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मोहाली अदालत ने 13 साल पुराने मामले में नयागांव पुलिस स्टेशन के तत्कालीन अधिकारियों और डॉक्टरों के खिलाफ दायर क्रिमिनल रिवीजन पटीशन को खारिज कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को पूरी तरह से सही ठहराया है, जिसमें पुलिस अधिकारियों और डॉक्टरों को समन (समन जारी) करने से इनकार करते हुए शिकायत खारिज कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस पर कस्टडी में एनआरआई से टार्चर व जबड़ा तोड़ने के आरोप थे। शिकायतकर्ता ने इन मुख्य आरोपों को सिद्ध करने के लिए अपने मुख्य गवाहों (संदीप संधू और पवन संधू) को कोर्ट में पेश नहीं किया। इसके अलावा, जिस मामले के तहत अमित सैनी को गिरफ्तार किया गया था, उसमें वे खुद दोषी करार दिए जा चुके थे।
अब 8 पाइंट में जानिए सारे मामले को :- 1. एनआरआई शादी के लिए आया था शिकायतकर्ता अमित कुमार सैनी ऑस्ट्रेलिया के रहने वाले थे और जनवरी 2013 में अपनी शादी के सिलसिले में भारत आए हुए थे। उनके जानकार ट्रांसपोर्टर संदीप संधू और अमनदीप संधू का आरोप था कि नयागांव पुलिस स्टेशन के कुछ कर्मचारी उनसे रिश्वत मांग रहे थे। 2. जबरन हिरासत में लिया, मोबाइल छीनें 9 जनवरी 2013 को जब संदीप संधू को पुलिस ने हिरासत में लिया, तो अमित सैनी ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया। पुलिस कार्रवाई के विरोध में अमित सैनी ने 10 जनवरी 2013 की सुबह 10 बजे मीडिया के सामने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने से गुस्साए नयागांव पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों और अधिकारियों ने उन्हें और संदीप के पिता (पवन संधू) को जबरन हिरासत में ले लिया। उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए और उन्हें अपने परिवार से संपर्क तक नहीं करने दिया गया। 3.कपड़े उतरवाकर बेरहमी से पीटा शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि नयागांव के तत्कालीन एसएचओ समर विनीत के कमरे में ले जाकर डीएसपी (सिटी-1) राजिंदर सिंह सोहल ने उनकी जैकेट फाड़ दी, गाली-गलौज की और मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद तत्कालीन एसपी (डी) बलविंदर सिंह वहां पहुंचे और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से नाराज होकर पुलिसकर्मियों को आदेश दिया कि अमित सैनी के कपड़े उतरवाकर बेरहमी से पीटा जाए। 4. 50 लाख रिश्वत मांगने का आरोप शिकायतकर्ता का आरोप था कि कस्टडी में उन पर घूंसे और लाठियां बरसाई गईं। इस दौरान कस्टडी से छोड़ने के एवज में उनसे 50 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की गई, जिसे देने से उन्होंने इनकार कर दिया। 5. जेल में एक्सरे नहीं, केवल दवाई दी कस्टडी के दौरान मुंह और चेहरे पर जोरदार घूंसे और वार किए जाने के कारण अमित सैनी के मुंह से खून बहने लगा और उनके बाएं जबड़े में असहनीय दर्द होने लगा। अमित सैनी का दावा था कि पिटाई के कारण उनका बायां जबड़ा टूट गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कस्टडी और बाद में पटियाला जेल में रहने के दौरान बार-बार गुहार लगाने के बावजूद पुलिस और जेल प्रशासन ने उनके जबड़े का एक्स-रे नहीं करवाया और केवल दर्द निवारक दवाइयां दीं।
जमानत पर रिहा होने के बाद उन्होंने सितंबर 2014 में GMSH-16 और PGI चंडीगढ़ में एक्स-रे करवाकर अपना इलाज शुरू कराया।
6. आरोपों के आधार पर समन नहीं शिकायतकर्ता ने सिविल अस्पताल (फेज-6, मोहाली) के मेडिकल अधिकारियों (डॉ. जसवंत सिंह और डॉ. लवलीन कौर) पर आरोप लगाया कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ सांठगांठ की। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ‘पेप्सी फूड्स लिमिटेड’ और अन्य ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति या पुलिस अधिकारी को आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए समन करना एक गंभीर मामला है। केवल आरोपों के आधार पर समन जारी नहीं किया जा सकता
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पुलिस कस्टडी टॉर्चर मामले में मोहाली कोर्ट का फैसला:पुलिस अधिकारियों के खिलाफ क्रिमिनल रिवीजन पटीशन खारिज, 13 साल पुराना है केस
