गुरुग्राम12 घंटे पहले
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गुरुग्राम, दिल्ली और मोहाली में रेड के दौरान ईडी ने टीडीआई ग्रुप के पास से लग्जरी गाड़ियां जब्त की हैं।
हरियाणा के बहुचर्चित मानेसर जमीन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बिल्डर कंपनी ‘टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर’ और ‘टीडीआई इन्फ्राटेक’ पर अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है। ED की चंडीगढ़ जोन-1 टीम ने ग्रुप चेयरमैन रविंद्र तनेजा समेत अन्य अफसरों के दिल्ली, गुरुग्राम और मोहाली ठिकानों पर लगातार 3 दिन तक रेड मारी।
शुक्रवार देर रात तक चली इस रेड में टीम ने टीडीआई ग्रुप के ठिकानों से 8 करोड़ रुपए कीमत की लग्जरी गाड़ियां जब्त की है। इनमें रेंज रोवर, मर्सिडीज बेंज, लेक्सस ईएस सहित ₹ 8 करोड़ की लग्जरी गाड़ियां जब्त की है। इसके अलावा मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई डिजिटल और वित्तीय दस्तावेज जब्त किए हैं।
दरअसल, यह मामला गुरुग्राम के तीन क्षेत्रों मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला से जुड़ा है। साल 2005 से 2007 के बीच इन क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण चल रहा था, तब टीडीआई ग्रुप ने तीन कागजी कंपनियों (इंडो एशियन कंस्ट्रक्शन, एनसीआर प्रॉपर्टीज और दिव्य ज्योति एंटरप्राइजेज) कर किसानों से 33 एकड़ जमीन सस्ते में खरीदी ली।
इसके बाद वही जमीन अतुल बंसल ग्रुप को भारी मुनाफे में बेच दी गई। साल 2015 में सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की, जिसके आधार पर ईडी ने जांच शुरू की थी।

ईडी टीम की ओर से जब्त की गई 8 करोड़ रुपए की लग्जरी गाड़ियां।
8 करोड़ रुपए की लग्जरी गाड़ियां जब्त
ED की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, टीडीआई ग्रुप के प्रमोटरों के परिसरों से जब्त की गई लग्जरी गाड़ियों में अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के बेहद महंगे मॉडल शामिल हैं।
- रेंज रोवर: इसकी अनुमानित कीमत लगभग 4.50 करोड़ रुपए है।
- मर्सिडीज-बेंज एस-क्लास: यह लग्जरी सेडान लगभग 1.80 करोड़ रुपए मूल्य की है।
- मर्सिडीज-बेंज ई-क्लास: इसकी कीमत करीब 90 लाख रुपए आंकी गई है।
- लेक्सस ईएस: टीडीआई ग्रुप के ठिकाने से 72 लाख रुपए की यह प्रीमियम कार भी ED ने अपने कब्जे में ली है।

लग्जरी गाड़ियों की फोटो के साथ कार्रवाई की दी गई रिपोर्ट।
ईडी जांच के अनुसार- ₹3.12 करोड़ का शुद्ध अवैध मुनाफा
ईडी की मनी ट्रेल जांच के अनुसार, टीडीआई ग्रुप ने इन 33 एकड़ की खरीद और तुरंत बाद एबीडब्ल्यू ग्रुप को री-सेल करने के बीच में घुमाकर ₹3.12 करोड़ का सीधा अवैध नेट प्रॉफिट कमाया था। हालांकि सीबीआई और ईडी ने अपने डॉक्यूमेंट्स में इसे 1500 करोड़ से ज्यादा का घोटाला बताया था।
ईडी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, तीन दिनों तक चली इस रेड में सिर्फ लग्जरी गाड़ियां ही नहीं, बल्कि टीडीआई ग्रुप द्वारा किए जा रहे कई अन्य रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में भी भारी वित्तीय गड़बड़ियों और इलीगल गतिविधियों के पुख्ता रिकॉर्ड हाथ लगे हैं। टीम ने मौके से दर्जनों महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट फाइलें, डिजिटल डिवाइसेज, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और मुख्य सर्वर को जब्त कर लिया है।
अधिकारियों का कहना है कि इन जब्त किए गए दस्तावेजों और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड्स की गहनता से स्क्रूटनी की जा रही है। उम्मीद जताई है कि इस घोटाले से जुड़े अन्य बड़े चेहरों और मनी ट्रेल का खुलासा होने की पूरी उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के साथ टीडीआई के चेयरपर्सन रविंद्र तनेजा। फाइल फोटो
जमीन घोटाले में TDI ग्रुप पर आरोप…
- टीडीआई ग्रुप ने बिचौलिए की भूमिका निभाई: केंद्रीय जांच एजेंसी के खुलासे के मुताबिक, यह पूरा मामला वर्ष 2005 से 2007 के बीच का है, जब गुरुग्राम और मानेसर के नौरंगपुर व लखनौला गांवों में सरकार की ओर से करीब 400 एकड़ जमीन को अधिग्रहण करने के लिए अधिसूचित (नोटीफाइड) किया गया था। इस बड़े घोटाले में टीडीआई ग्रुप ने एक बिचौलिए की भूमिका निभाई थी।
- 3 डमी कंपनियां बनाकर सस्ते दामों में जमीन खरीदी: टीडीआई ग्रुप ने चाल चलते हुए 3 डमी कंपनियां बनाईं। इन डमी कंपनियों के जरिए मानेसर और आसपास के किसानों को सरकारी अधिग्रहण का डर दिखाया गया कि उनकी जमीन बेहद सस्ते दामों पर सरकार ले लेगी। इस डर का फायदा उठाकर टीडीआई ने किसानों से लगभग 33 एकड़ जमीन बेहद कम और औने-पौने दामों पर खरीद ली।
- जमीन खरीदते ही अधिग्रहण प्रक्रिया रद्द हुई: बाद में जब सरकार और संबंधित विभागों द्वारा इस 400 एकड़ अधिसूचित जमीन की अधिग्रहण प्रक्रिया को अचानक रद्द कर दिया गया, तो टीडीआई ग्रुप ने कम रेट पर हड़पी गई इसी 33 एकड़ जमीन को अतुल बंसल ग्रुप (एबीवीडब्ल्यू ग्रुप) को कई गुना ऊंचे दामों पर बेचकर भारी-भरकम मुनाफा कमाया।
- 2015 में सीबीआई ने दर्ज किया था केस : साल 2015 में सीबीआई ने हरियाणा के इस हाई-प्रोफाइल मानेसर लैंड स्कैम में टीडीआई ग्रुप, उसके प्रमोटरों और अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का आपराधिक मुकदमा दर्ज किया था। सीबीआई की इसी एफआईआर को आधार बनाते हुए ED ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत अपनी जांच शुरू की थी।
- रेड से बढ़ सकती हैं कंपनी पदाधिकारियों की मुश्किलें : ED के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि किसानों को डराकर और सरकारी नीतियों का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपए का जो अवैध धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) कमाया गया, उसे ही इन लग्जरी गाड़ियों और अन्य संपत्तियों में निवेश किया गया था। इस 3 दिवसीय रेड के बाद टीडीआई ग्रुप के चेयरमैन रविंदर तनेजा और अन्य अधिकारियों की मुश्किलें आने वाले दिनों में और अधिक बढ़ने वाली हैं।
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