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गहलोत बोले- रोडशो का जवाब रोडशो होता तो ज्यादा सीटें-जीतते:निर्दलीयों को जो वोट मिले वो कांग्रेस को क्यों नहीं मिले, यह चिंता का विषय




जयपुर में पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा- मुख्यमंत्री के रोड शो और बीजेपी नेताओं के आक्रामक चुनाव प्रचार पर कांग्रेस भी रोड शो निकालती, तो हम थोड़ा बैटर हो सकते थे। गहलोत ने कहा- कांग्रेस के अगर सब नेता एक साथ निकलते। प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रोग्राम बनता। कोई प्लानिंग होती तो मैं समझता हूं सरकार के खिलाफ जो माहौल है, उसका फायदा कांग्रेस को मिलता। हम ज्यादा सीटें जीत सकते थे। शहरी निकाय चुनाव में कांग्रेस से ज्यादा निर्दलीयों को वोट मिलने और बीजेपी के आक्रमक प्रचार का पार्टी के जवाब नहीं देने पर गहलोत ने सवाल उठाए। गहलोत गुरुवार को सिविल लाइंस आवास पर मीडिया से बातचीत कर रहे थे। गहलोत ने कहा- सरकार से नाराजगी के बावजूद निर्दलीयों को जो वोट मिले हैं, वो कांग्रेस को क्यों नहीं मिले, यह सवाल रहेगा। इसका विश्लेषण कांग्रेस पार्टी अपने लेवल पर बैठकर करेगी, तभी सही स्थिति का आकलन होगा। कांग्रेस से ज्यादा निर्दलीयों को मिले वोट अशोक गहलोत ने कहा- यह हमारे लिए चिंता का विषय होना चाहिए कि निर्दलीयों के पास वोट क्यों गए? यह वोट कांग्रेस को मिलने चाहिए थे। हमें उम्मीद है कि पंचायत चुनाव में हम यह जो यह कमी रही है, उसकी भरपाई कर पाएंगे। गहलोत ने कहा- हमने ‘संगठन सृजन’ कार्यक्रम चलाकर पूरा जाल बिछाया हुआ था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में निर्दलीय जीते हैं तो स्वाभाविक है सवाल उठेगा। गहलोत ने कहा- बीजेपी सरकार के प्रति नाराजगी थी, जो सब झलकती है यह बात फैक्ट है। हर व्यक्ति के जुबान पर नाराजगी दिखती है। इस सरकार के प्रति ऐसी नाराजगी मैंने पहले कभी नहीं देखी। हालांकि चुनाव में बीजेपी पूरी तरह कामयाब नहीं हुई, लेकिन निर्दलीय का जीतना चिंताजनक है। मेयर-चेयरमैन बीजेपी का नहीं, लक्ष्मीजी का बनेगा; पार्षदों को दिए जा रहे 2-2 करोड़ के प्रलोभन अशोक गहलोत ने कहा- मेयर भाजपा का नहीं बनेगा, लक्ष्मीजी का बनेगा। उनकी स्थिति खराब है, लेकिन लक्ष्मीजी की ताकत कितनी बड़ी है। उस लक्ष्मी की ताकत से मेयर बनाएंगे। निष्पक्ष चुनाव के लिए ‘इक्वल लेवल प्लेइंग फील्ड’ होना आवश्यक है, लेकिन प्रदेश में एकतरफा पुलिस कार्रवाई की जा रही है। गहलोत ने कहा- जो लोग करोड़ों रुपए खर्च करके चेयरमैन या मेयर बनेंगे, वे जनता की सेवा करने के बजाय अपनी लागत वसूलने का काम करेंगे। इससे आम नागरिक की जेब पर सीधा डाका पड़ेगा। देश में भाजपा के पास पैसों की कमी नहीं है। देशभर में निर्वाचित सरकारों को गिराने के लिए धनबल का जो तमाशा किया गया, ‘जैसा देश वैसा भेष’ की तर्ज पर वही प्रेरणा अब नीचे जिलों और ब्लॉकों तक पहुंच चुकी है। 64% वोट भाजपा के खिलाफ पड़े गहलोत ने कहा- सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग, मनमाना परिसीमन, मुख्यमंत्री के खुद के रोड शो और भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री की मॉनिटरिंग के बावजूद 64% वोट भाजपा के खिलाफ पड़े हैं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निकाय चुनाव में भाजपा की झूठी जीत की बधाई देना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस कारण अब राज्य सरकार पर किसी भी तरह से ज्यादा से ज्यादा बोर्ड बनाने का भारी दबाव है। हार के आंकड़े उजागर करते हैं जनता का असली फैसला गहलोत ने कहा- प्रदेश के कुल 10 हजार 244 वार्डों में से भाजपा 6,065 वार्डों (59%) में चुनाव हारी है। इसके अलावा प्रदेश के 309 निकायों में से 223 यानी 72% निकायों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। 10 नगर निगमों में से भाजपा केवल 4 (भीलवाड़ा, जयपुर, कोटा, उदयपुर) में ही बहुमत पा सकी, जो पिछले चुनाव की तुलना में भी एक निगम कम है।



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