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चतरा जिले के टंडवा प्रखंड की भगिया देवी ने बिना किसी सरकारी मदद के आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। उन्होंने बत्तख और मुर्गी पालन का एक सफल मॉडल तैयार किया है। इससे वे सालाना 10 लाख रुपए तक की कमाई कर रही हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। कोयद पंचायत के ढिबरटोला निवासी भगिया देवी (पति नागों साव) को अपने मायके में बत्तख पालन देखकर प्रेरणा मिली थी। ससुराल लौटने के बाद उन्होंने भी इसे अपनाने का फैसला किया। 1100 बत्तखें मंगवाकर अपना स्वरोजगार शुरू किया
भगिया देवी ने गांव से 3 लाख रुपए का कर्ज लिया। इसके बाद उन्होंने आंध्र प्रदेश से 1100 बत्तखें मंगवाकर अपना स्वरोजगार शुरू किया। आज उनके फार्म में करीब 650 बत्तखें और 1000 सोनाली प्रजाति के मुर्गे-मुर्गियां हैं। इनमें 600 मुर्गियां और 400 मुर्गे शामिल हैं। भगिया देवी की मेहनत अब अच्छी कमाई में बदल चुकी है। उनके फार्म से हर दिन औसतन 200 अंडे निकलते हैं। आसपास के बाजारों में 15 रुपए प्रति अंडे की दर से बिक्री कर वे रोजाना 3 हजार रुपए और महीने के 90 हजार रुपए कमा रही है। सर्दियों में अंडों का उत्पादन बढ़ जाता है
इस तरह उनकी सालाना आमदनी लगभग 10 लाख 80 हजार रुपए हो जाती है। सर्दियों के मौसम में अंडों का उत्पादन बढ़कर 300 तक पहुंच जाता है और कीमत भी 20 रुपए प्रति पीस मिलने लगता है, जिससे मुनाफा और बढ़ जाता है।
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बत्तख-मुर्गी पालन से सालाना कमा रहीं 10 लाख रुपए:मायके से मिली प्रेरणा, बनीं आत्मनिर्भर; 3 लाख रुपए कर्ज लेकर शुरू किया कारोबार
