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रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ऑनलाइन पढ़ाई करने को मजबूर भोपाल के 24 वर्षीय छात्र अनूप पचौरी ने हाई कोर्ट में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिएट रेगुलेशन-2021 को चुनौती दी है। कोटरा सुल्तानाबाद निवासी अनूप ने नीट-2021 में सफलता के बाद यूक्रेन की होरबाचेवस्की टेरनोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस में प्रवेश लिया था। उन्होंने 3 नवंबर 2021 को फीस जमा की। 7 नवंबर को यूक्रेन पहुंचे। एनएमसी ने 18 नवंबर 2021 को नया रेगुलेशन लागू किया।
याचिका में बताया कि नए नियम के तहत 12 महीने की इंटर्नशिप उसी विदेशी यूनिवर्सिटी में करना और वहीं से प्रैक्टिस लाइसेंस लेना जरूरी है। युद्ध के कारण यूक्रेन जाकर इंटर्नशिप करना व्यावहारिक नहीं है। छात्र ने कट-ऑफ 3 नवंबर 2021 मानकर पुराने 2002 के नियम लागू करने की मांग की। एनएमसी का कहना है कि उसकी कक्षाएं 10 दिसंबर 2021 से शुरू हुई थीं, इसलिए नया नियम लागू होगा। हाई कोर्ट ने एनएमसी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय व राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव से 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। क्या है एनएमसी का नया नियम? एनएमसी ने 18 नवंबर 2021 को नया रेगुलेशन जारी किया था। इसके तहत विदेश से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को उसी विदेशी कॉलेज से 12 महीने की इंटर्नशिप पूरी करनी होगी। साथ ही संबंधित देश से डॉक्टरी का लाइसेंस भी हासिल करना अनिवार्य है। इसके बाद ही छात्र भारत में 12 महीने की सुपरवाइज्ड इंटर्नशिप और नेशनल एग्जिट टेस्ट के लिए पात्र होंगे।
छात्र की मुख्य दलील : याचिका में दलील दी गई है कि 18 नवंबर 2021 के नोटिफिकेशन के तहत नियम लागू होने से पहले दाखिला लेने वाले छात्रों को नए रेगुलेशन से छूट का प्रावधान है। छात्र ने 3 नवंबर 2021 को फीस जमा कर दी थी, इसलिए उस पर पुराने 2002 के नियम लागू होने चाहिए।
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