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चंडीगढ़ मेयर सुबह 5 बजे शहर का दौरा करें:प्रशासक कटारिया की देशभर के मेयरों को नसीहत; कहा-जनता के बीच जाने से समस्याएं चलेंगी पता




चंडीगढ़ मेयर का काम सिर्फ दफ्तर में बैठकर अधिकारियों से रिपोर्ट लेना नहीं है। उन्हें सुबह 5, 6 या 7 बजे उठकर बिना किसी अधिकारी को साथ लिए शहर की गलियों, बाजारों और पार्कों में जाना चाहिए। वहां सफाई, सड़क, नालियों और लोगों की समस्याएं खुद देखनी चाहिए। जनता के बीच जितना ज्यादा जाएंगे, उतनी ही ज्यादा समस्याएं और उनके समाधान के रास्ते मिलेंगे। यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने आज 118वें अखिल भारतीय मेयर्स काउंसिल सम्मेलन में देशभर के 19 राज्यों से आए 30 मेयरों को प्रभावी तरीके से काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि को जनता से सीधा जुड़ना होगा और जनसुनवाई को केवल औपचारिकता नहीं बनाना चाहिए। रोज शाम ऑनलाइन शिकायतों की समीक्षा करें कटारिया ने कहा कि आज लगभग हर शिकायत ऑनलाइन दर्ज हो सकती है। इसलिए मेयरों को रोज शाम अधिकारियों के साथ बैठकर शिकायतों की समीक्षा करनी चाहिए। पानी, बिजली, सफाई, पार्क और दूसरी सुविधाओं से जुड़ी कितनी शिकायतें आईं और कितनी का समाधान हुआ, इसकी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी इलाके की स्ट्रीट लाइट चार महीने तक खराब रहती है तो यह व्यवस्था की कमजोरी है। शिकायत आने के बाद उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। बड़े आदमी से ज्यादा आम आदमी को समय दें प्रशासक ने कहा कि किसी बड़े व्यक्ति के आने पर चाय-पानी कराने में समय लगाने के बजाय आम आदमी की समस्या दो मिनट सुनना ज्यादा जरूरी है। ज्यादा से ज्यादा लोगों की समस्याएं सुनने और उनके समाधान का रास्ता निकालने से जनता का भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर करीब 80 प्रतिशत समस्याएं नगर पालिका और पंचायत से जुड़ी होती हैं। स्थानीय निकाय इन समस्याओं का समाधान कर दें तो लोगों की संतुष्टि काफी बढ़ सकती है। कर्मचारी नौकर नहीं, सहयोगी हैं कटारिया ने मेयरों से कहा कि कर्मचारियों को अपना नौकर नहीं, बल्कि सहयोगी समझें। सम्मान के साथ काम लेने पर कर्मचारी बेहतर तरीके से जिम्मेदारी निभाएंगे। उन्होंने कहा कि हर गलती पर सजा देना जरूरी नहीं है। कर्मचारी को गलती का एहसास कराकर सुधार का मौका देना चाहिए। साथ ही जनप्रतिनिधियों को नियमों के खिलाफ काम करने से साफ इनकार कर देना चाहिए, चाहे उन पर कितना भी दबाव क्यों न हो। गरीब पर जुर्माना लगाते समय संवेदनशील रहें सड़क पर कूड़ा फेंकने वालों पर कार्रवाई की जरूरत बताते हुए कटारिया ने कहा कि गरीब व्यक्ति के लिए 50 रुपए का जुर्माना भी बड़ी रकम हो सकता है। इसलिए जुर्माना तय करते समय उसकी आर्थिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जुर्माने का मकसद सिर्फ पैसा वसूलना नहीं, बल्कि लोगों की आदत बदलना होना चाहिए। चंडीगढ़ की अच्छाइयों के साथ कमियां भी बताएं कटारिया ने देशभर से आए मेयरों से कहा कि वे चंडीगढ़ के अच्छे प्रोजेक्ट और व्यवस्थाएं देखकर जाएं, लेकिन शहर की कमियां भी बताएं। उन्होंने कहा कि दूसरे शहरों के अच्छे कामों से सीखने के साथ उनकी कमियों पर भी चर्चा होनी चाहिए। इससे सभी शहरों को सुधार का मौका मिलेगा। पर्यावरण पर कटारिया ने कहा कि केवल पौधारोपण करने से जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। लगाए गए पौधों की सुरक्षा और नियमित निगरानी भी जरूरी है। सही मौसम में पौधारोपण कर लोगों को इससे जोड़ना चाहिए, ताकि ज्यादा पौधे बच सकें। उन्होंने कहा कि पुराने पेड़ धरती का खजाना हैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए इनकी सुरक्षा जरूरी है। जरूरत से ज्यादा भर्ती से निकाय पर बढ़ता बोझ प्रशासक ने नगर निकायों को पर्याप्त अधिकार और बजट देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सड़क, नाली, बिजली और सफाई जैसी जिम्मेदारियां स्थानीय निकायों की हैं, इसलिए उनके पास पर्याप्त संसाधन भी होने चाहिए। साथ ही अनावश्यक भर्तियों पर रोक लगनी चाहिए। राजनीतिक या व्यक्तिगत फायदे के लिए की गई अतिरिक्त भर्तियां निकाय के बजट पर बोझ डालती हैं और इसका असर आखिरकार जनता पर पड़ता है। कटारिया ने कहा कि मेयर और पार्षद का पद कुछ वर्षों के लिए मिलता है, लेकिन जनता के बीच उनका व्यवहार और काम लंबे समय तक याद रहता है। विकास के साथ सादगी, ईमानदारी, अच्छा व्यवहार और जरूरतमंद की मदद भी जनप्रतिनिधि की पहचान बनती है।



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