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हरियाणा में बिजली नीतियों पर सरपंच प्रतिनिधि का विरोध:बोले- निजीकरण से बढ़ेंगी दरें, 11-13 अगस्त की हड़ताल को दिया समर्थन




हरियाणा के बिजली क्षेत्र में निजीकरण, एग्री-डिस्कॉम, समानांतर लाइसेंसिंग और प्री-पेड स्मार्ट मीटर लागू करने की नीतियों के विरोध में सरपंच प्रतिनिधि रणदीप सिंह मट्टदादू ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इन नीतियों को किसान, कर्मचारी और आम उपभोक्ता विरोधी बताते हुए मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजा है, जिसमें इन फैसलों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। मट्टदादू ने 11 से 13 अगस्त तक होने वाली प्रदेशव्यापी हड़ताल को भी अपना समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने या समानांतर लाइसेंसिंग लागू करने से निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना होगा। प्रेस को जारी बयान में रणदीप सिंह मट्टदादू ने कहा कि बिजली आम जनता की मूलभूत आवश्यकता है। उन्होंने आशंका जताई कि निजीकरण से बिजली की दरों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे गरीब, मजदूर और मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। किसानों पर बढ़ सकता है आर्थिक बोझ
रणदीप सिंह मट्टदादू ने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए अलग एग्री-डिस्कॉम व्यवस्था लागू किए जाने से भविष्य में किसानों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी पर असर पड़ने की आशंका है। इससे खेती की लागत बढ़ सकती है और किसानों की परेशानी बढ़ेगी। स्मार्ट मीटर नीति पर भी उठाए सवाल
उन्होंने प्री-पेड स्मार्ट मीटरों को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बैलेंस खत्म होते ही बिजली आपूर्ति स्वत: बंद होने तथा तकनीकी समस्याओं के कारण उपभोक्ताओं में असंतोष पैदा हो रहा है। उन्होंने सरकार से स्मार्ट मीटर नीति की समीक्षा करने और उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की। 11 से 13 अगस्त की हड़ताल को समर्थन
रणदीप सिंह मट्टदादू ने बिजली कर्मचारी यूनियनों और किसान संगठनों की ओर से 11 से 13 अगस्त तक प्रस्तावित प्रदेशव्यापी तीन दिवसीय हड़ताल और आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते इन नीतियों को वापस नहीं लिया तो आंदोलन आगे और व्यापक हो सकता है। उन्होंने कहा, “सरकार का काम जनता को राहत देना है, न कि निजी घरानों को फायदा पहुंचाना। बिजली विभाग का निजीकरण और स्मार्ट मीटर जैसी योजनाएं जनता और किसानों के हितों से जुड़ा गंभीर विषय हैं। मुख्यमंत्री से अपील है कि प्रदेश में शांति और निर्बाध बिजली व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन फैसलों पर पुनर्विचार किया जाए और जनहित में आवश्यक कदम उठाए जाएं।”



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