हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के मुख्यालय केलांग में तीन दिवसीय राज्यस्तरीय जनजातीय उत्सव-2026 का आज बेहद हर्षोल्लास और भव्यता के साथ शुभारंभ हो गया। उत्सव की शुरुआत एक आकर्षक सांस्कृतिक व धार्मिक शोभायात्रा और पारंपरिक लोक नृत्य ‘नाटी’
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उत्सव के पहले दिन आयोजित की गई भव्य शोभायात्रा में लाहौल-स्पीति की समृद्ध संस्कृति, अनूठी परंपराओं और गहरी धार्मिक आस्थाओं का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला। घाटी के विभिन्न बौद्ध मठों से आए लामाओं और बौद्ध भिक्षुओं ने अपनी पारंपरिक धार्मिक वेशभूषा में हिस्सा लिया। मुख्य कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद लामाओं ने अपनी प्राचीन बौद्ध धार्मिक व सांस्कृतिक पद्धतियों के अनुसार विधिवत मंत्रोच्चारण और पूजा-अर्चना कर घाटी की सुख-समृद्धि की कामना की।

लोक संगीत की धुन पर थिरके कदम; प्रशासनिक अधिकारियों ने भी डाली नाटी
उद्घाटन समारोह का मुख्य आकर्षण यहाँ आयोजित की गई पारंपरिक नाटी रही। जनजातीय लोक संगीत की पारंपरिक धुनों और वाद्य यंत्रों की थाप पर पूरा केलांग झूम उठा। इस सांस्कृतिक उत्सव में तब और अनूठा रंग देखने को मिला जब स्थानीय विधायक अनुराधा राणा, डीसी किरण भड़ाना और एसडीएम कुनिका ऐकर्स ने खुद को रोक नहीं पाया और स्थानीय कलाकारों व आम लोगों के साथ कदम से कदम मिलाकर पारंपरिक नाटी डाली। यह दृश्य घाटी की समृद्ध लोक संस्कृति और आपसी भाईचारे की मिसाल बन गया।
नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने का प्रयास
लाहौल-स्पीति की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, कला, धार्मिक मान्यताओं और विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के लिए यह उत्सव एक बड़ा माध्यम है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य आधुनिकता के दौर में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और समृद्ध जनजातीय परंपराओं से जोड़े रखना है।
केलांग में आगामी दो दिनों तक इस राज्यस्तरीय जनजातीय उत्सव-2026 के तहत कई तरह के रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों, स्थानीय खेल प्रतियोगिताओं और विभिन्न प्रदर्शनियों व गतिविधियों का आयोजन जारी रहेगा, जिसमें देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी जनजातीय संस्कृति से रूबरू हो सकेंगे।
