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मध्यप्रदेश में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों से जुड़ी बूथवार जानकारी मांगने के मामले में हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने राज्य सूचना आयोग को समय-सीमा में फैसला करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता दिलीप कौशल की राज्य सूचना आयोग में लंबित दूसरी अपील का 45 दिन के भीतर गुण-दोष के आधार पर निराकरण करने को कहा है। आयोग को अपने निर्णय की प्रति याचिकाकर्ता को भी उपलब्ध करानी होगी। मामला प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों में पुनरीक्षण के दौरान असंग्रहीत या अनुपलब्ध प्रपत्रों के आधार पर मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बूथवार जानकारी से जुड़ा है। कौशल ने यह जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी थी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने जानकारी को आंतरिक उपयोग का बताते हुए देने से इनकार कर दिया था। 11 दिसंबर को मांगी थी बूथवार जानकारी दिलीप कौशल ने 11 दिसंबर 2025 को RTI के तहत प्रदेश की सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में बूथवार निरस्त किए गए प्रपत्रों की जानकारी मांगी थी। उनका कहना था कि पुनरीक्षण के दौरान जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, उनसे संबंधित आंकड़े बूथवार उपलब्ध कराए जाएं। 20 दिसंबर 2025 को निर्वाचन अधिकारी ने आवेदन निरस्त करते हुए कहा कि संबंधित आंकड़े आंतरिक उपयोग के लिए हैं। इसके बाद 29 जनवरी 2026 को प्रथम अपीलीय अधिकारी ने भी अपील खारिज कर दी। 30 जनवरी को दूसरी अपील, सुनवाई नहीं हुई प्रथम अपील खारिज होने के अगले दिन 30 जनवरी 2026 को कौशल ने राज्य सूचना आयोग, भोपाल में दूसरी अपील दायर की। उनका कहना था कि लंबे समय तक अपील पर सुनवाई नहीं हुई। 15 जून 2026 को उन्होंने मामले की अति आवश्यक सुनवाई के लिए आवेदन भी दिया, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर हाई कोर्ट का रुख किया। 5 सितंबर को हाई कोर्ट में दाखिल की याचिका राज्य सूचना आयोग में अपील लंबित रहने के बाद कौशल ने 5 सितंबर 2026 को हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में रिट याचिका क्रमांक 37119/2026 दायर की। उनकी ओर से अभिभाषक जयेश गुरनानी और वर्धन जैन ने पक्ष रखा। याचिका में मुख्य मुद्दा यह था कि RTI के तहत मांगी गई जानकारी से संबंधित दूसरी अपील लंबे समय से आयोग में लंबित है और उस पर निर्णय नहीं किया गया है। कोर्ट ने आयोग को ही निर्णय लेने को कहा सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित जानकारी सार्वजनिक महत्व की है। वकील जयेश गुरनानी ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) में दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। हाई कोर्ट ने मामले में मांगी गई सूचना उपलब्ध कराने या न कराने के मुद्दे पर खुद कोई फैसला नहीं दिया। कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग को निर्देश दिया कि वह लंबित दूसरी अपील पर 45 दिनों के भीतर कानून और मामले के गुण-दोष के आधार पर निर्णय करे। कोर्ट ने निर्णय की प्रति याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया। इन निर्देशों के साथ हाई कोर्ट ने रिट याचिका का निराकरण कर दिया। कौशल बोले- फैसला नहीं हुआ तो आगे जाएंगे याचिकाकर्ता दिलीप कौशल का कहना है कि यदि तय 45 दिनों में सूचना आयोग मामले का पारदर्शी तरीके से निराकरण नहीं करता या जानकारी देने के मामले में फिर टालमटोल होती है तो वे आगे कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात भी कही है। पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर पहले भी लगाई थी याचिका मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़ा यह पहला मामला नहीं है जिसमें कौशल हाई कोर्ट पहुंचे हैं। नवंबर 2025 में भी उनकी याचिका पर हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग, इंदौर के जिला निर्वाचन अधिकारी और संबंधित मतदाता पंजीयन अधिकारियों से जवाब मांगा था। उस मामले में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया, बूथस्तरीय अधिकारियों की नियुक्ति और मतदाता सूची में दर्ज पतों से जुड़ी कथित विसंगतियों के मुद्दे उठाए गए थे। हालांकि मौजूदा मामला पुनरीक्षण प्रक्रिया को चुनौती देने का नहीं, बल्कि पुनरीक्षण से संबंधित जानकारी RTI के तहत मांगने के बाद राज्य सूचना आयोग में लंबित दूसरी अपील के समय पर निराकरण से जुड़ा है।
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हाई कोर्ट का सूचना आयोग को निर्देश:230 विधानसभा क्षेत्रों के वोटर डेटा पर 45 दिन में फैसला, बूथवार जानकारी का मामला
