मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए 1 अक्टूबर 2026 से नई शर्त लागू हो रही है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में आयुष्मान योजना से संबद्ध अस्पतालों के लिए NABH (नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल एंड हेल्थ केयर
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मरीजों पर क्या असर होगा?
NABH की निर्धारित शर्त पूरी नहीं करने वाले अस्पतालों की आयुष्मान संबद्धता समाप्त होने पर वहां योजना के तहत कैशलेस इलाज नहीं मिल सकेगा। मरीजों को दूसरे संबद्ध अस्पतालों में जाना पड़ सकता है। इससे NABH मान्यता वाले अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ सकता है और इलाज के लिए इंतजार भी बढ़ सकता है। हालांकि, इससे मरीज का आयुष्मान कार्ड या सालाना 5 लाख रुपए तक का मूल कवरेज खत्म नहीं होगा। बदलाव अस्पताल की योजना में संबद्धता और संबंधित पैकेज की पात्रता से जुड़ा है।

मेडिसिन पैकेज में फुल NABH की शर्त नई व्यवस्था में मेडिसिन पैकेज को लेकर शर्त ज्यादा सख्त है। इन चार शहरों में मेडिसिन पैकेज के तहत इलाज जारी रखने के लिए अस्पताल के पास फाइनल यानी फुल NABH प्रमाणपत्र होना जरूरी होगा। जिन अस्पतालों के पास फिलहाल NABH का एंट्री-लेवल सर्टिफिकेट है, उन्हें मौजूदा प्रमाणपत्र की वैधता तक मेडिसिन पैकेज के तहत इलाज की अनुमति रहेगी। सर्टिफिकेट की अवधि खत्म होने के बाद मेडिसिन पैकेज के लिए फुल NABH जरूरी होगा। अन्य आयुष्मान पैकेज के लिए कम से कम एंट्री-लेवल NABH की शर्त लागू होगी। यानी केवल आयुष्मान योजना से संबद्ध होना पर्याप्त नहीं होगा।
निजी अस्पतालों ने विरोध जताया यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन (UPHDA) ने NABH की अनिवार्यता और आयुष्मान भुगतान में देरी को लेकर विरोध जताया है। UPHDA के उपाध्यक्ष डॉ. धन्यजय मिश्रा के मुताबिक, निजी अस्पतालों का आयुष्मान योजना का बकाया भुगतान तत्काल किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि 5-6 महीने से भुगतान नहीं मिलने के कारण दवा विक्रेताओं और स्टाफ का भुगतान करने में परेशानी हो रही है। UPHDA के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विशाल सिंह बघेल ने NABH की बाध्यता खत्म करने की मांग की है। उनका कहना है कि छोटे और मध्यम अस्पतालों के लिए NABH प्रमाणन का खर्च वहन करना मुश्किल है। संगठन ने मांगें नहीं माने जाने पर 8 अक्टूबर 2026 से पूरे मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के बहिष्कार की चेतावनी दी है।

प्राइवेट अस्पताल के स्टाफ ने आयुष्मान योजना के दफ्तर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।
पहले 126 अस्पतालों पर कार्रवाई NABH से जुड़ी शर्तों को लेकर अप्रैल 2026 में भी कार्रवाई की गई थी। उस समय भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के 126 निजी अस्पतालों की आयुष्मान संबद्धता खत्म किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इनमें भोपाल के 51, इंदौर के 30, ग्वालियर के 33 और जबलपुर के 12 अस्पताल बताए गए थे। इससे साफ है कि NABH प्रमाणन अब आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों की संबद्धता से सीधे जुड़ गया है।
NABH क्यों जरूरी किया गया? NABH प्रमाणन अस्पतालों में गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मानकों की जांच के बाद दिया जाता है। इसमें मरीजों की सुरक्षा, साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, नर्सिंग स्टाफ, इमरजेंसी सेवाओं, रिकॉर्ड और सर्जरी की प्रक्रियाओं समेत कई मानकों को देखा जाता है। सरकार का तर्क है कि NABH व्यवस्था से अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा बेहतर होगी।
फुल NABH अस्पतालों को सीधे इंपैनलमेंट जिन अस्पतालों के पास पहले से फुल NABH प्रमाणपत्र है, उन्हें आवेदन करने पर ‘डीम्ड इंपैनलमेंट’ का लाभ मिलेगा। ऐसे अस्पतालों को अलग से निरीक्षण की जरूरत नहीं होगी और वे सीधे योजना से जुड़ सकेंगे। अन्य अस्पतालों को पहले एंट्री-लेवल NABH लेना होगा और निर्धारित अवधि में फुल NABH हासिल करना होगा।

गुणवत्ता के आधार पर भुगतान आयुष्मान योजना में अस्पतालों को गुणवत्ता के आधार पर अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान भी किया गया है। फुल NABH अस्पतालों को क्लेम राशि का 115% और एंट्री-लेवल NABH अस्पतालों को 10% अतिरिक्त भुगतान दिया जाएगा। मरीजों से मिलने वाले फीडबैक के जरिए भी अस्पतालों की सेवाओं की निगरानी की जाएगी। मोबाइल ऐप के माध्यम से मरीज इलाज के बाद अपना फीडबैक दे सकेंगे।
सिर्फ चार शहरों में लागू होगा बदलाव यह बदलाव पूरे देश में आयुष्मान योजना के मूल नियम में बदलाव नहीं है। मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के अस्पतालों की संबद्धता की शर्तों में यह बदलाव किया गया है। स्टेट एग्जीक्यूटिव कमेटी के निर्णय के आधार पर ये बदलाव किया गया है। देशभर में 30 जून 2026 तक 37,413 सरकारी और निजी अस्पताल आयुष्मान योजना नेटवर्क में शामिल थे।

आयुष्मान CEO बोले- मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा आयुष्मान भारत मध्यप्रदेश के CEO अरविंद शाह ने कहा कि अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है। नियमों का पालन कराया जा रहा है, ताकि मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज मिल सके। उन्होंने कहा कि NABH सर्टिफिकेट जमा करने के लिए आगे कोई एक्सटेंशन देना है या नहीं, इसका फैसला स्टेट एग्जीक्यूटिव कमेटी करेगी। फिलहाल इस संबंध में कोई नया निर्देश नहीं मिला है। ऐसे में पुराने आदेश के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी।
