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राजस्थान हाईकोर्ट ने एक पुलिसकर्मी को बिना उचित विभागीय जांच और कानूनी प्रक्रिया के नौकरी से निकालने को गलत माना है। कोर्ट ने उसे वापस सेवा में लेने का आदेश दिया है। जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने हैड कॉन्स्टेबल रमनलाल को बर्खास्तगी की अवधि का 50 प्रतिशत वेतन देने के भी निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता के वकील वरदाराम चौधरी ने कोर्ट को बताया कि रमनलाल राजस्थान पुलिस में हैड कॉन्स्टेबल था। वह कुछ समय के लिए ड्यूटी से गैरहाजिर रहा था। विभाग ने उसकी करीब 31 साल की सेवा में कुल 1400 दिन की गैरहाजिरी मानी। इसके बाद बिना उचित विभागीय कार्यवाही के उसे नौकरी से निकाल दिया। याचिका में कहा गया कि विभाग को बर्खास्तगी से पहले नियमानुसार जांच करनी चाहिए थी। कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका देना चाहिए था। विभाग ने जांच न कराने के पीछे यह तर्क दिया कि जांच कराना संभव नहीं था। हाईकोर्ट ने विभाग के इस तर्क को नहीं माना। कोर्ट ने बर्खास्तगी की कार्रवाई को सही प्रक्रिया के मुताबिक नहीं पाया। अदालत ने रमनलाल को तुरंत सेवा में बहाल करने का आदेश दिया। साथ ही बर्खास्तगी से बहाली तक की अवधि के लिए 50 प्रतिशत वेतन और अन्य लाभ देने को भी कहा।
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हाईकोर्ट ने बिना जांच बर्खास्त हैड कॉन्स्टेबल को बहाल किया:बर्खास्तगी अवधि का 50% वेतन और अन्य लाभ देने का आदेश
