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चंडीगढ़ में हत्या केस में दो आरोपियों को जमानत:गवाहों ने पहचानने से इनकार किया, घायल बोला- हमलावर अज्ञात थे; 70-70 हजार जमानती बांड पर छोड़ा




चंडीगढ़ में हत्या और जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने दो आरोपियों पीयूष चौधरी उर्फ प्रिंस और रोशन उर्फ भैया को नियमित जमानत दे दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रोहित वाट्स की अदालत ने दोनों को 70-70 हजार रुपए के जमानती बांड और इतनी ही राशि के एक-एक जमानती पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। अदालत में सुनवाई के दौरान मामले में नया मोड़ तब आया, जब शिकायतकर्ता और हमले में घायल युवक ने आरोपियों को पहचानने से इनकार कर दिया। दोनों ने अदालत में कहा कि उन पर हमला करने वाले कुछ अज्ञात लोग थे। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत में मौजूद दोनों आरोपी वे लोग नहीं हैं, जिन्होंने वारदात को अंजाम दिया था। 2025 में दर्ज हुआ था मामला मामला सेक्टर-31 थाने में दर्ज एफआईआर नंबर 127, दिनांक 8 जुलाई 2025 से जुड़ा है। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। आरोप था कि आरोपियों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर घातक हथियारों से लैस होकर गैरकानूनी जमावड़ा किया और साझा उद्देश्य के तहत शिकायतकर्ता के बेटे तुषार और उसके दोस्त रमन पर जानलेवा हमला किया। हमले में रमन गंभीर रूप से घायल हुआ था और बाद में उसकी मौत हो गई थी। तुषार को भी गंभीर चोटें आई थीं। पीयूष का नाम एफआईआर में नहीं था पीयूष चौधरी उर्फ प्रिंस की ओर से वकील अंशुल शाही और करण कुमार पवार ने अदालत में दलील दी कि पीयूष का नाम शुरुआती एफआईआर में नहीं था। उसे एक सह-आरोपी के कथित खुलासे के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। पीयूष को 9 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में था। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले के शिकायतकर्ता गुलाब और उसके घायल बेटे तुषार की गवाही हो चुकी है। दोनों ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया है। अदालत के आदेश के अनुसार, शिकायतकर्ता गुलाब का 3 जुलाई 2026 को पीडब्ल्यू-4 के रूप में बयान दर्ज किया गया। उसने अदालत में बताया कि कुछ अज्ञात लोगों ने उसके बेटे तुषार और उसके दोस्त रमन पर हमला किया था। बाद में रमन की चोटों के कारण मौत हो गई। गुलाब ने अदालत में मौजूद पीयूष और रोशन को पहचानने से इनकार कर दिया। उसने कहा कि मुकदमे का सामना कर रहे आरोपी वे लोग नहीं हैं, जिन्होंने वारदात की थी। अभियोजन पक्ष की जिरह के दौरान भी गुलाब ने पुलिस को आरोपियों के नाम बताए जाने संबंधी बयान देने से इनकार किया। घायल तुषार ने भी नहीं पहचाना घायल तुषार की भी अदालत में गवाही हुई। उसने बताया कि कुछ अज्ञात लोगों ने उस पर और उसके दोस्त रमन पर हमला किया था। तुषार ने भी अदालत में मौजूद पीयूष और रोशन की पहचान हमलावरों के रूप में नहीं की। उसने पुलिस को आरोपियों के नाम बताए जाने से भी इनकार किया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता और घायल दोनों ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया है। साथ ही, कथित घटना का कोई अन्य प्रत्यक्षदर्शी भी सामने नहीं आया है। रोशन को भी मिली जमानत पीयूष के साथ आरोपी रोशन उर्फ भैया की जमानत याचिका पर भी अदालत ने सुनवाई की। रोशन की ओर से भी अंशुल शाही और करण कुमार पवार ने पैरवी की। रोशन को 8 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वह भी तब से न्यायिक हिरासत में था। अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानत देते हुए कहा कि जब शिकायतकर्ता और घायल गवाह अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं कर रहे हैं और कोई अन्य प्रत्यक्षदर्शी भी नहीं है, तो आरोपियों को आगे हिरासत में रखने का कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा। जमानत के साथ ये शर्तें रहेंगी अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानत देते हुए कुछ शर्तें भी लगाई हैं। दोनों को सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित रहना होगा। उन्हें इसी तरह का कोई अपराध नहीं करना होगा। इसके अलावा वे मामले से जुड़े किसी व्यक्ति को धमकी, लालच या किसी तरह का दबाव देकर अदालत या पुलिस के सामने तथ्य बताने से नहीं रोक सकते। दोनों को साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने के भी निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत देते समय आदेश में की गई टिप्पणियों को मामले के अंतिम गुण-दोष पर अदालत की राय नहीं माना जाएगा। जमानत बांड स्वीकार होने के बाद दोनों आरोपियों के रिहाई आदेश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।



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