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Bermuda Triangle Mystery; Canada Air Ambulance Missing Case Explained


2-3 अक्टूबर की रात अटलांटिक महासागर के बरमूडा द्वीप से एक कनाडाई एंबुलेंस जेट ने उड़ान भरी। इसमें 6 लोग सवार थे। 1 घंटा 44 मिनट बाद इसे अमेरिका के बोस्टन एयरपोर्ट पर उतरना था, लेकिन 39 मिनट पहले प्लेन लापता हो गया। पायलट ने ATC से कहा था- ‘मैं ब्लाइंड

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बरमूडा ट्रायंगल के आसपास विमानों और जहाजों के लापता होने का पुराना इतिहास है। दावा किया जाता है कि कोई रहस्यमयी ताकत जहाज और विमानों को खींच लेती है।

ये दावा कितना सही और क्या कनाडा के लापता जेट से इसका कोई कनेक्शन है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल-1: कनाडाई जेट के लापता होने की पूरी घटना क्या है? जवाब: लापता हुआ मीडियम साइज वाला ‘गल्फस्ट्रीम G100’ जेट कनाडा की एयर एंबुलेंस कंपनी लैटीट्यूड का था। स्थानीय समयानुसार इसने 2-3 अक्टूबर की रात बरमूडा द्वीप के L।F। वेड एयरपोर्ट से 12:41 बजे उड़ान भरी।

इसे रात 2:25 बजे बोस्टन के लोगान एयरपोर्ट पर उतरना था। विमान में 4 कनाडाई और दो बरमूडा के लोग थे। एक मरीज, उसका एक रिश्तेदार, दो मेडिकल स्टाफ और दो पायलट।

विमान 24 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था, लेकिन करीब 1 घंटा 5 मिनट बाद तेजी से नीचे आने लगा।

करीब 2 मिनट में विमान 13 हजार फीट नीचे गिरा। 1:46 बजे पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, ATC से संपर्क किया और कहा कि उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। बोस्टन एयरपोर्ट के लोकल टीवी स्टेशन ने इस बातचीत को रिकॉर्ड किया है।

ATC ने पायलट से पूछा, ‘क्या आपने कहा कि आप बिना विजिबिलिटी के आ रहे हैं? क्या जेट किसी इमरजेंसी में है?’, लेकिन कोई जवाब नहीं आया।

ऊंचाई खोने के बाद भी जेट कुछ देर उड़ता रहा, लेकिन फिर लापता हो गया। पता चला है कि विमान बोस्टन से सिर्फ 15 मिनट दूर बचा था। उसमें कुछ इलेक्ट्रिकल दिक्कत हुई, रेडियो और रडार भी बंद हो गए।

अमेरिका और कनाडा की एविएशन एजेंसियां आगे की जांच कर रही हैं।

लैटीट्यूड एयर एंबुलेंस इस तरह के 'गल्फस्ट्रीम G100' जेट्स का इस्तेमाल करती है। पहली बार कोई विमान हादसे का शिकार हुआ है।

लैटीट्यूड एयर एंबुलेंस इस तरह के ‘गल्फस्ट्रीम G100’ जेट्स का इस्तेमाल करती है। पहली बार कोई विमान हादसे का शिकार हुआ है।

सवाल-2: क्या जेट के लापता होने का बरमूडा ट्रायंगल से कोई कनेक्शन है? जवाब: विमान भले ही बरमूडा से उड़ा, लेकिन ये कहना मुश्किल है कि हादसे का बरमूडा ट्रायंगल से कोई कनेक्शन है।

दरअसल, उत्तरी अटलांटिक महासागर में अमेरिका के फ्लोरिडा तट, ब्रिटेन के बरमूडा द्वीप और प्यूर्टो रिको द्वीप को मिलाएं, तो एक त्रिभुज बनता है। इसे ही ‘बरमूडा ट्रायंगल’ कहते हैं। इसका एरिया करीब 13 लाख वर्ग किलोमीटर है।

लापता जेट का रूट ट्रायंगल के ऊपर से होकर नहीं गुजर रहा था। जब ATC का संपर्क टूटा, तब ये बरमूडा ट्रायंगल के उत्तर में काफी दूर निकल चुका था। आखिरी लोकेशन मैसाचुसेट्स के नानटकेट द्वीप एयरपोर्ट के आसपास मिली। यानी जेट अमेरिका के तटीय इलाके में पहुंचने वाला था। यहां से बोस्टन के लोगान एयरपोर्ट की हवाई दूरी सिर्फ 146 किमी बचती है।

अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने रात करीब 1:20 बजे सर्च एंड रेस्क्यू अलर्ट जारी किया था। कुछ घंटे बाद अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने एक इलाके में कुछ मलबा देखा। कहा जा रहा है कि मलबा इसी जेट का था। हालांकि अभी लापता लोगों का पता नहीं चला है।

सवाल-3: बरमूडा ट्रायंगल से कैसे गायब होते रहे हैं शिप और प्लेन? जवाब: 1492 में अमेरिका की खोज करने वाले नाविक क्रिस्टोफर कोलंबस तीन बड़ी नौकाओं और 90 लोगों के साथ इस इलाके से गुजर रहे थे, तब उन्होंने कुछ अनोखा देखा। जहाज की लॉगबुक में दर्ज किया- समुद्र में आग की लपटें थीं और कंपास की रीडिंग भी असामान्य हो गई थी।

हालांकि बरमूडा ट्रायंगल से शिप गायब होने का पहला बड़ा मामला 31 दिसंबर 1812 का है। ‘पैट्रियट’ नाम का अमेरिकी जहाज साउथ कैरोलिना से न्यूयॉर्क के लिए निकला। इसमें तब के अमेरिकी उपराष्ट्रपति हारून बर्र की बेटी थियोडोसिया सवार थीं। पैट्रियट बरमूडा ट्रायंगल में अचानक गायब हो गया।

3 साल बाद USS एपेरवियर भी गायब हुआ। न इसका मलबा मिला और न इसमें सवार 135 लोगों में किसी की लाश।

फिर मार्च 1918 में अमेरिका का ‘USS साइक्लोप्स’ जहाज गायब होने के बाद दुनियाभर में बरमूडा ट्रायंगल की चर्चा तेज हो गई। इसमें 10 हजार टन मैंगनीज और 309 लोग सवार थे। इसके मलबे और जहाज की जानकारी 108 साल बाद भी नहीं है।

अमेरिकी जहाज ‘USS साइक्लोप्स’ की 1911 की तस्वीर।

अमेरिकी जहाज ‘USS साइक्लोप्स’ की 1911 की तस्वीर।

बरमूडा ट्रायंगल के ऊपर से गुजरने वाले विमानों और जहाजों के गायब होने के करीब 50 इंसिडेंट्स दर्ज हैं…

  • 5 दिसंबर 1945 को 5 अमेरिकी TBM Avenger बॉम्बर विमान, एक कैप्टन और 13 ट्रेनी पायलट्स के साथ रूटीन ट्रेनिंग के लिए उड़े। सभी विमान गायब हो गए। इनको खोजने के लिए 13 लोगों सहित दो मार्टिन मेरिनर विमान भेजे गए। ये दोनों भी वापस नहीं लौटे।
  • 28 दिसंबर 1948 को 39 लोगों के साथ प्यूर्टो रिको से उड़ा डगलस DC-3 विमान मियामी पहुंचने से सिर्फ 50 मील पहले गायब हो गया।
  • मई 1968 में अमेरिका की न्यूक्लियर पनडुब्बी USS स्कॉर्पियन भी लापता हो गई। असली कारण आज भी अज्ञात है।
  • 15 अक्टूबर 1976 को 590 फीट लंबा जहाज 37 क्रू मेंबर्स के साथ ब्राजील से फिलाडेल्फिया जाते समय बरमूडा में गायब हो गया। थोड़ा मलबा और एक लाइफबोट बरामद हुई।
  • 18 जून 2003 को नवविवाहित कपल फ्रैंक और रोमीना लियोन नई बोट लेकर फ्लोरिडा तट से निकले और कभी वापस नहीं आए।
  • 15 मई 2017 को 4 लोगों को प्यूर्टो रिको से फ्लोरिडा लेकर जा रहा विमान ‘Mitsubishi MU-2B-40’ रडार से गायब हो गया और फिर कभी नहीं मिला।

सवाल-4: बरमूडा में विमान, जहाज गायब होने के पीछे क्या वजह बताई जाती है? जवाब: बरमूडा ट्रायंगल के रहस्य से जुड़ी 5 प्रमुख थ्योरी और दावे किए जाते हैं…

1. नुकीले बादल ‘एयर बम’ बनाते हैं

  • ये सबसे हालिया थ्योरी है। अक्टूबर 2016 में कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के मेटियोरोलॉजिस्ट रैंडी कैरवेनी ने कहा कि यहां 20 से 55 मील चौड़े 6 कोने वाले बादल ‘एयर बम’ बनाते हैं। यानी हवा में बम ब्लास्ट जैसी ताकत पैदा करते हैं।
  • इससे करीब 273 किलोमीटर/घंटा की रफ्तार वाली हवाएं चलती हैं। ये बादल और हवाएं आपस में मिलकर जहाज या प्लेन से टकराते हैं और उन्हें खींचकर समुद्र के तल में ले जाते हैं।

