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महाकाल शयन आरती के बाद परचुरे भवन पर चला बुलडोजर:उज्जैन में 60 साल पुराना जर्जर भवन 60 मिनट में जमींदोज




उज्जैन में महाकाल मंदिर के सामने स्थित परचुरे भवन को बुधवार देर रात ध्वस्त कर दिया गया। लगभग 60 से 65 साल पुराने इस जर्जर भवन पर महाकाल की शयन आरती के बाद रात करीब 11 बजे नगर निगम का बुलडोजर चला। उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में यह कार्रवाई लगभग 60 मिनट में पूरी हुई। नगर निगम के अधीक्षण यंत्री प्रमोद मालवीय ने बताया कि यह भवन 60 से 65 साल पुराना था और आरसीसी संरचना का नहीं था। यह ओपन फाउंडेशन पर बना था और इसकी संरचनात्मक स्थिति बेहद खराब हो चुकी थी। भवन की स्थिति का आकलन करने के लिए भोपाल स्थित मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MANIT) की तकनीकी टीम से निरीक्षण कराया गया था। मैनिट की रिपोर्ट में बताया जोखिमपूर्ण MANIT की तकनीकी रिपोर्ट में भवन की भार वहन करने वाली चिनाई की दीवारों के बाहर की ओर झुकने, दीवारों में व्यापक दरारें, सहायक स्टील गर्डरों में क्षरण, पारंपरिक छत प्रणाली के कमजोर होने, कई स्थानों पर सीलन और सीढ़ियों में खराबी जैसी गंभीर कमियां सामने आई थीं। रिपोर्ट में भीड़भाड़ के दौरान भवन के उपयोग को जोखिमपूर्ण बताया गया था। अधीक्षण यंत्री प्रमोद मालवीय के अनुसार, भगवान महाकाल की सवारी के दौरान इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहते हैं। ऐसी स्थिति में यदि लोग जर्जर भवन की छत या ऊपरी मंजिल तक पहुंचते तो भवन पर अतिरिक्त भार पड़ सकता था, जिससे गंभीर हादसे की आशंका बनी रहती। इसी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भवन को हटाने की कार्रवाई की गई। लगभग 1200 से 1500 वर्गफीट क्षेत्र में बने इस जी प्लस वन भवन को देर रात कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हटाया गया। परचुरे भवन का यह मामला महाकाल मंदिर विस्तारीकरण के दूसरे चरण से भी जुड़ा हुआ है।



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