हिमाचल हाईकोर्ट ने बिजली बोर्ड में वर्क ऑर्डर के आधार पर लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित करने के मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि बिजली बोर्ड एक जैसी स्थिति वाले कर्मचारियों के साथ अलग-अलग व्यवहार नहीं कर सकता।
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चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस बिपिन चंदर नेगी की बैंच ने हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEB) की दो अपीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने कर्मचारियों को नियमित करने के ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा।

फिर मामला हाईकोर्ट में क्यों उलझा?
सुनवाई के दौरान एक अहम बात सामने आई। जब दोनों इलेक्ट्रिशियनों का मामला अदालत में चल रहा था, उसी दौरान बिजली बोर्ड ने जुलाई 2019 में वर्क ऑर्डर पर काम कर रहे छह अन्य क्लर्कों को नियमित कर दिया। इन क्लर्कों के लिए बोर्ड ने 17 साल की सेवा पूरी करने को आधार बनाया था। हाईकोर्ट ने जब इस बारे में बोर्ड से जवाब मांगा तो अंडर सेक्रेटरी ने हलफनामा देकर इसकी पुष्टि की।

कोर्ट का फैसला क्या रहा?
हाईकोर्ट ने बिजली बोर्ड की दोनों अपीलें खारिज कर दीं और ट्रिब्यूनल के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कपूर कुमार शर्मा और लायक राम शर्मा की सेवाओं को सभी परिणामी लाभों के साथ नियमित करने के निर्देश दिए गए थे।
सीधे शब्दों में कहें तो कोर्ट ने कहा कि अगर बोर्ड ने समान परिस्थितियों वाले दूसरे वर्क ऑर्डर कर्मचारियों को नियमित किया है, तो इन्हीं परिस्थितियों वाले कर्मचारियों को नियमित करने से केवल अपनी पुरानी नीति का हवाला देकर इनकार नहीं किया जा सकता।