2. मीथेन गैस विस्फोट थ्योरी

  • 1999 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिक डॉ. बेन क्लेनेल ने कहा कि समुद्र के नीचे दबे प्राकृतिक मीथेन हाइड्रेट गैस के चैंबर अचानक फट सकते हैं। इससे गैस एक साथ ऊपर उठती है तो पानी में झाग आ जाता है।
  • इससे पानी का घनत्व इतना कम हो जाता है कि जहाज के लिए तैरना नामुमकिन हो जाता है। ऑस्ट्रेलिया में हुए एक्सपेरिमेंट्स में ये साबित हुआ कि पानी में गैस के बुलबुले जहाज को डुबो सकते हैं।
  • अगर ज्वलनशील गैस हवा में पहुंचे तो, प्लेन का इंजन भी बंद हो सकता है।

3. मैग्नेटिक इफेक्ट की थ्योरी

  • 1950 के आसपास सबसे चर्चित थ्योरी थी कि बरमूडा ट्रायंगल पृथ्वी की कुछ जगहों में से एक है, जहां से एगोनिक लाइन गुजरती है। यहां चुंबक का नॉर्थ और पृथ्वी का नॉर्थ एक ही दिशा में होते हैं।
  • इससे अनजान नाविक या पायलट कंपास की रीडिंग गलत समझ लेते हैं और जहाज हादसे का शिकार हो जाता है। कुछ स्टडी में ये भी कहा गया कि बरमूडा द्वीप के नीचे मजबूत मैग्नेटिक फील्ड है, जो जहाजों को खींच लेती है।

4. ‘इलेक्ट्रॉनिक फॉग’ और ‘टाइम वार्प’ थ्योरी

  • 1970 में फ्लोरिडा के अनुभवी पायलट ब्रूस जेर्नोन ने कहा था कि उन्होंने एंड्रोज आइलैंड से फ्लोरिडा जाते समय एक अजीब शेप का बादल देखा, जो एक सुरंग में बदल गया। इस सुरंग में ‘इलेक्ट्रॉनिक फॉग’ था, जिससे उनकी सभी डिवाइस बंद हो गईं।
  • जब वे इस सुरंग से बाहर निकले, तो उन्होंने पाया कि उन्होंने 100 मील की दूरी सिर्फ 3 मिनट 20 सेकंड में तय कर ली थी, जिसमें सामान्यतः एक घंटे का समय लगता। उन्होंने 2016 में अपनी किताब ‘Beyond the Bermuda Triangle’ में इसके बारे में लिखा है।
पायलट ब्रूस जेर्नोन इसी 'बीचक्राफ्ट बोनांजा' नाम के एयरक्राफ्ट को उड़ा रहे थे, उनके साथ विमान में दो लोग और थे।

पायलट ब्रूस जेर्नोन इसी ‘बीचक्राफ्ट बोनांजा’ नाम के एयरक्राफ्ट को उड़ा रहे थे, उनके साथ विमान में दो लोग और थे।

5. विशालकाय भटकती लहरें

  • 2005 में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथहैम्प्टन की स्टडी में कहा गया कि बरमूडा ट्रायंगल में कई तूफान आपस में टकराकर 30 मीटर ऊंची लहरें पैदा कर सकते हैं। ये जहाजों को डुबोने के लिए काफी हैं।
  • ये भी कहा जाता है कि बरमूडा ट्रायंगल में पानी के अंदर एलियंस का एक स्पेस शिप है, जो अपनी तकनीक से गुजरते जहाजों और विमानों को निशाना बनाता है।
  • 1974 में चार्ल्स बर्लिट्ज की किताब ‘The Bermuda Triangle’ से प्रचलित हुआ कि बरमूडा ट्रायंगल के नीचे खोया हुआ पौराणिक शहर ‘अटलांटिस’ है। उस सभ्यता की उन्नत तकनीक आज भी एक्टिव है, जो गुजरने वाले विमानों को खींचती है।

सवाल-5: वैज्ञानिकों को इस इलाके के बारे में नया क्या पता चला है? जवाब: 8 मई 2026 को अमेरिका के कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस और येल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक विलियम फ्रेजर और जेफरी पार्क की एक रिसर्च छपी है। इसके मुताबिक, बरमूडा द्वीप के नीचे एक ऐसा अनोखा स्ट्रक्चर है, जो दुनिया में कहीं और नहीं देखा गया है।

