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कोडरमा, बोकारो समेत पूरे झारखंड में पिछले चार दिनों से हो रही लगातार बारिश ने दुर्गा पूजा की तैयारियों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। सबसे अधिक परेशानी मूर्तिकारों को हो रही है। बारिश और धूप नहीं निकलने के कारण मां दुर्गा समेत अन्य देवी-देवताओं की मिट्टी की प्रतिमाएं सूख नहीं पा रही हैं। प्रतिमाएं तैयार होने के बावजूद उनमें अंतिम रूप देने का काम अटका हुआ है। नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है। पूजा में कम समय बचा है, लेकिन मूर्तिकारों को प्रतिमाओं की फिनिशिंग और मिट्टी सुखाने में दिक्कतें आ रही हैं। तेज बारिश और उमस से प्रतिमाओं को बचाना मुश्किल हो रहा है। पंखे से मूर्ति सुखाने को हुए बेबस कई जगह तिरपाल के नीचे पानी टपकने से कारीगरों को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ रही है। पश्चिम बंगाल के मूर्तिकार राजू पाल, जो महावीर चौक के पास जोरिया पुल पर काम कर रहे हैं, बारिश से परेशान हैं। उन्हें प्रतिमाएं सुखाने के लिए बार-बार बाहर-अंदर करना पड़ रहा है। पंखे, हीटर और गैस की मदद लेनी पड़ रही है। तिरपाल के नीचे नमी से काम पर असर पड़ रहा है। पुआल और मिट्टी ठीक से नहीं सूख पा रही है। बारिश के कारण प्रतिमाओं के लिए मिट्टी लाने में भी दिक्कत है। अच्छी मिट्टी वाले स्थानों तक ट्रैक्टर पहुंचाना कठिन है, जिससे समय और खर्च बढ़ रहा है। नमी से प्रतिमाओं के ढांचे और फिनिशिंग पर भी असर पड़ा नमी से प्रतिमाओं के ढांचे और फिनिशिंग पर भी असर पड़ रहा है। मूर्तिकारों को सामग्री बचाने के लिए अतिरिक्त तिरपाल, प्लास्टिक शीट व पंखे लगाने पड़ रहे हैं। वर्कशॉप में पानी भरने के डर से मोटर लगाकर पानी निकाला जा रहा है। वहीं खराब सामग्री को दोबारा बनाने में ज्यादा समय और लागत लग रही है। चार दिन से बारिश, नहीं सूख रहीं दुर्गा प्रतिमाएं इधर, कोडरमा के झुमरी तिलैया के मड़ुआटांड़ में बंगाल से आए मूर्तिकार सुदीप पाल समेत अन्य कलाकार प्रतिमाओं को सुखाने के लिए पंखे और हाईमास्ट लाइट का सहारा ले रहे हैं, लेकिन लगातार नमी के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहा है। पूजा शुरू होने में अब महज 15 से 20 दिन का समय बचा है। ऐसे में समय पर प्रतिमाओं को तैयार कर उसे पूजा समितियों को सौंपना मूर्तिकारों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। 10 दिन का काम अब 15-17 दिन में होगा पूरा मूर्तिकार सुदीप पाल ने बताया कि कई प्रतिमाओं का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। अब केवल अंतिम रूप देने, रंग-रोगन और सजावट का काम बाकी है। लेकिन प्रतिमाओं में इस्तेमाल की गई मिट्टी पूरी तरह सूख नहीं पा रही है। धूप नहीं निकलने से प्रतिमाओं को पर्याप्त तापमान नहीं मिल रहा है, जिससे काम की गति धीमी हो गई है। मूर्तिकार सोमू घोष ने बताया कि सामान्य मौसम में जिस काम को करीब 10 दिनों में पूरा कर लिया जाता है, उसमें लगातार बारिश के कारण अब पांच से सात दिन अतिरिक्त लग रहे हैं। इसका सीधा असर उनके काम और आमदनी पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि दूसरे स्थानों पर भी प्रतिमा बनाने का काम लिया गया था, लेकिन यहां काम पूरा नहीं होने के कारण उन जगहों की प्रतिमाएं तैयार करने की जिम्मेदारी दूसरे कारीगरों को देनी पड़ रही है। इससे उन्हें करीब 20 हजार रुपए का आर्थिक नुकसान हो चुका है। मूर्तिकारों के सामने एक ओर समय पर प्रतिमा तैयार करने का दबाव है, तो दूसरी ओर बारिश के कारण बढ़ता खर्च और काम का नुकसान भी चिंता का विषय बना हुआ है। पंखे और हाईमास्ट से सुखाने की कोशिश बारिश से बचाने के लिए मूर्तिकार प्रतिमाओं को अस्थायी शेड में रखकर सुखाने की कोशिश कर रहे हैं। कहीं पंखे चलाए जा रहे हैं, तो कहीं हाईमास्ट लाइट की रोशनी और गर्मी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बावजूद वातावरण में अधिक नमी होने के कारण प्रतिमाएं अपेक्षित रूप से नहीं सूख पा रही हैं। मूर्तिकारों का कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों में धूप निकलती है तो काम की रफ्तार बढ़ाई जा सकती है। इधर, मौसम विभाग के अनुसार मौसम साफ होने में अभी दो से तीन दिन और लग सकते हैं। ऐसे में मूर्तिकारों की नजर अब मौसम खुलने पर टिकी है। लगातार बारिश के बीच पूजा समितियों को भी प्रतिमाओं की समय पर डिलीवरी को लेकर चिंता बढ़ने लगी है।
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लगातार बारिश से दुर्गा पूजा की तैयारी धीमी:मूर्तिकारों को प्रतिमा की फिनिशिंग और मिट्टी सुखाने में आ रही दिक्कत, लागत बढ़ने की आशंका
