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मेरठ में किसी के मकान- दुकान पर नहीं चलेगा बुलडोजर:रविंद्र गुर्जर ने कहा- आंदोलन से मुख्यमंत्री तक पहुंची यहां के लोगों की समस्या




मेरठ में बीते दो सितंबर को शहर बंद कर आवास विकास के खिलाफ प्रदर्शन कर निर्माणों पर कार्रवाई के विरोध में चल रहे आंदोलन को लेकर आंदोलनकारियों ने बड़ा दावा किया है। समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर ने कहा कि मेरठ में अब किसी का घर नहीं टूटेगा और किसी व्यापारी की दुकान पर बुलडोजर नहीं चलेगा। मेरठ की जनता और व्यापारियों की आवाज अब प्रदेश के मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस मामले में सरकार से राहत मिलेगी। रविंद्र गुर्जर ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति या नेता का आंदोलन नहीं है। इसमें शहर के व्यापारियों, आम लोगों और लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे लोगों की सामूहिक आवाज शामिल है। उन्होंने कहा कि बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोग आंदोलन में डटे रहे। आंदोलन ने शहर के लोगों को अपनी बात मजबूती से सरकार तक पहुंचाने का मंच दिया। उन्होंने कहा, “किसी का भी एक घर मेरठ में नहीं टूटेगा और किसी की दुकान पर बुलडोजर नहीं चलेगा।” आंदोलनकारियों ने दावा किया कि मुख्यमंत्री तक मेरठ की आवाज पहुंची है और उन्हें उम्मीद है कि जल्द सकारात्मक निर्णय सामने आएगा। अधिकारियों की अनुमति पर उठाए सवाल सुदीप जैन ने आवास विकास विभाग की कार्रवाई और वहां हुए निर्माणों को लेकर अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जिन निर्माणों को आज अवैध बताया जा रहा है, वहां पहले सरकारी विभागों की ओर से अलग-अलग अनुमतियां और सुविधाएं दी गईं। यदि किसी स्थान पर स्कूल, अस्पताल और अन्य प्रतिष्ठानों को अनुमति दी गई, जीएसटी वसूला गया, प्रॉपर्टी टैक्स लिया गया और संपत्तियों के बैनामे हुए तो वर्षों बाद उसी निर्माण को अवैध कैसे घोषित किया जा सकता है। आवास विकास में तैनात अधीक्षण अभियंता राहुल यादव के निलंबन की मांग रखते हुए रविंद्र ने कहा कि हमारे मांग पत्र में भी सह स्पष्ट है और अब भी कह रहे हैं कि जब तक भ्रष्टाचारी अधिकारी को निलांबित नहीं करा देते वह चैन से नहीं बैठेंगे। इस पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप जैन एवं भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष नितेश पंवार ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि कार्रवाई केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उस समय के सभी संबंधित अधिकारियों, जिनके विरुद्ध मुकदमे दर्ज हुए हैं, उनके खिलाफ निष्पक्ष जांच के बाद चार्जशीट दाखिल कर कानूनी कार्रवाई की जाए। दोष सिद्ध होने पर उन्हें जेल भेजने के साथ-साथ कानून के अनुसार उनकी संपत्ति एवं पेंशन से होने वाली सरकारी क्षति की रिकवरी की जाए।



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