दरअसल, समुद्रों के बीच कोई द्वीप या ज्वालामुखी का पहाड़ उसके नीचे मौजूद ‘मेंटल प्लम’ के ऊपर टिका होता है। ‘मेंटल प्लम’, यानी धरती के अंदर बेहद गर्म चट्टानों का गुबार। ये गुबार समुद्र की तली को ऊपर धकेलता है। हालांकि समय के साथ जमीन की टेक्टोनिक प्लेटें खिसकने से समुद्री द्वीप दोबारा नीचे की तरफ धंसने लगते हैं।

जबकि बरमूडा द्वीप 3 करोड़ साल से भी ज्यादा समय से समुद्र तल से लगभग 1600 फीट की ऊंचाई पर टिका हुआ है। बिना किसी हलचल के।

इसकी वजह जानने के लिए वैज्ञानिकों ने भूकंप की तरंगों के जरिए बरमूडा द्वीप के 20 मील नीचे की तस्वीर तैयार की। पता चला कि समुद्र की तली के नीचे 12 मील मोटी एक अजीबोगरीब चट्टान की परत है।

ये परत मेंटल प्लम नहीं, बल्कि उसके मुकाबले कहीं हल्की और कम घनत्व वाली है। नाव की तरह तैर रही इसी हल्की चट्टान पर बरमूडा द्वीप तैर रहा है।

रिसर्च में इस तरह के डायग्राम के आधार पर दिखाया गया है कि ये हल्की चट्टान ‘अंडरप्लेट’की तरह काम कर रही है और बरमूडा को ऊपर उठाए है।

रिसर्च में इस तरह के डायग्राम के आधार पर दिखाया गया है कि ये हल्की चट्टान ‘अंडरप्लेट’की तरह काम कर रही है और बरमूडा को ऊपर उठाए है।

हालांकि ये रिसर्च सिर्फ 54 वर्ग किमी के बरमूडा द्वीप के भूगर्भ से जुड़ी है। जबकि बरमूडा ट्रायंगल 13 लाख वर्ग किमी का समुद्री इलाका है। रिसर्च में भी विमानों हादसों का कोई जिक्र नहीं है।

हालांकि किसी और द्वीप के ऐसे अनोखे स्ट्रक्चर की जानकारी अब तक नहीं है, इसलिए इसे बरमूडा ट्रायंगल के रहस्यों से जोड़कर देखा जा रहा है।

सवाल-6: तो क्या बरमूडा ट्रायंगल में वाकई कोई रहस्य है, या सिर्फ सामान्य हादसे हैं? जवाब: जानकारों का एक बड़ा वर्ग बरमूडा ट्रायंगल में जहाजों के गायब होने के पीछे किसी रहस्यमयी थ्योरी से इनकार करता है। अमेरिकी संस्था ‘नेशनल ओशियनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’, यानी NOAA के मुताबिक, ‘बरमूडा ट्रायंगल में होने वाले हादसे खराब मौसम, गलत नेविगेशन और इंसानी गलतियों की वजह से होते हैं। इनके पीछे कोई सुपरनैचुरल पावर नहीं है।’

अमेरिकी रिसर्चर लॉरेंस डेविड कुस्चे अपनी किताब ‘द बरमूडा ट्रायंगल मिस्ट्री सॉल्व्ड’ में लिखते हैं, ‘ट्रायंगल पर हुए हादसों की ज्यादातर रिपोर्ट्स ज्यादातर बढ़ा-चढ़ाकर लिखी गई हैं। दुनिया के दूसरे समुद्री रास्तों के मुकाबले यहां ज्यादा हादसे नहीं हैं।’

सिंगापुर के रिसर्चर डेरिक ली ने 2021 में दुनिया भर के 85 हजार से ज्यादा विमान हादसों का एनालिसिस किया। इसमें बरमूडा ट्रायंगल में महज 56 हादसे मिले। डेरिक के मुताबिक, ‘इन हादसों में कुछ भी असामान्य या रहस्यमयी नहीं मिला।’

दुनिया में कई समुद्री इलाके हैं, बरमूडा से भी ज्यादा खतरनाक हैं। उदाहरण के लिए ड्रेक पैसेज, अर्जेंटीना। यहां अक्सर 40 फीट तक ऊंची लहरें उठती हैं। लगभग 800 जहाज तबाह हो चुके हैं और 20 हजार नाविकों की मौत हो चुकी है।

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