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बालाघाट जिले में एक आदिवासी बच्चे की मौत के बाद प्रशासन पर गंभीर आरोप लगे हैं। मोहनपुर पंचायत के बैगाटोला निवासी 5 वर्षीय लवकुश मरकाम की बुधवार को मृत्यु हो गई। आरोप है कि उसके माता-पिता की गैरमौजूदगी में एसडीएम और स्वास्थ्य विभाग के दबाव में बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया गया। लवकुश अपने दादा के साथ रह रहा था, जबकि उसके माता-पिता हैदराबाद में मजदूरी करते हैं। बच्चे की मौत मलेरिया से हुई बताई जा रही है। इस घटना के बाद आदिवासी समाज ने बालाघाट-बैहर मार्ग पर बंजारी तिराहे के पास चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने मलेरिया संक्रमण फैलने से रोकने का हवाला देते हुए बच्चे का जबरन अंतिम संस्कार करा दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बच्चे का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया और उसके माता-पिता के आने का इंतजार भी नहीं किया गया। आदिवासी समाज ने स्वास्थ्य विभाग पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, बच्चों की मौतों के कारणों का पता लगाने और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग की है। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी मांग की है कि बच्चे के शव को दोबारा निकालकर माता-पिता की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया जाए और फिर अंतिम संस्कार किया जाए। बताया गया है कि लवकुश की तबीयत दो-तीन दिनों से खराब थी और उसे मलेरिया हो गया था। उसका परीक्षण भी किया गया था और दवा भी दी गई थी, लेकिन कथित तौर पर उचित उपचार के अभाव में उसकी मृत्यु हो गई। हालांकि इस मामले में प्रशासन कह रहा है कि हमारी ऐसी कोई मंशा नहीं थी। हमने तत्काल परिजनों को अंतिम संस्कार सहायता राशि भी प्रदान कर दी है। आदिवासी विकास परिषद जिलाध्यक्ष दिनेश धुर्वे ने लगातार आदिवासी बच्चों की मौत के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग को दोषी बताते हुए, जिम्मेदारों को तत्काल बर्खास्त कर कार्रवाई करने और बिना माता-पिता के पहुंचे, जबरदस्ती बच्चे के अंतिम संस्कार करने के मामले में एसडीएफ पर एफआईआर की मांग की है।
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आदिवासी बच्चे की मौत, प्रशासन पर गंभीर आरोप:माता-पिता की गैरमौजूदगी में अंतिम संस्कार, समाज की PM और FIR की मांग
