथ में ही रहने वाले बड़े भाई सुरेश कुमार का शनिवार रात को बीमारी के चलते निधन हो गया था। रविवार को परिवार के लोग भैरव घाट पर अंतिम संस्कार करने पहुंचे थे। अंतिम संस्कार के बाद परिवार के लोग गंगा में हाथ-पैर धो रहे थे तो कुछ लोग गंगा नहाने लगे। इस मयंक भी गंगा में नहाने की जिद करके पानी में उतर गया और गहराई में जाने के चलते तेज बहाव के चपेट में आने से डूब गया। मयंक की चीख-पुकार सुनकर वहां मौजूद परिवार के लोग बचाने को गंगा में उतरे तो लेकिन तेज बहाव के बीच मयंक पानी में देखते ही देखते समा गया और परिवार के लोग चाह कर भी कुछ नहीं कर सके। सूचना पर कोहना थाना प्रभारी मनीष कुमार सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। इधर बड़े भाई के निधन के बाद बेटे के गंगा में डूबने से संजू और उनका परिवार रो-रो कर बेहाल हो गया। हादसे की जानकारी मिलते ही संजू की पत्नी समेत परिवार की कई महिलाएं भी भैरव घाट पहुंची और चीख-पुकार मच गई। परिवार के लोगों ने किसी तरह संजू और मयंक की मां सविता व बहन रिमझिम को किसी तरह संभाला। मां और पिता बार-बार हाथ जोड़कर पुलिस वालों से कहते रहे कि मेरे बेटे को किसी तरह बचा लीजिए। इस दौरान घाट पर मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। रोकने के बाद भी गंगा में उतरा मयंक डूबा मयंक के पिता संजू कुमार चौरसिया और चाचा सुरेश कुमार चौरसिया ने बताया कि,परिवार के लोग अंतिम संस्कार के बाद घाट पर हाथ-पैर धो रहे थे। मयंक ने नहाने की जिद की, जिस पर परिजनों ने उसे किनारे बैठकर ही नहाने को कहा। लेकिन जैसे ही वह उतरा, उसका पैर फिसल गया। आसपास मौजूद लड़कों ने उसे बचाने की कोशिश की, ऊपर से टायर और रस्सियां भी फेंकी गईं, लेकिन मयंक उन्हें पकड़ नहीं सका। देखते ही देखते वह गंगा की तेज धार में बहता चला गया और ओझल हो गया। एक घंटे बाद पहुंची टीम, परिजन बोले घाट पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं गंगा में डूबने वाले मयंक के पिता संजू और परिवार के लोग पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को कॉल करते रहे। पुलिस तो फौरन मौके पर पहुंच गई, लेकिन गोताखोर, स्टीमर और जल पुलिस को आने में करीब एक घंटा लग गया। इसके बाद 6 गोताखोरों की टीम और स्टीमर ने कॉम्बिंग शुरू की। हादसे के बाद गुस्साए परिजनों का आरोप है,कि घटना के करीब एक घंटे बाद तक मौके पर कोई गोताखोर या रेस्क्यू टीम नहीं पहुंची थी। परिजनों ने बताया कि, जब 112 नंबर पर सूचना दी गई, तब पुलिस पहुंची। परिजनों का कहना है,कि जलस्तर बढ़ा होने के बावजूद प्रशासन ने घाटों पर कोई बैरिकेडिंग या सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए थे, जिससे यह अनहोनी हो गई। बेटे को ढूंढने परमट घाट पहुंची बिलखती मां मयंक ने इसी साल बी.ए. में एडमिशन लिया था। उसके पिता पिछले 20 सालों से प्रेम नगर में पान की दुकान चलाते हैं। हादसे की खबर मिलते ही मां सविता चौरसिया और बहन रिमझिम का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। बिलखती मां बेटे की तलाश में खुद परमट घाट तक पहुंच गई। परिवार के हर सदस्य की आंखें नम हैं।



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