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Adhir Ranjan Chaudhary Invites Mamata Banerjee To Rejoin Congress In Bengal


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मुर्शिदाबाद5 मिनट पहले

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कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने गुरुवार को ममता बनर्जी को दोबारा कांग्रेस में शामिल होने का न्योता दिया। मुर्शिदाबाद में उन्होंने ममता से कहा कि उन्हें बचे हुए TMC विधायकों और सांसदों के साथ कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए।

चौधरी ने कहा कि कांग्रेस, बंगाल में ममता बनर्जी का नेतृत्व स्वीकार करने और उनके साथ काम करने को तैयार है। उन्होंने कांग्रेस हाईकमान से भी इस दिशा में कदम उठाने की अपील की।

अधीर रंजन ने ममता बनर्जी से 6 अक्टूबर के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव जैसी पहल करते हुए रेजीनगर में भी कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने को कहा।

चौधरी ने बताया कि TMC के विधानसभा और संसदीय दलों में अलग-अलग बगावत हो चुकी है। इसलिए अब पार्टी के लिए अलग संगठन बनाए रखने की जरूरत नहीं है।

ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर TMC बनाई थी। 2011 में पार्टी ने लेफ्ट फ्रंट का 34 साल पुराना शासन खत्म किया था। TMC 15 साल तक सत्ता में रही। 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद BJP सरकार चला रही है।

TMC बोली- आधिकारिक प्रस्ताव आया तो सोचेंगे

अधीर ने ममता के INDIA गठबंधन में शामिल होने पर कहा, “जब उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले ब्लॉक का सहारा लिया है, तो उन्हें पार्टी में शामिल हो जाना चाहिए।”

चौधरी ने ममता बनर्जी से अपना बोझ पीछे छोड़कर कांग्रेस में आने को कहा। इसे उनके भतीजे और TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर इशारा माना गया। हालांकि, TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि पार्टी ऐसे प्रस्ताव पर तभी विचार करेगी, जब कांग्रेस नेतृत्व की ओर से औपचारिक प्रस्ताव आएगा।

रॉय ने कहा, “चौधरी ने वही कहा, जो उन्हें लगा। हमें इस पर कुछ नहीं कहना है। TMC अब एक अलग पार्टी है। अगर कांग्रेस आधिकारिक प्रस्ताव लेकर आती है, तो हम पार्टी में इस पर चर्चा करेंगे। TMC पूरी तरह INDIA गठबंधन का हिस्सा है।”

चौधरी की “बोझ” वाली टिप्पणी पर रॉय ने कहा कि अभिषेक बनर्जी के बिना पार्टी को लेकर कोई फैसला नहीं हो सकता। वह हमारे नेता और राष्ट्रीय महासचिव हैं।”

BJP बोली- TMC का राजनीतिक मकसद खत्म हो चुका

BJP ने कांग्रेस और TMC के बीच हुई इस बातचीत को लेकर कहा कि तृणमूल कांग्रेस का राजनीतिक मकसद खत्म हो चुका है। BJP के पश्चिम बंगाल प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा, “TMC का जन्म CPI(M) से लड़ने के लिए कांग्रेस से अलग होकर हुआ था। TMC इसी मुद्दे के आधार पर सत्ता में आई थी।”

उन्होंने कहा, “अब जब TMC खुद सत्ता से बाहर है, तो उसके पास कोई दूसरा उद्देश्य नहीं बचा है। वे कांग्रेस में शामिल होंगे या नहीं, यह उनका फैसला है। हम कांग्रेस, TMC और CPI(M) से लड़ने के लिए तैयार हैं।”

नंदीग्राम में कांग्रेस को समर्थन दे रहा ममता गुट

नंदीग्राम में ममता बनर्जी के गुट के उम्मीदवार ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद चुनाव मैदान से नाम वापस ले लिया था। गुट के पास उम्मीदवार नहीं बचने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया था।

यह घटनाक्रम चुनाव आयोग की ओर से प्रतिद्वंद्वी TMC गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित करने के कुछ घंटे बाद हुआ। दोनों गुटों के बीच मूल पार्टी पहचान को लेकर विवाद चल रहा है।

विधानसभा चुनाव के बाद TMC विधायकों-सांसदों में बगावत

2026 के विधानसभा चुनाव में 294 सीटों वाली विधानसभा में TMC को 80 सीटें मिली थीं। चुनाव नतीजों के कुछ ही हफ्तों बाद TMC विधायक दल में भी बंटवारा हो गया। 58 बागी विधायकों ने निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाने का समर्थन किया।

विधानसभा अध्यक्ष ने इस गुट को मान्यता दे दी। इसके बाद TMC के संसदीय दल में भी बगावत शुरू हो गई। बागी सांसदों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती दी।

वहीं, बागी सांसदों का समूह कम चर्चित NCPI के करीब चला गया है। इस गुट ने केंद्र में NDA को समर्थन दिया है। अब यह विवाद TMC की राजनीतिक पहचान, नेतृत्व और भविष्य को लेकर है।

कांग्रेस से अलग होकर बनी थी TMC

चौधरी के प्रस्ताव के पीछे TMC का राजनीतिक इतिहास भी जुड़ा है। ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर TMC बनाई थी। इसके बाद TMC ने 2011 में लेफ्ट फ्रंट का 34 साल पुराना शासन खत्म किया था।

TMC 15 साल तक सत्ता में रही। 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद BJP सरकार चला रही है।



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