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जोधपुर-फलोदी में 12 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य:हर ग्राम पंचायत में तैयार हो रही 5 हजार सीड्स बॉल, स्थानीय प्रजातियों का इस्तेमाल




मिशन हरियालो राजस्थान के तहत जोधपुर और फलोदी जिले में बड़े स्तर पर हरित क्षेत्र बढ़ाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। अभियान के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में 5,000 सीड्स बॉल तैयार की गई हैं। इनमें स्थानीय प्रजातियों नीम, खेजड़ी और कुमट के बीज, मिट्टी और गोबर की खाद से तैयार किए गए हैं। अच्छी बारिश होने पर इन्हें चारागाह, गोचर, सरकारी और बंजर भूमि पर ड्रॉप किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक पौधे विकसित हो सकें और हरियाली बढ़े। मुख्य कार्यकारी अधिकारी(सीईओ) आशीष कुमार मिश्रा ने बताया कि वन संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से सीड्स बॉल तकनीक अपनाई गई है। यह कम लागत वाली और प्रभावी पद्धति है, जिसके माध्यम से स्थानीय प्रजातियों के पौधों का प्राकृतिक रूप से विकास किया जा सकेगा। मिशन हरियालो राजस्थान के तहत वर्ष 2026-27 के मानसून को देखते हुए प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए 5 हजार सीड्स बॉल का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सीड्स बॉल को चिन्हित स्थलों पर किया जाएगा ड्रॉप उन्होंने बताया कि 23 और 24 जून को सभी तकनीकी अभियंताओं एवं मनरेगा अभियंताओं को सीड्स बॉल निर्माण और उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया था। पंचायत समितियों के विकास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पहली अच्छी बारिश के साथ ही सीड्स बॉल को चिन्हित स्थलों पर ड्रॉप कराया जाए। यदि 5 हजार सीड्स बॉल में से करीब 2 प्रतिशत भी सफलतापूर्वक पौधों में विकसित हो जाते हैं, तो यह अभियान के लिए बड़ी उपलब्धि होगी और हरित क्षेत्र बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। वीबी-जी राम जी योजना के तहत महिला श्रमिकों ने सीड बॉल तैयार की हैं। पंचायती राज और शिक्षा विभाग को बड़ी जिम्मेदारी उन्होंने बताया कि जोधपुर और फलोदी जिले में करीब 12 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान के प्रथम चरण में ग्राम पंचायत स्तर पर पौधारोपण स्थलों का चयन कर गड्ढे तैयार करा दिए गए हैं। अच्छी बारिश होते ही व्यापक स्तर पर पौधारोपण शुरू किया जाएगा। जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने विभिन्न विभागों को लेकर लक्ष्य आवंटित किए हैं, जिनमें पंचायती राज विभाग और शिक्षा विभाग को सबसे ज्यादा जिम्मेदारी सौंपी गई है। अभियान को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि इन सीड बॉल्स का उपयोग आगामी मानसून के दौरान बंजर एवं खाली भूमि पर किया जाएगा। इससे वनीकरण को बढ़ावा मिलेगा, रेगिस्तानी क्षेत्रों में मृदा अपरदन को रोकने तथा जैव विविधता के संरक्षण में सहायता मिलेगी। ग्रामीण महिलाओं द्वारा किए जा रहे इस कार्य की सराहना भी की जा रही है। नालों की सफाई का के दिए निर्देश सीईओ ने बताया कि मानसून सीजन शुरू हो चुका है और ग्रामीण क्षेत्रों में एक-दो दौर की बारिश भी हो चुकी है। इसके साथ ही सभी विकास अधिकारियों (BDO) को नालों और जल निकासी व्यवस्था की सफाई के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि वर्षा जल का बेहतर प्रबंधन हो सके।



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