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BHU Teachers Day 2026 | 14 Educationists Honored in Varanasi


वाराणसी में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान दार्शनिक, शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के अवसर पर अपने सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान करते हुए श्रद्धा एवं कृतज्ञता के साथ शिक्षक दिवस-2026 मनाया।

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डॉ. राधाकृष्णन ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चौथे कुलपति के रूप में 8 वर्ष से अधिक समय तक सेवाएं दी थीं। देशभर में उनकी जयंती शिक्षक दिवस के रूप में मनाई जाती है।

शनिवार को स्वतंत्रता भवन में आयोजित समारोह में उपस्थित 14 सेवानिवृत्त शिक्षकों को विश्वविद्यालय एवं शिक्षा जगत में उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने महामना की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शिक्षकों के योगदान का उल्लेख किया।

उन्होंने विद्यार्थियों और अन्य हितधारकों के बीच विश्वविद्यालय की धारणा को और बेहतर बनाने के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय समुदाय के निरंतर एवं सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया तथा इस दिशा में महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों की चर्चा की।

कुलपति ने बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विश्वविद्यालय की शासन-व्यवस्था में परिवर्तन की आवश्यकता बताई। उन्होंने शिक्षण एवं अध्यापन पद्धति में आवश्यक बदलावों का सुझाव दिया। उन्होंने एक शताब्दी से अधिक पुरानी विश्वविद्यालय के गवर्नेंस सिस्टम में विभिन्न सुधारों की आवश्यकता पर स्पष्ट रूप से अपने विचार रखते हुए नवाचार की आवश्यकता बताई।

इसके समाधान के रूप में उन्होंने विश्वविद्यालय में विकेन्द्रीकृत व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि नए शैक्षणिक संस्थानों में विकेन्द्रीकृत व्यवस्था के मॉडल विकसित हुए हैं। उनके अनुसार, केंद्रीकृत व्यवस्था एक बड़े विश्वविद्यालय के लिए उपयुक्त नहीं है और इससे केंद्रीय एवं विभागीय स्तर के निकायों के बीच दूरी उत्पन्न होती है।

विकेन्द्रीकृत व्यवस्था से निर्णय-प्रक्रिया में अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी, क्योंकि विभाग, संकाय और संस्थान मिलकर विश्वविद्यालय का स्वरूप बनाते हैं। मुख्य अतिथि प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. नागेश्वर राव ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शिक्षकों की विशिष्ट मूल्य-व्यवस्था का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने विद्यार्थियों की पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते हुए राष्ट्र के लिए महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।



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