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चंडीगढ़ के 16 टीचरों को मिला राज्य पुरस्कार:कटारिया बोले-शिक्षक मौन राष्ट्र-निर्माता; बच्चों को सिर्फ परीक्षा नहीं जीवन के लिए तैयार करें




चंडीगढ़ प्रशासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षक दिवस पर विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया। उन्होंने शिक्षकों को ‘मौन राष्ट्र-निर्माता’ बताते हुए कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल बच्चों को किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं है। वह बच्चों के चरित्र, संस्कार और सोच को विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समारोह में शिक्षा सचिव प्रेरणा पुरी, स्कूल शिक्षा निदेशक नितीश सिंगला, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, पुरस्कार विजेता, विद्यार्थी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। 16 शिक्षकों को राज्य पुरस्कार स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, नए तरीके अपनाने और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर योगदान के लिए कुल 16 शिक्षकों को राज्य पुरस्कार दिए गए। इसके अलावा 6 शिक्षकों को प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर उनके काम की सराहना की गई। सेंट जोसेफ सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-44 की प्रधानाचार्य मोनिका चावला और रमेश शर्मा को विशेष सम्मान पुरस्कार दिया गया। वहीं, पिछले वर्ष राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने वाली शिक्षिका परवीन कुमारी को भी समारोह में सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय कार्य के लिए मिला ऑनर स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से किए जा रहे उल्लेखनीय कार्य के लिए चंडीगढ़ प्रशासन के स्कूल शिक्षा विभाग की उप निदेशक बिंदु अरोड़ा को ‘स्कूली शिक्षा में आजीवन योगदान पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। उनके शिक्षा के क्षेत्र में लगातार योगदान और विभागीय कार्यों में भूमिका की सराहना की गई। रवि कुमार को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल, मलोया कॉलोनी के विज्ञान शिक्षक रवि कुमार जायसवाल को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चुना गया है। समारोह में उनके शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचार की विशेष रूप से सराहना की गई। रवि कुमार ने विद्यार्थियों को विज्ञान समझाने और पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए कबाड़ और अनुपयोगी सामग्री का इस्तेमाल कर 3डी डोम थिएटर तैयार किया है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को विज्ञान से जुड़े विषयों को अनुभव के साथ समझने का अवसर मिलता है। सच्चा शिक्षक बच्चों का चरित्र बनाता समारोह में संबोधित करते हुए राज्यपाल कटारिया ने गुरु वशिष्ठ और आचार्य चाणक्य का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सच्चा शिक्षक सिर्फ ज्ञान नहीं देता, बल्कि बच्चों में अच्छे संस्कार डालता है और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए तैयार करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को केवल परीक्षा पास करने के लिए तैयार करना नहीं होना चाहिए। उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार किया जाना जरूरी है। कटारिया ने शिक्षकों से कौशल आधारित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों में अपनी बात समझने और सोचने की क्षमता, रचनात्मकता, समस्याओं का समाधान करने की क्षमता, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता विकसित होनी चाहिए। तकनीक का सही इस्तेमाल सिखाएं शिक्षक राज्यपाल ने शिक्षा में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बच्चों को तकनीक का सही, जिम्मेदारी से और उद्देश्यपूर्ण तरीके से इस्तेमाल करना सिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका इस्तेमाल पढ़ाई, नए प्रयोग, ज्ञान बढ़ाने और विद्यार्थियों को सक्षम बनाने के लिए किया जाना चाहिए। कटारिया ने कहा कि शिक्षक समाज और देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रशासक, उद्यमी या किसी अन्य क्षेत्र में सफल व्यक्ति बनने के पीछे किसी न किसी शिक्षक का योगदान जरूर होता है। उन्होंने भारतीय परंपरा में गुरु के सम्मान का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक को हमेशा ज्ञान, संस्कार और सही रास्ता दिखाने वाले मार्गदर्शक के रूप में देखा गया है।



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