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डर लगा रहता है कब जमीन धंस जाए:धनबाद में 7 दिन में कई जगह भू-धंसान, बरारी में जमीन से निकली आग, केंदुआडीह में बने दो गोफ




हर समय डर रहता है कि कब जमीन धंस जाए…धबनाद के झरिया के आग प्रभावित इलाके में रहने वाले लोगों की यह चिंता बीते 7 दिनों में हुई भू-धंसान की घटनाओं के बाद और गहरी हो गई है। 30 अगस्त को बारिश के बीच झरिया में जमीन धंसने से बड़ा गोफ बन गया। आसपास के घरों में दरारें आ गईं। इसके दो दिन बाद कतरास के लकड़का छह नंबर चानक के पास तेज आवाज के साथ करीब 30 फीट का गोफ बन गया। इसमें एक मवेशी गिर गया, जिसे कई घंटे के बचाव अभियान के बाद बाहर निकाला गया। लोयाबाद-कतरास मेन रोड पर भी महीनों पहले धंसी सड़क की अब तक मरम्मत नहीं हुई है। सड़क किनारे गैस रिसाव की शिकायत भी लोगों की चिंता बढ़ा रही है। स्थानीय लोगों की मांग है कि सड़क की मरम्मत के साथ गैस रिसाव की जांच कर सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं। बरारी में जमीन से निकली आग, केंदुआडीह में दो गोफ बने 3 सितंबर को लोदना क्षेत्र के बरारी छह नंबर बस्ती में तेज धमाके के साथ जमीन धंस गई। जमीन में बनी दरारों से आग की लपटें और जहरीला धुआं निकलने लगा। इससे आसपास रहने वाले परिवारों में हड़कंप मच गया। गैस और धुएं के बीच रहने वाले लोगों को अब स्वास्थ्य और जान का खतरा सता रहा है। इसी दिन केंदुआडीह के कुर्मी डीह-पांडे बस्ती के पास अचानक दो बड़े गोफ बन गए। गैस रिसाव की सूचना मिलने पर बीसीसीएल ने इलाके की घेराबंदी कर गोफ की भराई शुरू की। लोगों ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगह पर बसाने की मांग की। केंदुआडीह में दिसंबर 2025 में भी जहरीली गैस रिसाव से दहशत फैली थी। लोगों को सुरक्षित स्थान पर हटाना पड़ा था। उस घटना में लोगों के बीमार पड़ने के साथ मौतों की खबर भी सामने आई थी। काजू बागान और गोधर में पुराने गोफ और भू-धंसान की घटनाएं भी लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। बारिश में पुराने खनन क्षेत्रों में पानी जाने से जमीन कमजोर होने का खतरा और बढ़ जाता है। परिवारों को चाहिए सुरक्षित घर और रोजगार लगातार हो रही घटनाओं से अलग-अलग बस्तियों में रहने वाले कई परिवार प्रभावित हुए हैं। हालांकि सभी घटनाओं को मिलाकर प्रभावित लोगों की संयुक्त आधिकारिक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। घटनास्थलों पर बीसीसीएल की ओर से घेराबंदी, गोफ भरने और रेस्क्यू जैसे तत्काल कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए समस्या सिर्फ घर गिरने या जमीन धंसने तक सीमित नहीं है।
घर खाली करना पड़ा तो बच्चों की पढ़ाई, रोजमर्रा का खर्च, काम पर आने-जाने और सामान सुरक्षित रखने की मुश्किल खड़ी हो जाती है। दिहाड़ी मजदूरी या छोटे रोजगार पर निर्भर परिवारों के लिए दूसरी जगह जाकर रहना अतिरिक्त आर्थिक बोझ है। 7 अगस्त को छाताबाद में हुई बड़ी भू-धंसान की घटना इसका उदाहरण है। करीब 20 घर जमीनदोज होने के बाद बड़ी संख्या में परिवारों के सामने रहने और जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया था। फिलहाल बीसीसीएल की ओर से छाताबाद में प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। संवेदनशील इलाकों का हो सर्वे, मिले स्थायी पुनर्वास काजू बागान, गोधर, झरिया, लोदना और केंदुआडीह जैसे इलाकों में लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच स्थानीय लोग तत्काल राहत के साथ स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि घटना के बाद सिर्फ गोफ भरना पर्याप्त नहीं है। संवेदनशील इलाकों का सर्वे कर यह पता लगाने की जरूरत है कि किन परिवारों पर सबसे ज्यादा खतरा है। ऐसे परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने के साथ रोजगार और जीविका की व्यवस्था भी करनी होगी, ताकि पुनर्वास के बाद उनका जीवन प्रभावित न हो। बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था भी जरूरी है। दिसंबर 2025 में केंदुआडीह में गैस रिसाव के बाद भी लोगों ने गैस और भू-धंसान के खतरे का स्थायी समाधान और सुरक्षित पुनर्वास की मांग की थी।



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