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चंडीगढ़ के मनीमाजरा में प्रॉपर्टी के नाम दर्ज कराने और रिकॉर्ड में सुधार की एक फाइल करीब 55 महीने से नगर निगम में अटकी होने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता अशोक चड्ढा ने नगर निगम अधिकारियों पर बार-बार नए दस्तावेज और आपत्तियां लगाकर फाइल लंबित रखने का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि फाइल आगे बढ़ाने के लिए विकास शुल्क के नाम पर पैसे की मांग भी की गई।ये आरोप बुधवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब, सेक्टर-27 में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए गए हैं। अशोक ने मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय और चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिव से की है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पिता की मौत के बाद शुरू हुई प्रक्रिया शिकायत के अनुसार, अशोक के पिता स्वर्गीय सत देव चड्ढा की मौत के बाद परिवार ने कानूनी वारिसों के नाम राजस्व और नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए पहली अर्जी 27 अक्टूबर 2021 को दी गई। मामले में पुरानी रोपड़ रोड पर दुकान नंबर 220 से 231 और दर्शनी बाग, मनीमाजरा स्थित मकान नंबर 213/1 शामिल हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि नगर निगम की ओर से अलग-अलग समय पर पटवारी और तहसीलदार की रिपोर्ट, जमीन की निशानदेही, साइट प्लान, राजस्व रिकॉर्ड समेत कई दस्तावेज मांगे गए। परिवार ने जरूरत के अनुसार ये दस्तावेज जमा कराए। डीजेपीएस मशीन तक मंगवाई शिकायत के मुताबिक जुलाई 2023 में जमीन की निशानदेही के लिए डीजेपीएस मशीन की व्यवस्था करने को कहा गया। परिवार ने मशीन उपलब्ध कराई। इसके बाद तहसीलदार कार्यालय की ओर से अक्टूबर 2023 में निशानदेही रिपोर्ट, राजस्व रिकॉर्ड और डीजेपीएस रिपोर्ट नगर निगम को भेजे जाने की बात कही गई। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का आरोप है कि म्यूटेशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। अशोक कुमार का आरोप है कि 2024 में भी उनसे बार-बार अतिरिक्त दस्तावेज और साइट प्लान मांगे गए। जुलाई 2024 में एक बैठक के दौरान नया साइट प्लान मांगा गया, जिसे उन्होंने बाद में जमा कर दिया। उनका कहना है कि हर बार दस्तावेज जमा करने के बावजूद फाइल का निपटारा नहीं किया गया। 4.58 लाख का टैक्स नोटिस धमाया शिकायत में प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। अशोक कुमार का कहना है कि उन्होंने नगर निगम को कई बार लिखकर बताया कि संबंधित संपत्तियों पर कोई टैक्स बकाया नहीं है। उन्होंने आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया कि नगर निगम के पास 1977 से 1994 तक के हाउस टैक्स रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद 24 अक्टूबर 2025 को करीब 4.58 लाख रुपए प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने की मांग की गई। शिकायतकर्ता ने इस मांग को गलत बताते हुए लिखित आपत्ति दर्ज कराई। इस मामले की जांच के लिए एक समिति बनाई गई। उनका दावा है कि समिति को संबंधित संपत्ति पर टैक्स बकाया होने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। समिति ने 16 मार्च 2026 को अपनी रिपोर्ट जमा की। शिकायतकर्ता ने इसी रिपोर्ट के आधार पर 4.58 लाख रुपए की टैक्स मांग पर सवाल उठाए हैं। मामले में शिकायतकर्ता ने नगर निगम के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि अक्टूबर 2025 में अधिकारियों के खिलाफ शिकायत करने के बाद उन्हें कथित तौर पर कहा गया कि पैसे दिए बिना फाइल आगे नहीं बढ़ेगी। हालांकि, पैसे मांगने और अधिकारियों पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी शिकायत में उपलब्ध नहीं है। कई बार दफ्तरों के चक्कर लगाए अशोक कुमार का कहना है कि अक्टूबर 2021 से मई 2026 तक उन्होंने नगर निगम के कई चक्कर लगाए। इस दौरान कई बार जमीन की निशानदेही हुई, समितियां बनीं, नए दस्तावेज मांगे गए और अलग-अलग विभागों से रिपोर्ट मंगवाई गई। इसके बावजूद कानूनी वारिसों के नाम नगर निगम के संपत्ति रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किए गए। शिकायतकर्ता ने कहा कि वह वरिष्ठ नागरिक हैं और इतने लंबे समय से चल रही प्रक्रिया के कारण उन्हें मानसिक परेशानी के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है। PMO और मुख्य सचिव से जांच की मांग अशोक कुमार ने प्रधानमंत्री कार्यालय और चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिव को भेजी शिकायत में 27 अक्टूबर 2021 से मई 2026 तक फाइल लंबित रहने की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने बार-बार आपत्तियां लगाए जाने, दस्तावेज मांगने और अधिकारियों के कथित व्यवहार की जांच के साथ दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जब निशानदेही और अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए जा चुके थे तो म्यूटेशन की प्रक्रिया इतने लंबे समय तक क्यों लंबित रही।
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चडीगढ़ में प्रॉपर्टी म्यूटेशन की फाइल 55 महीने से अटकी:आरोप- बार-बार मांगे नए दस्तावेज, विकास शुल्क के नाम पर पैसे मांगे,4.58 लाख टैक्स लगाया
