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न्यूयॉर्क के मेडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त को होने वाले यूनिवर्सिल वननेस सेलिब्रेशंस की तैयारी चल रही है। अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेंजमेंट एंड डायलॉग इसे करवा रहा है और हिंदू स्वयंसेवक संघ, यानी HSS जैसे संगठन साथ हैं। HSS के ग्लोबल कोऑर्डिनेटर सौमित्र गोखले ने 2019 में अमेरिका के ह्यूस्टन में हाऊडी मोदी कार्यक्रम करवाया था, जिसमें 50 हजार लोग जमा हुए थे। इस बार चीफ गेस्ट RSS प्रमुख मोहन भागवत हैं। कई संगठन उनका विरोध कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेंजमेंट एंड डायलॉग के डायरेक्टर सुदेश अग्रवाल और प्रवक्ता प्रिया सामंत से बात की। पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल: ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ पहली बार हो रहा है। मकसद क्या है, इसकी जरूरत क्यों पड़ी? जवाब: दुनिया में कॉन्फ्लिक्ट और ध्रुवीकरण बहुत बढ़ गया है। यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन का मकसद अलग-अलग समुदायों को एक मंच पर लाना है, ताकि वे एक-दूसरे से बात करें और सीखें। हम वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत पर विश्वास करते हैं। परिवार में मतभेद होते हैं, लेकिन रिश्ते नहीं टूटते। दुनिया भी बड़ा परिवार ही है। मतभेद होंगे, फिर भी हम एक हैं। यह कार्यक्रम उसी बड़े परिवार को संवाद और साझा मानवता के लिए एक प्लेटफॉर्म देना चाहता है। सवाल: कार्यक्रम की थीम वसुधैव कुटुंबकम है। चीफ गेस्ट मोहन भागवत हैं। संगठन का नाम अमेरिकन हिंदू इंगेज्ड फॉर डॉयलाग है। क्या कार्यक्रम सिर्फ हिंदुओं के लिए है? जवाब: कार्यक्रम पूरी तरह खुला है। कोई भी समुदाय इसमें शामिल हो सकता है। जो चाहे, रजिस्ट्रेशन कराकर आ सकता है। अब तक 200 संगठनों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। इनमें 16 अलग-अलग धर्मों और आस्थाओं वाली संस्थाएं हैं। सवाल: आपके संगठन का नाम अमेरिकन हिंदू से शुरू होता है और RSS भी मुख्य रूप से हिंदुओं की बात करता है। क्या यह आयोजन हिंदुओं के लिए बड़ा प्लेटफॉर्म होगा? जवाब: भागवत जी 100 साल पुरानी संस्था के प्रमुख हैं। उनके पास अनुभव और जमीनी समझ दोनों हैं। उनकी स्पीच में मानवता से जुड़ा अनुभव होगा। हम सभी को चर्चा का प्लेटफॉर्म देना चाहते हैं। हां ये अमेरिका या दुनिया में कहीं भी रह रहे भारतीय मूल के लोगों के लिए है। फिर भी इसमें किसी भी समुदाय या धर्म की संस्था और व्यक्ति शामिल हो सकते हैं। सवाल: मोहन भागवत के संबोधन के प्रमुख मुद्दे क्या होंगे? जवाब: उनकी स्पीच हम उसी दिन सुन पाएंगे। कार्यक्रम का मकसद अलग-अलग धर्मों के लोगों को एक-दूसरे से संवाद कराना है। यह सिर्फ हिंदू समुदाय या प्रवासी भारतीयों तक सीमित नहीं है। मोहन भागवत जी विश्व की सबसे बड़ी संस्था RSS का प्रतिनिधित्व करते हैं। सभी संस्था प्रमुखों को उनसे सीखने को मिलेगा कि इतनी बड़ी संस्था चलाते कैसे हैं। सवाल: पूरी चर्चा में हिंदू समुदाय या हिंदुत्व जैसे मुद्दे प्राथमिकता में होंगे क्या? जवाब: पूरा इंडियन डायस्पोरा होगा, यानी भारत छोड़कर दूसरे देशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग। सवाल: आप बार-बार इंडियन डायस्पोरा की बात कर रहे हैं। क्या पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर भी बात होगी? जवाब: हमने इस कार्यक्रम के लिए रक्षाबंधन का वक्त चुना है। यह सिर्फ धार्मिक त्योहार नहीं, सामुदायिक उत्सव भी है। भागवत जी भी यूनिवर्सल वननेस का ही संदेश देंगे। उन्होंने देश के कोने-कोने तक जाकर हर समुदाय युवा, महिलाओं, आदिवासियों, मुस्लिम, ईसाई सभी से संवाद किया है। अगर आपका सवाल प्रोग्राम के वक्त प्रासंगिक होगा तो उस पर भी जरूर चर्चा होगी। सवाल: आपका संगठन 2025 में बना। अमेरिका में हिंदू बहुत पहले से रह रहे हैं, इसे अभी बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब: अमेरिकी समाज में हिंदू धर्म और हिंदुओं के बारे में कई गलत धारणाएं और रूढ़ियां हैं, जबकि अर्थव्यवस्था में हिंदुओं का योगदान काफी अच्छा है। हम प्रेस, अमेरिकी शिक्षाविदों और भारतीय मूल के अमेरिकियों से बिना बिचौलियों के सीधा संवाद करना चाहते थे, ताकि बात का सही मतलब पहुंचे। बहुत पहले से ऐसे प्लेटफार्म की तैयारी कर रहे थे। ये पिछले साल बनकर तैयार हुआ। सवाल: USCIRF, सवेरा, हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स जैसे संगठन मोहन भागवत की यात्रा का विरोध कर रहे हैं। क्या आपने उनसे संपर्क करने की कोशिश की? जवाब: लोकतंत्र में असहमत होने का अधिकार सभी को है। इसीलिए यह कार्यक्रम और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हम तो यही कहते हैं कि जो भी असहमत है, आकर अपनी बात रखे। खुला प्लेटफॉर्म है। वेबसाइट पर ओपन रजिस्ट्रेशन चल रहा है। सवाल: USCIRF के बारे में आपकी क्या राय है? जवाब: यह यहां की फेडरल गवर्नमेंट की सलाहकार बॉडी है। सलाह दे सकती है, लेकिन एक्शन लेने वाली संस्था नहीं है। हमारा कार्यक्रम भी एक लोकतांत्रिक मंच है। सवाल: सवेरा नाम की संस्था भी लगातार विरोध कर रही है। उसने एक रिपोर्ट भी जारी की है। वे कह रहे हैं कि ये RSS का गुप्त एजेंडा है? जवाब: मैं RSS के बारे में बात करने के लिए सही व्यक्ति नहीं हूं। मैं अपने संगठन और इस कार्यक्रम के बारे में ही बोल सकता हूं। RSS से जुड़े सवालों के लिए आपको उनसे संपर्क करना होगा। सवाल: न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने भी विरोध किया है। फिर आपको अनुमति कैसे मिली? जवाब: अमेरिका में बिना अनुमति के कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं हो सकता। यह हमारा निजी इवेंट है। अनुमति की प्रक्रिया पूरी की गई है, तभी हम इतना बड़ा कार्यक्रम कर पा रहे हैं। यहां ऐसा नहीं होता कि आज रात को उठे और कल कार्यक्रम करने लगे। सवाल: आपका संगठन और हिंदू स्वयंसेवक संघ रजिस्टर्ड हैं, लेकिन RSS नहीं। अमेरिका जैसे सख्त नियमों वाले देश में नॉन-रजिस्टर्ड संस्था के मुखिया को चीफ गेस्ट बनाकर अनुमति लेने में दिक्कत नहीं हुई? जवाब: इस बारे में हमें ज्यादा जानकारी नहीं है। इस कार्यक्रम से जुड़े सवालों के जवाब हम देंगे, लेकिन RSS से जुड़े सवालों के लिए आपको उनसे ही संपर्क करना होगा। सवाल: कार्यक्रम में कितनी भीड़ जुटने की उम्मीद है? जवाब: कम से कम 5000 लोग तो होंगे। सवाल: और कितने देशों में यह कार्यक्रम होना है? जवाब: अभी तो सिर्फ अमेरिका में ही हो रहा है।
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‘मोहन भागवत का कार्यक्रम सिर्फ हिंदुओं के लिए नहीं’:आयोजक बोले- 16 धर्मों के लोग आएंगे, विरोध करने वाले भी आएं
