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डिलीट किए शॉपिंग ऐप से खाली हो रहे खाते:बिना OTP स्कैम का यह कौन-सा तरीका है? 4 उपायों से बचा जा सकता है…




आपने 6 महीने पहले कोई फूड डिलीवरी या ऑनलाइन शॉपिंग ऐप अपने फोन से अनइंस्टॉल कर दिया था। आप निश्चिंत हैं कि अब वह ऐप आपके फोन में नहीं है। अचानक एक दिन आपके मोबाइल पर मैसेज आता है कि आपके कार्ड से 50 हजार रुपए कट गए हैं। बैंक को फोन करते हैं तो पता चलता है कि पेमेंट उसी ऐप से हुआ है, जिसे आप महीनों पहले डिलीट कर चुके हैं। मध्य प्रदेश में एक साल में ऑनलाइन ठगी के ऐसे करीब 30 मामले सामने आए हैं। क्या ऐप डिलीट कर देना काफी नहीं है, हैकर्स को आपकी डिटेल कैसे मिलती है, और बिना OTP के पैसे कैसे निकल जाते हैं? जानेंगे आज के मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में। सवाल 1: मोबाइल से ऐप डिलीट कर दिया, फिर हैकर्स अकाउंट तक कैसे पहुंचे? जवाब- यही आम यूजर्स की सबसे बड़ी गलत फहमी है, जिसका फायदा साइबर ठग उठा रहे हैं। इसे एक उदाहरण से समझिए- आपने बैंक में एक लॉकर लिया, उसमें अपना कीमती सामान रखा। फिर लॉकर की चाबी फेंक दी। क्या चाबी फेंकने से बैंक के अंदर रखा लॉकर और आपका सामान गायब हो जाएगा? बिलकुल नहीं। ऐप्स के साथ भी ऐसा ही होता है। जब आप फोन से कोई ऐप अनइंस्टॉल करते हैं तो सिर्फ फोन की स्क्रीन से उस ऐप का सॉफ्टवेयर हटता है। कंपनी के सर्वर पर आपकी प्रोफाइल, नाम, मोबाइल नंबर, पता, खरीदारी की हिस्ट्री और सबसे अहम सेव किए गए कार्ड की डिटेल्स वैसे ही सुरक्षित रहती है। आप उस ऐप का इस्तेमाल नहीं कर रहे, इसलिए ट्रांजैक्शन अलर्ट या ई-मेल नोटिफिकेशन भी चेक नहीं करते। इसी को साइबर सुरक्षा की भाषा में सोया हुआ अकाउंट (जॉम्बी या डॉरमैंट अकाउंट) कहते हैं। हैकर्स आपके फोन में नहीं घुसते। वे ब्राउजर या किसी दूसरे डिवाइस से सीधे कंपनी के सर्वर पर मौजूद आपके इसी पुराने अकाउंट में लॉग-इन कर लेते हैं। सवाल 2: हैकर्स को आपका पासवर्ड और कार्ड डिटेल आखिर मिलती कैसे है? जवाब- हैकर्स को आपसे पासवर्ड पूछने या ओटीपी मांगने की जरूरत नहीं पड़ती। डार्क वेब (इंटरनेट का वह हिस्सा जहां गैरकानूनी काम होते हैं) पर लोगों का निजी डेटा बिकता है। वहां से मिली जानकारी के आधार पर हैकर्स मुख्य रूप से 3 तरीकों से आपकी डिटेल तक पहुंचते हैं। राज्य साइबर पुलिस में एडिशनल एसपी शैलेंद्र चौहान के मुताबिक, मध्य प्रदेश में सामने आए ज्यादातर मामलों में वजह यही रही- लोगों का डेटा किसी ऐसे पुराने ऐप में सेव पड़ा रहा, जिसे वे इस्तेमाल करना बहुत पहले छोड़ चुके थे। पासवर्ड मिलने के बाद कार्ड की डिटेल भी अपने आप हाथ लग जाती है। भले ही RBI ने अक्टूबर 2022 से टोकनाइजेशन का नियम लागू कर रखा हो (यानी शॉपिंग कंपनियां अब आपका असली कार्ड नंबर सेव नहीं कर सकतीं, उसकी जगह एक कोड ‘टोकन’ सेव होता है)। दिक्कत यह है कि यह टोकन आपके उसी अकाउंट से जुड़ा होता है। हैकर उस अकाउंट में लॉग-इन करते ही सेव किए गए टोकनाइज्ड कार्ड पर क्लिक करके पेमेंट कर देता है। उसे असली कार्ड नंबर जानने की जरूरत ही नहीं पड़ती। सवाल 3: बिना OTP पैसे नहीं कट सकते, फिर हैकर्स खाते से पैसे कैसे निकाल रहे हैं? जवाब- यह सच है कि रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत भारत में किसी भी ट्रांजैक्शन के लिए 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (जैसे OTP या UPI पिन) जरूरी है, लेकिन ठग इसे 3 बड़े लूपहोल्स से बायपास कर रहे हैं… 1. इंटरनेशनल पेमेंट गेटवे: हैकर्स आपके सेव किए कार्ड का इस्तेमाल विदेशी वेबसाइट्स पर करते हैं, जहां कई देशों में OTP की अनिवार्यता नहीं होती- सिर्फ कार्ड नंबर, एक्सपाइरी डेट और CVV डालते ही पेमेंट कट जाता है। 