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चंडीगढ़ में ऐप आधारित बाइक टैक्सी सेवाएं बंद होने से आर्थिक संकट का सामना कर रहे बाइक चालकों ने अपनी बाइक की चाबियां एकत्रित कर प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाने का फैसला किया। चालकों का कहना है कि शहर में चारों ऐप आधारित बाइक टैक्सी सेवाएं बंद होने के कारण उनका काम पूरी तरह ठप हो गया है। जब बाइक से कमाई का रास्ता ही बंद हो गया है तो वे बाइक की किश्तें कैसे भरेंगे और परिवार का खर्च कैसे चलाएंगे। ऐप बेस्ड वर्कर्स यूनियन के प्रतिनिधियों ने कहा कि शहर में बड़ी संख्या में चालक बाइक की किश्तें भर रहे हैं और इसी काम से अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। बाइक टैक्सी सेवाएं बंद होने के बाद उनकी आमदनी पूरी तरह बंद हो गई है। दूसरी ओर घर के खर्च और बाइक की किश्तें लगातार जारी हैं। ऐसे में चालकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कमाई बंद तो बाइक की किश्त कौन भरेगा चालकों ने कहा कि उन्होंने बाइक इस उम्मीद में खरीदी थी कि इससे काम करके वे अपनी किश्तें भरेंगे और परिवार का खर्च चलाएंगे। अब जब बाइक टैक्सी सेवा ही बंद कर दी गई है तो उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाइक की किश्त कौन भरेगा। चालकों ने प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और उन्हें बाइक टैक्सी चलाकर काम करने का रास्ता उपलब्ध कराने की मांग की। यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि वे प्रशासन के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि अपनी रोजी-रोटी बचाने के लिए अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाना चाहते हैं। प्रशासन को चाबियां सौंपने का फैसला यूनियन ने कहा कि मजबूरी में चालकों ने अपनी बाइक की चाबियां एकत्रित कर प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि जब बाइक चलाने से कमाई नहीं हो रही है तो वे इन बाइक का क्या करें। चाबियां प्रशासन को सौंपकर वे अधिकारियों को अपनी आर्थिक स्थिति और परेशानियों से अवगत कराना चाहते हैं। गुरप्रीत बोले- 1991 से बाइक टैक्सी चला रहा हूं बाइक चालक गुरप्रीत ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वह 1991 से बाइक टैक्सी चला रहा है। करीब दो साल पहले उसके पिता की मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई। उसने बताया कि उसके तीन बच्चे हैं और परिवार की जिम्मेदारी उसी पर है। गुरप्रीत ने कहा कि उसका 10 हजार रुपए का चालान किया गया। उसने पुलिस कर्मचारियों से अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि उसके पास पैसे नहीं हैं। उसने कहा कि वह पैसे कहां से देगा। उसने भावुक होकर कहा कि अगर वह काम करते हुए शहीद हो जाता तो कम से कम यह कह सकता था कि वह काम करते हुए शहीद हुआ, लेकिन अब काम ही बंद हो गया है तो परिवार कैसे चलेगा। बोले- टैक्स देने को तैयार, हमें काम करने दें बाइक चालकों ने कहा कि वे टैक्स देने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन बाइक टैक्सी चालकों से भी टैक्स लेना चाहता है तो वे टैक्स देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि कैब चालकों से भी टैक्स लिया जाए, लेकिन बाइक टैक्सी चालकों को काम करने से पूरी तरह रोकने का रास्ता नहीं अपनाया जाना चाहिए। चालकों ने प्रशासन से मांग की कि उनकी समस्या का समाधान निकाला जाए और उन्हें नियमों के तहत काम करने का अवसर दिया जाए। उनका कहना है कि वे किसी तरह की परेशानी पैदा नहीं करना चाहते, बल्कि अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए काम करना चाहते हैं। प्रशासन के खिलाफ लगाए नारे बाइक टैक्सी चालकों ने आरोप लगाया कि चंडीगढ़ प्रशासन ने उनके चालान काटने और बाइक टैक्सी सेवाएं बंद करने के आदेश दिए हैं, लेकिन उनकी रोजी-रोटी की चिंता नहीं की जा रही। इस दौरान चालकों ने चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। चालकों ने कहा कि वे लगातार अपनी समस्या प्रशासन के सामने रख रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें काम करने का कोई रास्ता नहीं मिला है। यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि बाइक टैक्सी चलाने वाले अधिकांश लोग अपनी बाइक की किश्तें भरते हैं और परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए इसी काम पर निर्भर हैं। सेवाएं बंद होने के बाद उनके सामने रोजमर्रा का खर्च चलाने के साथ-साथ बाइक की किश्तें भरने की भी चुनौती खड़ी हो गई है।
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चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ बाइक टैक्सी चालकों का हल्ला बोल:बोले-बाइक की चाबियां ले लो, कहां से भरें 10 हजार का चालान; टैक्स देने को तैयार
