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बालाघाट में कृष्ण जन्म पर जुटे 1 हजार भक्त:100 साल पुराने सिद्धपीठ कृष्ण मंदिर में विधायक मुंजारे भी पहुंचीं आज मटकी फोड़




बालाघाट में कृष्ण जन्माष्टमी पर 100 साल से ज्यादा पुराने सिद्धपीठ कृष्ण मंदिर में रात 12 बजे जन्मोत्सव मनाया गया। इस दौरान एक हजार से ज्यादा भक्त मंदिर पहुंचे। विधायक अनुभा मुंजारे भी कार्यक्रम में शामिल हुईं और भगवान श्रीकृष्ण की आरती की। जन्माष्टमी के दूसरे दिन शनिवार को शहर में कई जगह मटकी फोड़ होगी और शाम 4 बजे से घरों में स्थापित कृष्ण प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू होगा। फूलों से सजाया 100 साल पुराना मंदिर गुजरी बाजार स्थित श्रीकृष्ण मंदिर को जन्मोत्सव के लिए फूलों से सजाया गया था। सुबह भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक, आरती और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रृंगार किया गया। दोपहर 4 बजे से रात 8 बजे तक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इस दौरान सुंदरकांड और भजन का आयोजन भी हुआ। रात 12 बजे हुआ कृष्ण जन्म रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। जैसे ही जन्म का समय हुआ, मंदिर में जयकारे गूंजने लगे। एक हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने आरती और भजन में हिस्सा लिया। विधायक अनुभा मुंजारे भी कार्यक्रम में पहुंचीं और भगवान श्रीकृष्ण की आरती की। पुरखों से परिवार कर रहा मंदिर में पूजा मंदिर के पुजारी शर्मा ने बताया कि श्रीकृष्ण मंदिर 100 साल से ज्यादा पुराना है। उनके परिवार के पुरखे लंबे समय से यहां पूजा करते आ रहे हैं। हर साल जन्माष्टमी पर भक्तों के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है। आज शहर में कई जगह फोड़ी जाएगी मटकी कृष्ण जन्मोत्सव के दूसरे दिन मेनरोड, मोतीनगर, प्रेमनगर, भटेरा रोड और सर्किट हाउस रोड सहित कई जगह मटकी फोड़ कार्यक्रम होंगे। घरों में स्थापित कृष्ण प्रतिमाओं का विसर्जन शाम 4 बजे से शुरू होगा, जो देर रात तक चलेगा। लिंगा गांव में इस बार दूसरे दिन विसर्जन मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर लिंगा गांव में इस बार कृष्ण प्रतिमाओं का विसर्जन दूसरे दिन ही होगा। पिछले करीब दो दशक से यहां प्रतिमाएं दो दिन घरों में रखने के बाद तीसरे दिन विसर्जित करने की परंपरा रही है। इस बार तीसरे दिन रविवार होने के कारण आज विसर्जन किया जाएगा। लिंगेश्वर शिवमंदिर के सचिव डॉ. अमृत रकसिया ने बताया कि पहले लिंगेश्वर शिवमंदिर के सामने मटकी फोड़ी जाएगी। इसके बाद गांव की सभी प्रतिमाएं गुजरी बाजार में एकत्रित की जाएंगी। यहां से बाजे-गाजे के साथ सामूहिक विसर्जन यात्रा निकलेगी और गांव के पास घिसर्री नदी में प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।



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