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किताबों से जानिए, आखिर क्यों स्वीकारना जरूरी है कि कुछ चीजें हमारे हाथ में नहीं हैं? अनिश्चितता को स्वीकार करना सीखें
जिंदगी में डर, चिंता और असफलता जैसी भावनाएं आती हैं और उनसे हमेशा भागना संभव नहीं है। हर चीज को अपने हिसाब से नियंत्रित करने की कोशिश करने के बजाय यह स्वीकार करें कि कुछ चीजें हमारे हाथ में नहीं हैं। अनिश्चितता को स्वीकार करेंगे, तो ध्यान उन चीजों पर लगा पाएंगे। (द एंटीडोट -ओलिवर बर्कमैन) हर व्यक्ति के लिए खुशी का मतलब अलग है
घर को व्यवस्थित रखना, समय पर सोना, किसी दोस्त से बात करना, अपनी पसंद का काम करना या लंबे समय से टाले जा रहे काम को पूरा करना मन को बेहतर महसूस कराता है। हर व्यक्ति के लिए खुशी का मतलब अलग है। इसलिए अपनी जरूरतों और पसंद को समझकर छोटे बदलाव करते रहें। (द हैप्पीनेस प्रोजेक्ट -ग्रेचेन रुबिन) जिंदगी में अच्छी चीजों को पहचानना शुरू करें
जब हम लगातार केवल उन चीजों के बारे में सोचते हैं, जो हमारे पास नहीं हैं, तो हमारे पास मौजूद अच्छी चीजें भी नजर नहीं आतीं। जरूरी है ऐसी चीजों को पहचानना जिनके लिए हम आभारी हैं। दूसरों की मदद करना और अपने रिश्तों के लिए समय निकालना, मन को बेहतर महसूस कराता है। (द हाउ ऑफ हैप्पीनेस -सोन्या ल्यूबोमिर्स्की) अपने विचारों से थोड़ी दूरी बनाना क्यों जरूरी
हमारे मन में चलने वाली लगातार बातचीत कई बार परेशानी बढ़ाती है। इससे समस्या का समाधान निकलने के बजाय तनाव बढ़ता है। अपने विचारों से थोड़ी दूरी बनाना मददगार होता है। खुद से वैसे बात करें जैसे किसी करीबी दोस्त से करते हैं। शांत रहें और समस्या को नए नजरिए से देखें। (चैटर -ईथन क्रॉस)
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सेल्फ हेल्प किताबों से:अपनी जरूरतों को समझें और छोटे बदलाव करते रहें