2. टैप एंड पे की छूट: RBI ने 5,000 रुपए तक के कॉन्टैक्टलेस (NFC) पेमेंट्स के लिए OTP की शर्त हटा रखी है। हैकर्स इसी लिमिट के अंदर 4,999 रुपए के कई छोटे ट्रांजैक्शन एक साथ कर देते हैं- जब तक पहला अलर्ट मिलता है, तब तक कई बार पैसा कट चुका होता है। 3. रिवॉर्ड पॉइंट्स की चोरी: कई बार हैकर्स सीधे बैंक से पैसे नहीं निकालते, बल्कि पुराने अकाउंट में पड़े रिवॉर्ड पॉइंट्स या वॉलेट बैलेंस से अपने पते पर भारी शॉपिंग कर लेते हैं। अकाउंट फोन में न होने से भनक तक नहीं लगती। सवाल 4: पैसा कट जाने के बाद क्या बैंक रिफंड देगा? जवाब- रिफंड की शर्त सख्त है। RBI की जीरो लायबिलिटी पॉलिसी के मुताबिक, अगर गलत ट्रांजैक्शन में आपकी कोई गलती नहीं है (यानी आपने खुद OTP या पिन किसी को नहीं बताया) तो नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। शर्त यह है कि पैसा कटने के 3 दिन के भीतर बैंक को सूचना देनी होगी और साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराना होगी। 3 दिन बाद शिकायत करने पर नुकसान की जिम्मेदारी बैंक और आपके बीच तय नियमों के आधार पर बंटेगी, लेकिन समय पर शिकायत कर देना भी जांच की गारंटी नहीं है। जबलपुर की 70 वर्षीय चैताली मित्रा के साथ 6.25 लाख रुपए की साइबर ठगी हुई थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने साफ कहा- साइबर अपराधी चंद मिनटों में लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं, जबकि पुलिस की जांच ‘घोंघे की रफ्तार’ से चल रही है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, बैंकों और जांच एजेंसियों को साइबर ठगी से निपटने के लिए एक साझा, केंद्रीकृत सिस्टम बनाने के निर्देश दिए हैं। पश्चिम बंगाल, झारखंड व असम के डीजीपी को खुद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होकर जवाब देने को कहा है। सवाल 5: तो अभी क्या करना चाहिए? जवाब- राज्य साइबर पुलिस के मुताबिक इन 4 स्टेप्स को फॉलो करें… 1. दोबारा लॉग-इन करें: जिन पुराने ऐप्स (फूड, ग्रॉसरी, फैशन, गेमिंग) को आप इस्तेमाल करना छोड़ चुके हैं, उनमें वेब ब्राउजर के जरिए दोबारा लॉग-इन करें। 2. सेव्ड कार्ड हटाएं: प्रोफाइल सेटिंग में Payment Methods, Billing या Saved Cards खोजें और हर कार्ड के आगे Remove या Delete दबाएं। लिंक्ड UPI या वॉलेट भी हटाएं। 3. अकाउंट हमेशा के लिए डिलीट करें: अगर वह अकाउंट आगे इस्तेमाल नहीं करना तो सिर्फ लॉग-आउट न करें- सेटिंग या प्राइवेसी सेक्शन में जाकर Delete Account या Close Account चुनें, ताकि कंपनी के सर्वर से डेटा पूरी तरह मिट जाए। 4. पासवर्ड बदलें, 2FA लगाएं: अगर अकाउंट रखना है तो हर प्लेटफॉर्म का पासवर्ड अलग रखें और 2-स्टेप वेरिफिकेशन हमेशा चालू रखें, ताकि पासवर्ड जान लेने पर भी आपके फोन पर आए अप्रूवल कोड के बिना कोई लॉग-इन न कर सके। सिस्टम अभी उतना तेज नहीं है कि आपकी जगह सुरक्षा की जिम्मेदारी उठा ले, इसलिए यह चेक आज ही कर लेना बेहतर है। —————————————————————- मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर की ये कड़ी भी पढ़ें… भोपाल के घरों में चल रही दुकानों पर क्यों लग रहे ताले, क्या अब बाकी शहरों की बारी है? सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से पूछा है- ‘क्या राज्य सरकार कोर्ट के आदेशों के साथ खेल रही है?’ वजह है भोपाल के रिहाइशी इलाकों में चल रहे कारोबार पर सीलिंग, यानी ताला लगाने की कार्रवाई को रोकना। क्या आपके घर के आसपास भी किसी मकान में दुकान, क्लिनिक, कैफे या ब्यूटीपार्लर चल रहा है। भोपाल में जो हो रहा है, वह कल आपके शहर में भी हो सकता है…पूरा एक्सप्लेनर पढ़ें



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