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सांसद मन्नालाल की 'रामजी' ने सुन ली:दुनिया छोड़ने के बाद ASI का तबादला; उपायुक्त वकील को बोले- दलाली करते हो




नमस्कार, उदयपुर सांसदजी ने गाया था- मेरी झोपड़ी के भाग खुल जाएंगे, राम आएंगे। रामजी ने सांसद महोदय की सुन ली। जोधपुर रेंज आईजी ऑफिस से तबादलों के आदेश में भारी भूल हो गई और शहरी सेवा शिविर में हुई वकील-डीसी की बहस। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. सांसद मन्नालाल का आलीशान मकान उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत प्रतापगढ़ के धरियावद पहुंचे थे। वहां पंचायत भवन का उद्घाटन किया था। कार्यक्रम में शासन-प्रशासन के प्रतिनिधि, जन प्रतिनिधि और गांवभर के लोग आए थे। सांसद महोदय को जाने क्या सूझी कि भगवान राम का भजन गाने लगे। गांव वालों से दोहराने को कहा। उन्होंने गाया- मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएंगे। गांव वाले सुर में सुर मिलाने लगे- मेरी झोपड़ी के भाग.. रामजी ने सांसद महोदय की सुन ली। उन्होंने उदयपुर शहर के सेक्टर-14 में मकान का रिनोवेशन कराया। नया मकान आलीशान है। सांसद महोदय ने विधि-विधान से गृह प्रवेश किया है। आस्था से भगवान को धोक लगाई। बाकी रामजी के आने से कई झोपड़ियों के भाग्य अयोध्या में भी खुल चुके हैं। हालांकि वहां मामला दूसरा है। 2. तबादला हो गया अपने घर के आसपास तबादला करवाने के लिए कर्मचारी क्या नहीं करते? एक डिजायर के लिए दर-दर की ठोकरें खाते हैं। जी-हुजूरी करते हैं। फिर भी घर के पास तबादला नहीं होता। घर लौटने में कई साल गुजर जाते हैं। बच्चे छोटे से बड़े हो जाते हैं। अनोपारामजी का भी तबादला हो गया। वो बाड़मेर में ASI थे। उनके ट्रांसफर की लिस्ट निकली तो हर कोई भौचक्का रह गया। जोधपुर रेंज आईजी कार्यालय से पुलिसकर्मियों के तबादलों की सूची जारी की गई थी। इस सूची में 16वें नंबर पर अनोपारामजी का नाम। उन्हें बाड़मेर से अपने गृह जिले बालोतरा भेज दिया गया था। लिस्ट की चर्चा इसलिए हुई, क्योंकि अनोपारामजी 8 दिन पहले ही दुनिया को अलविदा कह चुके थे। जोधपुर में बीमारी से उनका निधन हो गया था। उनके अंतिम संस्कार के वक्त साथियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उनके सम्मान में सलामी दी गई। एक सलामी उनको भी देनी चाहिए जो ऐसी खामी कर जाते हैं और अपने ही डिपार्टमेंट की जगहंसाई करा देते हैं। 3. चलते-चलते… जोधपुर में एक वकील हैं कृपाराम सोलंकी। प्रशासन से उन्हें एक प्लॉट बेचने की सेल परमिशन चाहिए थी। नगर निगम प्रशासन ने फाइल अटका रखी थी। उपायुक्त साहब साइन नहीं कर रहे थे। सोलंकीजी पहुंच गए शहरी सेवा शिविर। लेकिन यहां भी दो-तीन चक्कर काटने के बाद डीसी साहब ने साइन नहीं किए। वकील साहब थोड़े बहुत जर्नलिज्म के गुर भी जानते थे। उन्होंने जेब से मोबाइल निकाला और राहत शिविर का पर्दाफाश करने लगे। कैंप का नजारा कैमरे में कैद करते हुए बोले- देखिए दोस्तों, कैंप का टाइम शाम 6 बजे तक है। अभी 5 बजे कोई अधिकारी नहीं दिख रहा। यहां काम ही नहीं हो रहा है। वे नगर निगम उपायुक्त ताराचंदजी के पास गए। बोले- यहां काम नहीं हो रहा। मेरा काम क्यों नहीं कर रहे? उपायुक्त उखड़े हुए थे। उन्होंने चिढ़ते हुए कहा- क्योंकि आप बीच में दलाली कर रहे हैं। बात वकील साहब को चुभ गई। उन्होंने बताया- निगम में ये लोग बिना पैसा लिए काम नहीं करते। मैंने नाम ट्रांफसर कराया तो एक रुपया नहीं दिया। शहरी सेवा शिविर आम जनता के लिए है। मैं पैसे देकर काम क्यों कराऊं ? इसलिए फाइल अटका रखी थी। काम हो या न हो, कैसे भी हो, लेकिन सेवा शिविर में उपायुक्त ने वकील से जिस भाषा में बात की, उस पर ऐतराज लाजिमी है। फिलहाल उपायुक्त साहब की बदली हो चुकी है। वकील साहब का काम आयुक्त मैडम ने किया। वह भी फ्री। बात करने का तरीका बदल जाए तो बहुत कुछ बदल सकता है। इनपुट सहयोग- विजय कुमार (बाड़मेर), मुकेश हिंगड़ (उदयपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।



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