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जालंधर कैट से कांग्रेस विधायक परगना सिंह ने बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज (BFUHS) में करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े घोटाले का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि यूनिवर्सिटी में मशीनों की खरीद, निर्माण कार्य, भर्तियों और वी
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जालंधर स्थित कांग्रेस भवन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए परगट सिंह ने कई दस्तावेज भी मीडिया के सामने पेश किए। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान की मिलीभगत से आरएसएस पृष्ठभूमि वाले डॉ. राजीव सूद को यूनिवर्सिटी का नया कुलपति (VC) नियुक्त किया गया। पूर्व मंत्री ने बताया कि जब उन्होंने यह मुद्दा विधानसभा में उठाया था, तो दबाव में आकर यूनिवर्सिटी प्रशासन को 200 से अधिक कर्मचारियों को नोटिस जारी करने पड़े थे।
परगट सिंह ने निर्माण कार्यों और मशीनरी खरीद में भ्रष्टाचार के सिलसिलेवार सबूत पेश किए। उन्होंने आरोप लगाया कि वीसी ने एक निजी कंपनी को बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के 100 करोड़ रुपये का काम अलॉट कर दिया और केवल 25 से 30 फीसदी काम होने के बावजूद कंपनी को पूरे 100 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसके अलावा, 35 करोड़ रुपये की बाजार कीमत वाली स्कैन मशीन को 55 करोड़ रुपये में खरीदा गया, जो एक साल बीत जाने के बाद भी डिब्बों में बंद पड़ी है।
यूनिवर्सिटी में हुई अन्य आर्थिक अनियमितताओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पीजीआई द्वारा 19 करोड़ रुपये में खरीदी गई एमआरआई (MRI) मशीन बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ने 29 करोड़ रुपये में खरीदी। आईसीयू (ICU) के लिए 1.80 लाख रुपये प्रति बेड मिलने वाले 80 से 100 बेडों को 4.75 लाख रुपये प्रति बेड के हिसाब से अत्यधिक महंगी दरों पर खरीदा गया, जिनका आज तक इस्तेमाल भी नहीं हुआ है। इसके साथ ही बिना किसी टेंडर और मंजूरी के 90 लाख रुपये का एसटीपी (STP) लगाया गया और करीब 2 करोड़ रुपये की कैंसर की दवाइयां कचरे में फेंक दी गईं।
नेताओं और मंत्रियों के करीबियों को पहुंचाए गए फायदों का जिक्र करते हुए उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के करीबी की पत्नी डॉ. बलविंदर कौर पर आरोप लगाया कि वह यूनिवर्सिटी और पटियाला कॉलेज से एक साथ दो-दो जगह से सैलरी ले रही थीं। हाई कोर्ट द्वारा 60 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश देने के बावजूद यूनिवर्सिटी ने अब तक एक रुपये की वसूली नहीं की है। इसके अलावा, कैबिनेट मंत्री बलजीत कौर और कई जिला योजना बोर्ड अध्यक्षों के परिजनों को गलत तरीके से नौकरियां दी गईं।
इस दौरान यूनिवर्सिटी में 10 साल सेवा दे चुके कैंसर विशेषज्ञ डॉ. मनजीत सिंह ने भी सबूतों और वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ घोटालों का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जब विजिलेंस की टीम शिकायतों की जांच करने पहुंची, तो स्थानीय आप विधायक ने उन्हें यूनिवर्सिटी में अंदर तक जाने से रोक दिया। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि आम आदमी पार्टी भाजपा की ‘बी-टीम’ नहीं है, तो उसे तुरंत इन 500 करोड़ रुपये के घोटालों की निष्पक्ष जांच करवाकर सच जनता के सामने लाना चाहिए।
