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बेंगलुरु/नागपुर23 दिन पहले
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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने केरल के त्रिशूर में संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के दौरान रजिस्ट्रेशन के सवाल पर कहा- देश में कई ऐसी संस्थाएं हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। संघ के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।
दरअसल, भागवत से पूछा गया था कि कर्नाटक सरकार ने RSS की गतिविधियों को गुप्त बताते हुए कहा है कि संगठन को रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए। इसके जवाब में उन्होंने कहा- संघ को किसी को जवाब देने की जरूरत नहीं है। यह कोई गुप्त संगठन नहीं है, बल्कि खुलकर काम करता है। सरकार जानती है कि संघ का अस्तित्व है।
उन्होंने कहा- लोग संघ के कार्यकर्ताओं को अपने मोहल्लों में देखते हैं, शाखाएं खुले मैदानों में लगती हैं और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिनको सरकार से फंड चाहिए, उन्हें रजिस्ट्रेशन की जरूरत होती है। वह होना ही चाहिए।

खड़गे बोले- अहंकार छोड़कर कानून का पालन करना चाहिए
भागवत के बयान पर कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा- संघ देश-विदेश से चंदा जुटाता है और उसके लोगों को सरकारी सुरक्षा भी मिलती है। लोकतंत्र में कोई भी संस्था कानून और जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकती। संघ को अहंकार छोड़कर कानून का पालन करना चाहिए।
प्रियांक खड़गे ने भागवत के बयान को उनके लेटर पर प्रतिक्रिया बताए जाने का भी खंडन किया। उन्होंने कहा- सोशल मीडिया पर भागवत का जो वीडियो मेरे लेटर के जवाब के तौर पर शेयर किया जा रहा है, वह भ्रामक है। खड़गे के मुताबिक, उन्होंने 15 जून को RSS के रजिस्ट्रेशन को लेकर पत्र भेजा था, जबकि भागवत की यह टिप्पणी 13 या 14 जून की है।
प्रियांक ने 15 जून को RSS के 100 वर्ष पूरे होने पर मोहन भागवत को लेटर लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति पर स्पष्टीकरण मांगा था। उन्होंने कहा था कि RSS अपना रजिस्ट्रेशन कराए और फंडिंग, आय, खर्च और संपत्तियों के स्रोतों की जानकारी सार्वजनिक करे।
खड़गे ने सवाल उठाया था कि जब नागरिकों, एनजीओ, ट्रस्ट, मजदूर संगठनों, मंदिरों और कंपनियों से कानून का पालन करने तथा रजिस्ट्रेशन कराने की अपेक्षा की जाती है, तो RSS को इससे छूट क्यों मिलनी चाहिए।

भागवत ने और क्या कहा, 5 पॉइंट…
- सरकार ने हम पर दो बार प्रतिबंध लगाया। एक प्रतिबंध कोर्ट के आदेश से लगा था। दूसरा सत्याग्रह के बाद हटाया गया। इसका मतलब है कि सरकार जानती थी कि RSS का अस्तित्व है।
- संगठन ने 1950 में सरकार को अपना लिखित संविधान सौंपा था और किसी भी अधिकारी ने कभी भी मान्यता मिलने से पहले रजिस्ट्रेशन कराने पर जोर नहीं दिया।
- 100 से ज्यादा साल बीत गए हैं। किसी ने हमसे यह नहीं कहा कि आपको रजिस्ट्रेशन कराना ही होगा। हिंदू धर्म रजिस्टर्ड नहीं है। कई चीजें रजिस्टर्ड नहीं हैं।
- हमारे कार्यकर्ता हर इलाके में रहते हैं। लोग उन्हें रोज देखते हैं। हमारी पहुंच बहुत व्यापक है। अगर हम कोई बात छिपाकर रखते, तो इनमें से कुछ भी मुमकिन नहीं होता
- वे किसी न किसी तरह से एक तरफ तो संघ के काम में बाधा डालना चाहते हैं और लोगों के मन में शक पैदा करना चाहते हैं। लेकिन अब ऐसा करना मुमकिन नहीं है क्योंकि लोग हमें जानते हैं।
RSS पर प्रियांक खड़गे के पिछले 2 बयान
20 अक्टूबर 2025: प्रियांक बोले- RSS कार्यकर्ताओं ने गाली-धमकी दी
कर्नाटक के चित्तपुर में होने वाली RSS और भीम आर्मी के मार्च को प्रशासन ने परमिशन देने से इनकार कर दिया है। चित्तपुर से विधायक और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि RSS के कुछ कार्यकर्ताओं ने मुझे गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। अगर कोई संगठन मार्च निकालना चाहता है तो पहले यह साबित करे कि वह कानूनी परमिशन ले। अब तक किसी स्थानीय व्यक्ति ने पुलिस से औपचारिक अनुमति नहीं मांगी है।
1 जुलाई 2025: प्रियांक बोले-केंद्र में आए तो RSS को बैन करेंगे
कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने कहा कि अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो RSS पर बैन लगाया जाएगा। प्रियांक ने RSS पर धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद के खिलाफ काम करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस ने पहले भी दो बार RSS पर बैन लगाया था और अब उन्हें उसे हटाने का अफसोस है। उनके मुताबिक, संघ हमेशा समानता और आर्थिक न्याय के विरोध में रहा है।’
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि यदि संघ उनसे पद छोड़ने को कहेगा, तो वे तुरंत ऐसा करेंगे। आमतौर पर 75 साल की उम्र के बाद किसी पद पर नहीं रहने की परंपरा की बात कही जाती है। RSS प्रमुख ने कहा कि सरसंघचालक बनने के लिए क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है। जो हिंदू संगठन के लिए काम करता है। पूरी खबर पढ़ें…

