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रायपुर में शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विभाजन की त्रासदी को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विभाजन का दंश झेलने वाले परिवार आज भी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसके लिए उन्होंने कांग्रेस की तुष्टीकरण की नीति को जिम्मेदार बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज को अपना इतिहास नहीं भूलना चाहिए। क्योंकि जो समाज अपना इतिहास भूल जाता है, वह इतिहास में ही रह जाता है। उन्होंने कहा कि इन अनुभवों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है, ताकि वह इतिहास की सच्चाई को समझ सके।आने वाली पीढ़ी और पूरे देश को इस दर्द का स्मरण होना चाहिए। कार्यक्रम का आयोजन महंत घासीदास संग्रहालय स्थित मुक्ताकाश में किया गया। विभाजन पीड़ित परिवारों ने सुनाई अपनी कहानी कार्यक्रम में विभाजन का दंश झेलने वाले अलग-अलग समाजों के प्रतिनिधियों और उनके परिवार के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि विभाजन के दौरान उन्हें किस तरह अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा और किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परिवारों ने मुश्किल परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी। उनके संघर्ष और धैर्य की कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है विभाजन में महिलाओं पर अत्याचार, लाखों लोग हुए विस्थापित सीएम साय ने कहा कि विभाजन के दौरान समाज ने बहुत बड़ी त्रासदी झेली। महिलाओं के साथ अत्याचार हुए, बड़ी संख्या में लोगों की हत्या हुई और लाखों परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। कई लोग अपने घरों से निकल भी नहीं पाए और उनकी हत्या कर दी गई। अमृता प्रीतम की कविता का भी किया जिक्र कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने विभाजन की त्रासदी का जिक्र करते हुए अमृता प्रीतम की कविता अज्ज आखां वारिस शाह नूका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अगर विभाजन की विभीषिका को समझने के लिए उन्हें एक कविता चुननी हो तो वह अमृता प्रीतम की कविता चुनेंगे। उन्होंने बताया कि विभाजन के दौरान हिंदू और मुस्लिम समाज के बीच इतनी दूरी बढ़ गई थी कि रेलवे स्टेशनों पर भी अलग-अलग पानी के नल लगाए जाते थे। हिंदू जिस नल से पानी पीते थे, वहां से मुस्लिम पानी नहीं पीते थे और मुस्लिमों के लिए अलग नल होते थे। 17 अगस्त को हुई थी लाहौर के पाकिस्तान में जाने की घोषणा डॉ. द्विवेदी ने बताया कि भारत-पाकिस्तान की सीमा तय करने की प्रक्रिया बेहद कम समय में पूरी की गई। 8 जुलाई 1947 को सीमा निर्धारण का काम शुरू हुआ और कुछ ही सप्ताह में रिपोर्ट तैयार कर तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को सौंप दी गई। उन्होंने बताया कि 14 अगस्त को पाकिस्तान और 15 अगस्त को भारत ने स्वतंत्रता दिवस मनाया, लेकिन लाहौर किस देश का हिस्सा होगा, इसकी आधिकारिक घोषणा 17 अगस्त 1947 को की गई। लाहौर पाकिस्तान के हिस्से में गया। उन्होंने कहा कि विभाजन सिर्फ जमीन का बंटवारा नहीं था, बल्कि इसका असर समाज और लोगों के रिश्तों पर भी पड़ा। उस दौर की घटनाओं और कहानियों को याद रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ी इतिहास से सीख सके। सीएम साय ने निकाला मौन जुलूस विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री साय मौन जुलूस में भी शामिल हुए। यह जुलूस संचालनालय पुरातत्व से अंबेडकर चौक तक निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, समाजों के प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और विद्यार्थी शामिल हुए। सभी ने विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही उन लाखों परिवारों के प्रति संवेदना जताई, जिन्हें विभाजन के कारण अपना घर और जमीन छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। पीएम मोदी के फैसले से हर साल 14 अगस्त को स्मृति दिवस मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन का दर्द झेलने वाले परिवारों के संघर्ष को सम्मान देने के लिए 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि यह दिन सिर्फ पुरानी पीड़ा को याद करने का अवसर नहीं है। इसका उद्देश्य विभाजन से मिली सीख को समझना और देश की एकता, अखंडता और आपसी भाईचारे के संकल्प को और मजबूत करना भी है।
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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस:CM साय बोले-कांग्रेस की तुष्टीकरण की नीति ने देश को बांटा, कहा- हमें अपना इतिहास नहीं भूलना चाहिए
