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हार्ट में छेद के लिए इंतजार करते मौत,अब बनाई कमेटी:एम्स के डॉक्टर्स के अनुसार- ऑपरेशन संभव नहीं था; कोटा की छात्रा ने किया था 13 साल वेट




दिल्ली एम्स में इलाज के लिए 13 साल से चक्कर काट रही कोटा के गुमानपुरा की 15 साल की छात्रा तन्वी की मौत के मामले में एम्स में जांच समिति बनाई है। तन्वी की एक सितंबर को एम्स में मौत हो गई थी। परिवार का आरोप है कि बीते 13 सालों में 100 से भी ज्यादा बार तन्वी को लेकर एम्स पहुंचे, लेकिन हर बार सर्जरी की तारीख आगे बढ़ा दी गई। तन्वी के पिता मुकेश रेडीमेड कपड़ों की शॉप पर काम करते हैं। तन्वी 9वीं कक्षा की छात्रा थी। तन्वी के पिता ने बताया कि 2 साल की उम्र में दिल की बीमारी का पता चला था। उसी समय से दिल्ली एम्स में इलाज चल रहा था। डॉक्टरों ने हर 2-3 महीने में जांच के लिए बुलाया। परिवार हर बार इस उम्मीद में कोटा से दिल्ली जाता कि इस बार बेटी का ऑपरेशन हो जाएगा, लेकिन सर्जरी की तारीख ही मिलती रही। मामले में एम्स ने जांच समिति गठित की है। डॉ. रीमा दादा, प्रभारी मीडिया सेल, एम्स ने बताया कि कमेटी मरीज के इलाज, विशेषज्ञों की राय, मेडिकल रिकॉर्ड और मौत से जुड़ी परिस्थितियों की विस्तार से जांच करेगी। एम्स ने कहा है कि अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट और समिति की जांच पूरी होने के बाद ही निकाले जाएंगे।
एम्स के अनुसार, तन्वी पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को कार्डियोलॉजी ओपीडी में लाई गई थीं। जांच में उन्हें वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) के साथ पल्मोनरी एट्रेसिया नामक जटिल जन्मजात दिल की बीमारी का पता चला था। एम्स के मुताबिक, विस्तार से जांच के बाद 2017 में विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि हार्ट की जटिल बनावट के कारण सर्जरी संभव नहीं है। परिवार को दवा के जरिए इलाज की सलाह दी गई। एम्स के अनुसार, 1 सितंबर की सुबह करीब 2.50 बजे तन्वी को अचानक कमजोरी महसूस हुई। ऑक्सीजन लेवल 48 प्रतिशत रह गया। डॉक्टरों ने लंबे समय तक पुनर्जीवन (रिससिटेशन) का प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।



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